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दवा मूल्य निर्धारण नीति सुधार

औषधि विभाग ने दिनांक 30 जून, 2026 को अधिसूचना संख्या 3516(ई) के माध्यम से औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के कुछ वर्तमान प्रावधानों में संशोधन अधिसूचित किए हैं। इन संशोधनों में अन्य बातों के अलावा, अधिक कीमत वसूलने के मामलों में औषधि निर्माताओं की जवाबदेही, किसी मौजूदा निर्माता द्वारा शुरुआत की जाने वाली नई दवा के खुदरा मूल्य के लिए पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता आदि से संबंधित मुद्दों का समाधान किया गया है। उपरोक्त अधिसूचना के माध्यम से किए गए संशोधन व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देंगे और इस क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहित करेंगे। उक्त अधिसूचना इस वेब लिंक पर उपलब्ध है: https://pharma-dept.gov.in/sites/default/files/13th%20Amendment%20%20S.O.%203516%20%28E%29%20dated%2030%20June%202026.pdf

इस संशोधन के अंतर्गत, निर्माता की अधिक कीमत वसूलने की देयता संबंधित वितरक, खुदरा विक्रेता या स्टॉकिस्ट द्वारा वास्तव में अधिक कीमत पर बेची गई स्टॉक की मात्रा तक सीमित कर दी गई है, बशर्ते कि डीपीसीओ, 2013 में इस संबंध में किए गए प्रावधानों का अनुपालन किया जाए। इसके अलावा, डीपीसीओ के उस प्रावधान में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार अनुसूचित दवाओं के सभी मौजूदा निर्माताओं को किसी आवश्यक दवा को दूसरी दवा के साथ मिलाकर या आवश्यक दवा की शक्ति या खुराक या दोनों में परिवर्तन करके निर्मित किसी फॉर्मूलेशन को लॉन्च करने से पहले व्यक्तिगत रूप से मूल्य अनुमोदन प्राप्त करना होगा। संशोधित प्रावधान के अनुसार, एक बार जब राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) किसी निर्माता के लिए किसी नई दवा का खुदरा मूल्य निर्धारित कर देता है, तो उसी फॉर्मूलेशन के अन्य मौजूदा निर्माता अगले 12 महीनों तक पूर्व मूल्य अनुमोदन प्राप्त किए बिना उसी या कम कीमत को अपना सकते हैं। इसके अतिरिक्त, डीपीसीओ 2013 में निर्माता द्वारा निर्मित या आयातित और विपणन की गई व्यक्तिगत सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री या थोक दवाओं की बिक्री, फॉर्मूलेशन इकाइयों और पैकों की बिक्री आदि के संबंध में रिकॉर्ड रखने के लिए कोई निर्दिष्ट समय सीमा निर्धारित नहीं की गई थी। इस प्रावधान में संशोधन करके रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता को वर्तमान वित्तीय वर्ष से ठीक पहले के सात वित्तीय वर्षों तक सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने एक ही दवा के लिए अलग-अलग अधिकतम या खुदरा मूल्य निर्धारित करने का प्रावधान किया है, जहां चिकित्सीय तर्क के आधार पर ऐसा अलग मूल्य निर्धारण उचित हो, ताकि स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने वाले नवाचारों को बढ़ावा दिया जा सके।

इन संशोधनों से बाद के आवेदनों के लिए पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, अनुपालन का बोझ कम हो जाता है और बाजार में ऐसी दवाओं की तेजी से लॉन्च हो पाती है, जिससे ऐसी दवाओं के उपयोगकर्ताओं को अधिक प्रभावी, कारगर और/या उपयोग में आसान दवाएं उपलब्ध हो पाती हैं और मरीजों की पहुंच में सुधार होता है, जिससे उपभोक्ता और निर्माता दोनों को लाभ होता है।

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने यह जानकारी आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी। साभार : पीआईबी

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