केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 43वीं बैठक संपन्न, चिड़ियाघरों के संरक्षण, प्रबंधन और मूल्यांकन पर हुआ व्यापक मंथन

देश भर में चिड़ियाघरों के संरक्षण, प्रबंधन और गुणवत्ता मानकों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय चिड़ियाघर उद्यान में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 43वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देश के विभिन्न चिड़ियाघरों से जुड़े बाह्य संरक्षण, प्रबंधन प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर गहन चर्चा की गई।

बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश भर के चिड़ियाघरों के प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन यानी एमईई के दूसरे चरण को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया साक्ष्य आधारित, व्यापक, समग्र और स्वतंत्र है, जिसका उद्देश्य भारतीय चिड़ियाघरों में उच्चतम मानकों को बनाए रखना और निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करना है।

बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों में चिड़ियाघरों के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत संभावित योगदान का आकलन करने और इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक उप समिति के गठन का निर्णय शामिल रहा। इसके साथ ही राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठकों के अनुरूप केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की बैठकों की आवृत्ति बढ़ाने पर भी सहमति बनी, ताकि नीतिगत निर्णयों में निरंतरता और प्रभावशीलता लाई जा सके।

चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि चिड़ियाघर केवल पशुओं को देखने के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे वन्यजीव संरक्षण, शिक्षा और जन जागरूकता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। चिड़ियाघर संबंधी राष्ट्रीय नीति के तहत यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि आगंतुकों में वन्यजीवों के प्रति सहानुभूति विकसित की जाए और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के महत्व को समझाया जाए। इसे प्राप्त करने के लिए चिड़ियाघरों में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवसों से जुड़ा वार्षिक कैलेंडर और कार्य योजना तैयार करने तथा प्रजाति आधारित भूमिकाएं तय करने पर सहमति व्यक्त की गई।

इसी दिन केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने अपना 34वां स्थापना दिवस भी मनाया। यह आयोजन मुख्य वन्यजीव वार्डन और चिड़ियाघर निदेशकों के सम्मेलन के साथ आयोजित किया गया, जिसने देश भर के अधिकारियों और विशेषज्ञों को चिड़ियाघर प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर विचार विमर्श का साझा मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि चिड़ियाघर केवल प्रदर्शन केंद्र नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए पशु व्यवहार, देखभाल और उन्नत चिकित्सा पद्धतियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चिड़ियाघरों में बेसहारा और असहाय पशुओं की देखभाल की जाती है, जिसके लिए अत्यधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है।

मुख्य वन्यजीव संरक्षकों और चिड़ियाघर निदेशकों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर विचार करने का आग्रह किया कि क्या वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा रहा है और अन्य चिड़ियाघरों के अनुभवों से सीख ली जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण युवा पीढ़ी वास्तविक प्राकृतिक दुनिया से दूर होती जा रही है। ऐसे में चिड़ियाघरों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, विशेष रूप से शहरी युवाओं को प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने में।

तेजी से हो रहे तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए मंत्री ने यह प्रश्न उठाया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग चिड़ियाघरों के बेहतर प्रबंधन, पशु देखभाल में सुधार और आगंतुकों के अनुभव को समृद्ध बनाने के लिए कैसे किया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

वन महानिदेशक और विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी ने कहा कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण का स्थापना दिवस नैतिक और संरक्षण आधारित चिड़ियाघर प्रबंधन को सशक्त करने की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। वहीं पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अतिरिक्त महानिदेशक रमेश कुमार पांडे ने कहा कि भारत का चिड़ियाघर प्रबंधन वैश्विक स्तर पर विशिष्ट है, क्योंकि देश के 150 से अधिक चिड़ियाघरों में से अधिकांश का संचालन वन विभागों द्वारा किया जाता है।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सदस्य सचिव वी. क्लेमेंट बेन ने कहा कि सीजेडए ने भारतीय चिड़ियाघरों को पारंपरिक पशु प्रदर्शन केंद्रों से आगे बढ़ाकर पेशेवर रूप से प्रबंधित संरक्षण संस्थानों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

दिन भर चले सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में नीति, व्यवहार, विज्ञान और प्रशासनिक दृष्टिकोणों को एक साथ लाया गया। सत्रों में आधुनिक चिड़ियाघर प्रबंधन, संरक्षण प्रजनन, पशु चिकित्सा देखभाल, पशु पोषण, स्थिरता और एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही पशुओं, पारिस्थितिकी तंत्रों और मानव समुदायों के परस्पर जुड़े कल्याण पर भी जोर दिया गया, जिससे वन्यजीव संरक्षण के लिए समन्वित और जानकारी आधारित कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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