गणतंत्र दिवस परेड 2026: संस्कृति मंत्रालय की ‘वंदे मातरम – 150 वर्षों का सफर’ झांकी प्रथम, सांस्कृतिक प्रस्तुति को विशेष पुरस्कार

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में संस्कृति मंत्रालय ने दोहरा सम्मान प्राप्त कर राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की श्रेणी में मंत्रालय की झांकी “वंदे मातरम – 150 वर्षों का सफर” को सर्वश्रेष्ठ झांकी का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही भव्य सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति “वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूंज” को असाधारण कलात्मकता और विषयगत उत्कृष्टता के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय चेतना का जीवंत चित्रण

पुरस्कार विजेता झांकी ने ‘वंदे मातरम’ की डेढ़ शताब्दी लंबी यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। झांकी में इस गीत के राष्ट्रीय जागरण के स्वर के रूप में उद्भव, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी प्रेरक भूमिका, तथा देश की एकता और सभ्यतागत चेतना के निर्माण में इसके सतत योगदान को सशक्त प्रतीकों और भावनात्मक दृश्यों के माध्यम से दर्शाया गया। प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न अंग है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही जीवंत है।

विशेष पुरस्कार प्राप्त सांस्कृतिक प्रस्तुति

विशेष पुरस्कार से सम्मानित सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति “वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूंज” का आयोजन संगीत नाटक अकादमी ने पटियाला स्थित उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहयोग से किया। यह प्रस्तुति राष्ट्रऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को समर्पित थी, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस को एक सूत्र में बांधा।

इस प्रस्तुति में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए 2,500 कलाकारों ने सहभागिता की। शास्त्रीय, लोक और आदिवासी कला रूपों के संगम के माध्यम से भारत की व्यापक सांस्कृतिक विविधता और उसकी एकात्म भावना को मंच पर साकार किया गया।

इतिहास, आध्यात्म और समकाल का संगम

नृत्य संरचना ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों तथा सशस्त्र बलों के शौर्य और समर्पण तक की यात्रा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। संस्कृत मंत्रों, भावनात्मक संगीत और सशक्त नृत्य संयोजनों ने ‘वंदे मातरम’ के भावनात्मक और दार्शनिक पक्ष को व्यापक रूप से उकेरा। प्रस्तुति का समापन तिरंगे को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ हुआ, जिसने एकता, भक्ति और राष्ट्रीय गौरव की अनुभूति को और गहरा किया।

रचनात्मक नेतृत्व और प्रतिष्ठित योगदान

इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का समग्र रचनात्मक निर्देशन संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने किया। ऑस्कर विजेता संगीतकार एम.एम. कीरावानी ने संगीत निर्देशन संभाला, जबकि गीत सुभाष सहगल द्वारा लिखे गए। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता अनुपम खेर ने पार्श्व स्वर दिया। नृत्य निर्देशन संतोष नायर ने किया और वेशभूषा की परिकल्पना संध्या रमन ने की।

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