नवअनुभव व ज्ञान संसार का
अतुलनीय भंडार किताबें।
समाज के सभ्य स्वरूप का,
सुसंस्कृत विस्तार किताबें।
संतों के दोहे, ऋषियों की वाणी,
का अतुल्य उपहार किताबें।
वेद श्रुतियों में निहित नीति
वचनों का हैं उद्गार किताबें ।
जप तप, अर्घ्य ध्यान पूजा
कृत ईश वंदना हैं ये किताबें।
वीर शहीदों के बलिदान की,
स्तुत्य अर्चना हैं ये किताबें।
आज कल के,हर एक पल के,
सुख दुःख का आभास किताबें।
बीते ज़माने की, दुनिया की,
बातों का इतिहास किताबें।
तनहाइयों की सच्ची साथी,
दुख में सारथी हैं ये किताबें।
जीत हार, तिरस्कार प्यार की,
कुशल पारखी हैं ये किताबें।
नदी की कल कल,चिड़ियों की
सुरीली चहचहाहट हैं किताबें।
हवा के ठंडे झोकों और निर्झर
की मधुर गुनगुनाहट हैं किताबें।
मां की ममता, पिता के आशीषों
की मनभावन फुहार हैं किताबें।
सैनिकों के अदम्य साहस और
शौर्य की हैं झंकार किताबें।
परम मित्र ,सच्ची मनमीत
सर्वोच्च सलाहकार हैं किताबें।
देश की उन्नति, मानवता के
विकास का आधार हैं किताबें !!!

लेखक के बारे में : स्मृति श्रीवास्तव का तृतीय काव्य संग्रह डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित “अन्तर्ध्वनि” समकालीन हिंदी काव्यधारा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में उभरता है। हिंदी साहित्य में एम.ए. उपाधि प्राप्त करने के उपरांत लेखिका ने अपना जीवन हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संवर्धन को समर्पित किया है। नई दिल्ली के सेंट थॉमस स्कूल में दो दशकों तक हिंदी एवं संस्कृत का अध्यापन, दिल्ली विश्वविद्यालय के नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए दुर्लभ ग्रंथों का वाचन-रिकॉर्डिंग तथा वंचित महिलाओं के लिए सामाजिक सक्रियता—इन सभी अनुभवों की गहन मानवीय संवेदना इस कृति की पंक्तियों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।