इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पांचवें दिन भारत ने औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल होकर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रणनीतिक प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को नई मजबूती प्रदान की। यह कदम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी का संकेत देता है।

हस्ताक्षर समारोह में भारत और अमेरिका के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस पहल को उच्च स्तरीय राजनीतिक समर्थन प्रदान किया। पैक्स सिलिका को विश्वसनीय राष्ट्रों के एक रणनीतिक गठबंधन के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर उन्नत एआई प्रणालियों तक संपूर्ण सिलिकॉन स्टैक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस पहल का लक्ष्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अत्यधिक एकाग्रता को कम करना, आर्थिक दबाव की संभावनाओं को सीमित करना और उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास को लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बनाए रखना है।
तकनीकी संप्रभुता और भविष्य निर्माण का संदेश
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस समझौते को केवल एक औपचारिक दस्तावेज न बताते हुए इसे भविष्य निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा कहा। उन्होंने कहा कि भारत नई पीढ़ी के लिए अवसरों की मजबूत नींव रख रहा है।
उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की चक्रवृद्धि विकास दर का उल्लेख करते हुए बताया कि देश की प्रौद्योगिकी क्षमता निरंतर विस्तार पर है। उन्होंने कहा कि भारत के इंजीनियर आज विश्व की अत्याधुनिक दो नैनोमीटर चिप्स डिजाइन कर रहे हैं। सेमीकंडक्टर उद्योग में आने वाले वर्षों में लगभग दस लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी, जिसे उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।
आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा गया
समारोह में संयुक्त राज्य अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने पैक्स सिलिका को साझा भविष्य का रोडमैप बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल तकनीकी सहयोग नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जोड़ने का प्रयास है। उनके अनुसार यह गठबंधन हथियारबंद निर्भरता और आर्थिक ब्लैकमेल की संभावनाओं को समाप्त करने की दिशा में कदम है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी भारत की भागीदारी को रणनीतिक और आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पैक्स सिलिका 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने वाला मंच बन सकता है। उनके अनुसार यह गठबंधन खनन से लेकर चिप निर्माण और डेटा केंद्रों तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है।
एआई और सेमीकंडक्टर के बीच रणनीतिक तालमेल
पैक्स सिलिका समझौते पर हस्ताक्षर के बाद एक उच्च स्तरीय चर्चा आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, Micron Technology के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय मेहरोत्रा और Tata Electronics के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक रणधीर ठाकुर शामिल हुए।
इस चर्चा में एआई महत्वाकांक्षा और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के बीच समन्वय पर जोर दिया गया। एस. कृष्णन ने कहा कि भारत का लक्ष्य उन विश्वसनीय साझेदारों के साथ सहयोग को सुदृढ़ करना है जो समान मूल्यों को साझा करते हैं, ताकि भविष्य की वैश्विक तकनीकी संरचना में भारत की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
सर्जियो गोर ने कहा कि एआई क्रांति भविष्य की संभावना नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है। संजय मेहरोत्रा ने लचीली और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण को साझा प्रतिबद्धता बताया। रणधीर ठाकुर ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग का विकास सामग्री, नवाचार और कंप्यूटिंग के संयोजन पर आधारित है, और पैक्स सिलिका इस दिशा में समयोचित कदम है।
व्यापक रणनीतिक संदर्भ
पैक्स सिलिका पहल को ऐसे समय में आगे बढ़ाया गया है जब वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं की विश्वसनीयता और स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत चिप निर्माण और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों पर नियंत्रण भविष्य की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को निर्धारित करेगा।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में इस समझौते के साथ यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि उन्नत प्रौद्योगिकियों का भविष्य संयोग पर नहीं छोड़ा जाएगा। इसे दीर्घकालिक रणनीति, लोकतांत्रिक साझेदारी और संस्थागत लचीलेपन के आधार पर निर्मित किया जाएगा।