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प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अंतर्गत स्वच्छ परिवहन और महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत-कनाडा वार्ता से सकारात्मक परिणाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, विकसित भारत@2047 और 2070 तक नेट जीरो लक्ष्यों के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप स्वच्छ परिवहन, महत्वपूर्ण खनिजों और सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भारत और कनाडा के बीच सहयोग को नई गति मिली है। इसी क्रम में केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने नई दिल्ली स्थित उद्योग भवन में कनाडा के प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन के नेतृत्व में आए कनाडाई प्रतिनिधिमंडल के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की।

प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अंतर्गत स्वच्छ परिवहन और महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत-कनाडा वार्ता से सकारात्मक परिणाम

यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सतत विकास, तकनीकी नेतृत्व और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर दिए गए बल के अनुरूप लचीले और भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक इकोसिस्टम के निर्माण के भारत के निरंतर प्रयासों का हिस्सा रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों, स्वच्छ गतिशीलता, उन्नत विनिर्माण और टिकाऊ औद्योगिक विकास में सहयोग को और अधिक मजबूत करना था।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कनाडाई प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों और हरित क्षेत्रों में भारत-कनाडा सहयोग का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत और 2070 तक नेट जीरो का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया है, जिसमें ऑटोमोटिव, भारी विद्युत और पूंजीगत सामान क्षेत्र सतत विकास के प्रमुख स्तंभ हैं।

उन्होंने ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को रेखांकित करते हुए कहा कि आज भारत यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन, भारी ट्रक, दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्माण में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है। एफएएमई-2 योजना के माध्यम से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 16 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण हुआ है और देश भर में 10,900 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि इस प्रगति को और तेज करने के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना और पीएम ई-बस सेवा पहल को परिवर्तनकारी कार्यक्रमों के रूप में लागू किया जा रहा है। ये योजनाएं इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन, बसें, ई-ट्रक, चार्जिंग बुनियादी ढांचा और परीक्षण सुविधाओं को व्यापक समर्थन प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारतीय उत्पाद वैश्विक सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों पर खरे उतरें।

बैठक के दौरान एक प्रमुख विषय मजबूत और सुरक्षित बैटरी निर्माण इकोसिस्टम का विकास तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता रहा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने उन्नत रसायन प्रकोष्ठों में स्वदेशी क्षमता विकसित करने के लिए लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर का एक महत्वाकांक्षी प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने कनाडा की न केवल महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बल्कि उनकी प्रसंस्करण क्षमताओं की भी सराहना की और कहा कि इससे लचीली और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए मजबूत अवसर पैदा होते हैं।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खनिज विकास निगम कनाडा में कोयले के भंडार की सक्रिय रूप से खोज कर रहा है। यह पहल भारत की औद्योगिक आवश्यकताओं को दीर्घकालिक आधार पर सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मंत्री टिम हॉजसन के नेतृत्व में कनाडाई प्रतिनिधिमंडल ने उभरती प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक नवाचार में भारत की तेज प्रगति की सराहना की। उन्होंने भारत को बैटरी प्रौद्योगिकियों और स्वच्छ गतिशीलता समाधानों में एक संभावित वैश्विक अग्रणी बताया और भारतीय साझेदारों के साथ उन्नत बैटरी तकनीकों को साझा करने की कनाडा की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और विनिर्माण क्षेत्रों में भारतीय निजी क्षेत्र की सक्रिय भूमिका की भी प्रशंसा की और भारतीय बाजारों तक कनाडा की अधिक पहुंच की इच्छा जताई।

बैठक में बैटरी सेल और घटक निर्माण, अगली पीढ़ी की बैटरियों पर अनुसंधान एवं विकास, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला, परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना, स्वच्छ गतिशीलता समाधान और टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं में संयुक्त सहयोग के अवसरों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में समन्वित ढांचे विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।

चर्चा के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी, अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी, संयुक्त सचिव विजय मित्तल, इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनोद कुमार त्रिपाठी, एनएमडीसी के सीएमडी अमितवा मुखर्जी, बीएचईएल के सीएमडी केएस मूर्ति सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों और कनाडाई प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ सदस्यों की भागीदारी ने इस संवाद को बहुस्तरीय और व्यापक बनाया।

बैठक के समापन पर एच.डी. कुमारस्वामी ने स्वच्छ ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में कनाडा के साथ सहयोग को और मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि ये सभी पहलें मिलकर एक स्वच्छ, लचीला और आत्मनिर्भर ऑटोमोटिव इकोसिस्टम का निर्माण कर रही हैं और भारत को सतत गतिशीलता के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।

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