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उठो जगत जननी नारी तुम…

– 08 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-

उठो जगत जननी नारी तुम…

युग निर्माण तुम्हें है करना।
भारत की आज़ाद नींव में,
तुम्हें प्रगति पत्थर है भरना…

तुम फूलों से सज्जित क्यारी,
ममता मूर्ति समस्त जगत की।
अपनी संस्कृति का हो गौरव,
आहट हो स्वर्णिम आगत की।

तुम्हें नया इतिहास देश का,
अपने कर्मों से है रचना…

तुम ही विमल वल्लरी हो,
जिसमें नूतन प्रसून हैं खिलते।
तुम ही हो वह अतुलित प्रांगण,
जिसमें शेखर, बिस्मिल पलते।

तुम्हें प्रेरणा बनकर हर मोती
 को है श्रम सीकर करना…

लक्ष्मी हो तुम, दुर्गा हो तुम,
सरस्वती हो, सीता हो तुम।
सत्य मार्ग को प्रशस्त करती,
रामायण हो, गीता हो तुम।

रूढ़ि, विषमताओं के बंधन
तोड़ तुम्हें है आगे बढ़ना…

साहस त्याग दया ममता की,
तुम प्रतीक हो अवतारी।
कठिन समय बन जाती हो
 तुम लक्ष्मीबाई झलकारी।

आंधी हो या हो तूफान,
पथ पर कभी नहीं है रुकना…

सुभाष की लक्ष्मी रेजिमेंट हो,
गांधी की महिला ब्रिगेड तुम।
सैनिक बन, सैनिक सम
सरहद की रक्षा करती हो तुम।

सबल सशक्त हौसलों से,
तुमको है आन देश की बनना…

अंतरिक्ष,राजनीति या शिक्षा,
या सेवाएं हों सरकारी।
तुम भी पुरुषों के समान ही,
हो हर एक पद की अधिकारी।

तुम्हें नए प्रतिमान सृजन के,
अपने हाथों से है गढ़ना… !!!

स्मृति श्रीवास्तव
स्मृति श्रीवास्तव

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