केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने के लिए बहुपक्षीय विकास बैंकों, राष्ट्रीय सरकारों और निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं में निवेश जोखिम को कम करना, परियोजनाओं को बैंक योग्य बनाना और निवेशकों का विश्वास मजबूत करना विकास वित्त की महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।
जयपुर में ब्रिक्स सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक के गवर्नरों (FMCBG) की बैठक के दौरान “द रोल ऑफ द न्यू डेवलपमेंट बैंक इन मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल इन मेंबर कंट्रीज” विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य भाषण देते हुए वित्त मंत्री ने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में निजी पूंजी की भागीदारी बढ़ाने के लिए संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

सेमिनार में न्यू डेवलपमेंट बैंक की अध्यक्ष महामहिम सुश्री डिल्मा रूसेफ ने विशेष संबोधन किया। इस अवसर पर वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की सचिव सुश्री अनुराधा ठाकुर तथा फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री विजय शंकर भी उपस्थित रहे।
सार्वजनिक पूंजी निजी निवेश की पूरक बने
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भारत का अनुभव यह दर्शाता है कि सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसके उत्प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत सरकार ने लगातार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और उससे जुड़े संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से देश के अवसंरचना तंत्र को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका उद्देश्य राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स प्रणालियों, डिजिटल अवसंरचना और ऊर्जा नेटवर्क जैसी उत्पादक राष्ट्रीय परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। मजबूत सार्वजनिक अवसंरचना निजी क्षेत्र के लिए नए निवेश अवसर तैयार करती है और आर्थिक गतिविधियों को गति देती है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई ऐसे संस्थागत और वित्तीय उपाय किए हैं, जिनसे परियोजनाओं की व्यवहार्यता तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इनमें आर्थिक रूप से सीमित लेकिन सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF), सड़क क्षेत्र में जोखिम के संतुलित वितरण के लिए हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM), परियोजनाओं की बैंक ऋण प्राप्त करने की क्षमता बढ़ाने वाले क्रेडिट एन्हांसमेंट उपाय और दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) शामिल हैं।
उन्होंने नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन को निवेशकों के लिए दीर्घकालिक स्पष्टता उपलब्ध कराने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया। इसी प्रकार पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, बेहतर समन्वय और परियोजनाओं के अधिक प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
बजट 2026-27 में निजी निवेश को बढ़ावा
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्रीय बजट 2026-27 में भी कई लक्षित उपाय किए हैं। इनमें नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, नए राष्ट्रीय जलमार्गों की शुरुआत तथा तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना जैसे कदम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन पहलों का व्यापक उद्देश्य देश में परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, माल ढुलाई को अधिक कुशल बनाना और निजी निवेश के लिए नए अवसर तैयार करना है।
भरोसा और पूर्वानुमेयता जरूरी
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि ब्रिक्स सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने के मामले में इन देशों के सामने कई समान संरचनात्मक चुनौतियां हैं।
उन्होंने कहा कि चुनौती केवल पूंजी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। निवेशकों के लिए भरोसा, स्थिरता, पूर्वानुमेयता और विश्वसनीय दीर्घकालिक संस्थागत ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। निजी क्षेत्र की निरंतर भागीदारी के लिए ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं आवश्यक हैं, जो निवेशकों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेने में सक्षम बनाएं।
वित्त मंत्री ने कहा कि विकासात्मक वित्त का भविष्य साझेदारी में निहित है। बहुपक्षीय विकास संस्थानों के पास वैश्विक अनुभव और वित्तीय क्षमता है, राष्ट्रीय सरकारों के पास नीतिगत तथा संस्थागत आधार तैयार करने की क्षमता है और निजी क्षेत्र के पास पूंजी, तकनीकी विशेषज्ञता तथा परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता है। इन क्षमताओं को एक साथ लाकर विकास के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाए जा सकते हैं।
विकास वित्त में दीर्घकालिक ढांचे की जरूरत
सेमिनार के स्वागत भाषण में आर्थिक कार्य विभाग की सचिव सुश्री अनुराधा ठाकुर ने कहा कि विकासात्मक वित्त ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने के साथ-साथ वित्तीय मजबूती और दीर्घकालिक स्थिरता भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पूंजी जुटाने की प्रक्रिया केवल अनुकूल बाजार परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रह सकती। इसके लिए ऐसे मजबूत संस्थागत ढांचे विकसित करने होंगे, जो लंबे समय तक टिकाऊ रहें। बहुपक्षीय सहयोग इन ढांचों को मजबूत करने और सदस्य देशों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों ने की व्यापक चर्चा
सेमिनार में वरिष्ठ नीति निर्माताओं, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने विकासात्मक वित्त और निजी पूंजी जुटाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
इसके बाद आयोजित पैनल चर्चा में आईआरडीएआई के चेयरमैन श्री अजय सेठ, न्यू डेवलपमेंट बैंक के वाइस प्रेसिडेंट श्री रोमन सेरोव, सर्ट्रेडिंग के श्री एलेसांद्रो टेक्सीरा, टेनसेंट के सीनियर एडवाइजर श्री योंगपिंग झाई तथा टाटा कैपिटल डिकार्बनाइजेशन फंड के श्री पंकज सिंडवानी सहित ब्रिक्स सदस्य देशों, वित्तीय संस्थानों, थिंक टैंक और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
चर्चा में विकासशील देशों में निजी पूंजी को आकर्षित करने, परियोजनाओं की बैंक-योग्यता बढ़ाने, निवेश जोखिम कम करने तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।