यह कहना बिल्कुल अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत आज ‘दुनिया के डॉक्टर’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। अपनी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं, किफ़ायती दवाओं और वैश्विक संकटों में अपनी अग्रणी भूमिका के कारण भारत ने मानवता की सेवा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।वैसे भी प्राचीन काल से ही भारत ‘आयुर्वेद’ और ‘सुश्रुत’ की विरासत के माध्यम से चिकित्सा जगत का मार्गदर्शक रहा है। लेकिन आधुनिक युग में, भारत ने तकनीकी प्रगति और दुनिया के स्वास्थ्य मानचित्र पर अपनी एक अनिवार्य जगह बना ली है।
बीते कुछ दशकों में वैश्विक परिदृश्य पर भारत की छवि न केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में सुदृढ़ हुई है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी देश ने ‘दुनिया के डॉक्टर’ का गौरवपूर्ण सम्मान प्राप्त किया है। यह बदलाव रातों-रात नहीं आया, बल्कि इसके पीछे भारत की विशाल दवा निर्माण क्षमता, अनुभवी डॉक्टरों की फौज और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों का आधुनिक विज्ञान के साथ सटीक तालमेल है।

आज जब हम वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं की बात करते हैं, तो भारत का नाम सबसे ऊपर आता है क्योंकि दुनिया भर में टीकों की कुल मांग का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा भारत ही पूरा करता है। किफ़ायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं के मामले में भारत ने विकसित देशों के एकाधिकार को चुनौती दी है, जिससे अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे गरीब देशों के आम नागरिकों तक जीवन रक्षक दवाएं पहुँचना संभव हो पाया है। विशेष रूप से एचआईवी, कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों की सस्ती दवाएं उपलब्ध कराकर भारत ने मानवताके प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को सिद्ध किया है।
कोरोना महामारी के उस भयावह काल ने भारत की इस ‘डॉक्टर’ वाली भूमिका को पूरी दुनिया के सामने अत्यंत स्पष्टता से रखा। जब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियाँ चरमरा रही थीं और विकसित राष्ट्र अपने संसाधनों को सुरक्षित करने में लगे थे, तब भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ की पहल के साथ सौ से अधिक देशों को करोड़ों टीके और आवश्यक दवाएं पहुँचाकर एक सच्चे अभिभावक की भूमिका निभाई।हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन जैसी दवाओं की वैश्विक मांग को पूरा करने से लेकर खुद का स्वदेशी टीका विकसित करने तक, भारत ने यह दिखा दिया कि उसकी वैज्ञानिक प्रगति केवल मुनाफे के लिए नहीं बल्कि ‘लोक कल्याण’ के लिए समर्पित है। आज भारत का चिकित्सा पर्यटन भी एक नए शिखर पर है। दुनिया के कोने-कोने से मरीज हार्ट सर्जरी, नी-रिप्लेसमेंट और ऑन्कोलॉजी जैसे जटिल इलाजों के लिए भारत का रुख कर रहे हैं, क्योंकि यहाँ पश्चिमी देशों की तुलना में केवल दसवें हिस्से की लागत पर विश्वस्तरीय उपचार मिलता है। भारत के पास न केवल जेसीआई प्रमाणित अस्पताल हैं, बल्कि ऐसे विशेषज्ञ डॉक्टर भी हैं जिनकी काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया मानती है।

