ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को गति देने के उद्देश्य से ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को केंद्र में रखते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है। दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (FNHW) फ्रेमवर्क के तहत हेल्पएज इंडिया के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह साझेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्धजन देखभाल के लिए सामुदायिक-आधारित मॉडल विकसित करने की दिशा में एक ठोस प्रयास मानी जा रही है।

समझौते पर मंत्रालय के अपर सचिव टी. के. अनिल कुमार और हेल्पएज इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित प्रसाद ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों—बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु—के प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अपर सचिव टी. के. अनिल कुमार ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए समग्र, समुदाय-आधारित और अभिसरित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने नीति आयोग द्वारा सुझाए गए सुलभ और गरिमापूर्ण सामुदायिक देखभाल मॉडल को विकसित करने पर जोर दिया और राज्यों के अनुभवों से सीखते हुए एक प्रभावी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता रेखांकित की।
संयुक्त सचिव स्वाती शर्मा ने इस पहल को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से भी जोड़ा। उनका कहना था कि “लखपति दीदी” अभियान को सुदृढ़ करने में यह कदम सहायक सिद्ध होगा, क्योंकि स्वस्थ और सक्षम महिलाएं ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
हेल्पएज इंडिया के सीईओ रोहित प्रसाद ने ग्रामीण भारत में तेजी से बढ़ती वृद्धजन आबादी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य, पोषण, गतिशीलता और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं वरिष्ठ नागरिकों के सामने गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हेल्पएज इंडिया के अनुभव और DAY-NRLM के व्यापक स्वयं सहायता समूह (SHG) नेटवर्क के संयोजन से इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव होगा।
उप सचिव डॉ. मोनिका ने जानकारी दी कि FNHW फ्रेमवर्क के अंतर्गत अब तक किए गए प्रयासों से सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों में पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है और व्यवहार में भी परिवर्तन आया है। इसी क्रम में अब वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को प्राथमिकता के रूप में शामिल किया जा रहा है।
इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से वृद्धजनों के लिए स्थानीय स्तर पर समाधान विकसित किए जाएंगे। सामाजिक समावेशन के अंतर्गत पहले से सक्रिय वरिष्ठ नागरिक SHGs इस दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र रणनीति विकसित की जाएगी, जिसमें क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करना और कार्यान्वयन के लिए आवश्यक संसाधनों का विकास शामिल होगा। प्रारंभिक चरण में पांच राज्यों—बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु—में पायलट परियोजना लागू की जाएगी। इसके आधार पर एक ऐसा मॉडल तैयार करने का लक्ष्य है जिसे देशभर में विस्तार दिया जा सके।