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मैसूरु में बायोनेस्ट इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन: खाद्य स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को नई दिशा

मैसूरु स्थित केन्द्रीय खाद्य तकनीकी एवं अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) में वैज्ञानिक नवाचार और उद्यमिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहाँ बीआईआरएसी-बायोनेस्ट इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया, जो खाद्य प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स के लिए एक उन्नत मंच के रूप में स्थापित किया गया है।

यह अत्याधुनिक सुविधा स्टार्टअप्स को समर्पित इनक्यूबेशन सुइट्स, साझा अनुसंधान अवसंरचना और तकनीकी सहायता प्रदान करती है, जिससे प्रयोगशाला में विकसित विचारों को व्यावसायिक उत्पादों में रूपांतरित करने की प्रक्रिया को गति मिल सके। इस पहल का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण, न्यूट्रास्यूटिकल्स, प्रिसिजन फर्मेंटेशन और जैव-आधारित नवाचारों को प्रोत्साहित करना है, जो तेजी से विकसित हो रहे वैश्विक खाद्य बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं।

मार्च 2026 तक, बायोनेस्ट सुविधा ने 26 स्टार्टअप्स को समर्थन प्रदान किया है, जिनमें भौतिक और हाइब्रिड इनक्यूबेट्स के साथ-साथ स्नातक उद्यम भी शामिल हैं। इन स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से 12 पेटेंट दाखिल किए हैं और कई अनुसंधान प्रकाशनों में योगदान दिया है। उल्लेखनीय है कि इनमें से कई कंपनियां अपने उत्पादों का सफल व्यावसायीकरण कर चुकी हैं, जो इस इनक्यूबेशन मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

इन स्टार्टअप्स की गतिविधियाँ उच्च-मूल्य और विज्ञान-आधारित क्षेत्रों जैसे प्रोबायोटिक्स, पोस्टबायोटिक्स, सीआरआईएसपीआर-आधारित प्रौद्योगिकी और वानस्पतिक उत्पादों तक फैली हुई हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय खाद्य क्षेत्र में पारंपरिक प्रसंस्करण से आगे बढ़कर उन्नत जैव-तकनीकी समाधानों की ओर हो रहे बदलाव को रेखांकित करती है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्यमियों के साथ संवाद करते हुए स्पष्ट किया कि आज के दौर में स्टार्टअप शुरू करना अपेक्षाकृत सरल हो गया है, किन्तु उसे टिकाऊ बनाना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि निरंतर नवाचार, बाजार तक पहुँच, और उद्योग के साथ सुदृढ़ साझेदारी ही किसी भी उद्यम की सफलता के मूल तत्व हैं। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को और अधिक गहन बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए वित्तपोषण तंत्र और संस्थागत ढाँचे विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही वैज्ञानिक संस्थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और लक्षित संचार रणनीतियों के माध्यम से अपनी तकनीकों का व्यापक प्रसार करने की आवश्यकता बताई, ताकि उद्योग और समाज में इनका अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए तथा सीएफटीआरआई द्वारा विकसित दो नए उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया। यह कदम उद्योग के साथ संस्थान की निरंतर सहभागिता और स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण की दिशा में एक ठोस संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के सहयोग से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के साथ संबंध मजबूत होंगे और नवाचारों का व्यापक प्रसार संभव हो सकेगा।

संस्थान की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया, जिनमें एक कॉफी टेबल बुक, अनुसंधान एवं विकास उपलब्धियों का संकलन, एक फोटो यात्रा और पारंपरिक व्यंजनों का संग्रह शामिल हैं। इसके साथ ही एक स्मारक डाक कवर और चित्र पोस्टकार्ड का अनावरण भी किया गया, जो संस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धियों को चिह्नित करते हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनी ने ‘प्रयोगशाला से बाजार तक’ की अवधारणा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इसमें सीएफटीआरआई और उसके लाइसेंसधारियों द्वारा विकसित 450 से अधिक प्रौद्योगिकियों, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों और स्टार्टअप नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। हजारों लाइसेंसधारियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ यह संस्थान देश में खाद्य अनुसंधान और उद्योग सहयोग का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।

अधिकारियों के अनुसार, बायोनेस्ट पारिस्थितिकी तंत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से पहचान मिल रही है। इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स वैश्विक मंचों पर भागीदारी कर रहे हैं, व्यावसायिक सफलता हासिल कर रहे हैं और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी विशेष खाद्य अनुप्रयोगों के लिए ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

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