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फुकेट से जकार्ता की ओर बढ़ा ‘आईओएस सागर’: समुद्री सहयोग के नए आयाम गढ़ती भारतीय नौसेना

दक्षिणपूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को सुदृढ़ करते हुए INS Sunayna के माध्यम से संचालित ‘आईओएस सागर’ मिशन ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 17 अप्रैल 2026 को थाईलैंड के फुकेट बंदरगाह से जहाज का प्रस्थान न केवल उसके दूसरे पोर्ट कॉल की औपचारिक समाप्ति है, बल्कि यह क्षेत्रीय समुद्री कूटनीति और परिचालन सहयोग के विस्तार का संकेत भी देता है।

तीन दिनों तक चले तीव्र परिचालन बदलाव (Operational Turnaround) के दौरान जहाज ने लॉजिस्टिक दक्षता, मिशन तत्परता और बहुपक्षीय सहभागिता का प्रदर्शन किया। यह तैनाती उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में निरंतर सक्रिय है।

द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग को नई गति

फुकेट प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना और Royal Thai Navy के बीच कई स्तरों पर सार्थक संवाद हुआ। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर सिद्धार्थ चौधरी ने तीसरे नौसेना क्षेत्र कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल सथापोर्न वजारत के साथ औपचारिक बैठक की। इस वार्ता में समुद्री सुरक्षा, साझा अभ्यासों और क्षेत्रीय चुनौतियों के संदर्भ में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

यह संवाद केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से दोनों देशों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और दीर्घकालिक रणनीतिक समन्वय की आधारशिला और सुदृढ़ हुई।

सैन्य से परे: सांस्कृतिक और मानवीय जुड़ाव

इस दौरे की एक विशेषता यह रही कि इसमें सैन्य सहयोग के साथ-साथ मानवीय और सांस्कृतिक संपर्क को भी प्राथमिकता दी गई। आईओएस सागर और आरटीएन के कर्मियों के बीच आयोजित मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच और संयुक्त योग सत्र ने आपसी समझ और सौहार्द को नया आयाम दिया।

जहाज पर आयोजित औपचारिक स्वागत समारोह में वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों की उपस्थिति ने इस यात्रा को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। इस अवसर पर ‘आईओएस सागर’ मिशन के उद्देश्यों, क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। आम नागरिकों के लिए जहाज को खोलना इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा, जिससे ‘पीपल-टू-पीपल’ कनेक्ट को बढ़ावा मिला।

पासेक्स के माध्यम से परिचालन क्षमता का प्रदर्शन

फुकेट से प्रस्थान के उपरांत HTMS Klongyai के साथ आयोजित पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) ने दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन अंतरसंचालनीयता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। इस अभ्यास में संचार प्रणाली के समन्वय और गठन युद्धाभ्यास शामिल थे, जिनके माध्यम से ‘प्लग-एंड-प्ले’ क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता को परखा गया।

इस प्रकार के अभ्यास न केवल तकनीकी दक्षता को बढ़ाते हैं, बल्कि संभावित समुद्री संकटों के समय संयुक्त प्रतिक्रिया की क्षमता को भी सुदृढ़ करते हैं।

‘सागर’ दृष्टिकोण के अनुरूप रणनीतिक विस्तार

आईओएस सागर मिशन भारत की उस व्यापक समुद्री नीति का हिस्सा है, जिसे “Security and Growth for All in the Region (SAGAR)” के रूप में परिभाषित किया गया है। इस नीति का मूल उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक सुरक्षा ढांचे का निर्माण करना है, जहां सभी सहभागी देशों के हितों का संतुलित संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

फुकेट यात्रा और उसके दौरान हुए बहुआयामी संवाद इस बात का प्रमाण हैं कि भारत केवल सामरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह क्षेत्रीय साझेदारियों को गहराई प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है।

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