कैंसर के दोबारा लौटने, उपचार के प्रति प्रतिरोध और बीमारी के बढ़ने में भूमिका निभाने वाली कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं (Cancer Stem-like Cells) की पहचान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एक नए कम्प्यूटेशनल ढांचे के माध्यम से अधिक विस्तृत स्तर पर की जा सकती है। वैज्ञानिकों ने ACSCeND (AI-based Cancer Stem-like Cell profiler and Neoplasm Deconvoluter) नामक मशीन लर्निंग आधारित प्रणाली विकसित की है, जो कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं को उनकी विकासात्मक क्षमता के आधार पर तीन अवस्थाओं में वर्गीकृत करती है और बल्क RNA सीक्वेंसिंग के आंकड़ों से इन कोशिकीय अवस्थाओं के अनुपात का अनुमान लगा सकती है।
यह शोध S.N. Bose National Centre for Basic Sciences, कोलकाता और Ashoka University, सोनीपत के शोधकर्ताओं ने किया है। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ताओं में देबोज्योति चौधरी, श्रेयांश प्रियदर्शी, सयान बिस्वास, भावेश नीखरा, देबायन गुप्ता और शुभाशीष हलदर शामिल हैं। शोध NAR Cancer में 2026 में प्रकाशित हुआ है।

कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाएं क्यों महत्वपूर्ण हैं
कैंसर केवल तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं का समूह नहीं है। ट्यूमर के भीतर अलग-अलग प्रकार की कोशिकाएं मौजूद होती हैं, जिनकी जैविक विशेषताएं और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाएं इस जटिलता में विशेष महत्व रखती हैं। शोध के अनुसार इनमें स्वयं को बनाए रखने, विभिन्न प्रकार की ट्यूमर कोशिकाओं में विकसित होने और बदलते सूक्ष्म वातावरण के अनुसार अपनी अवस्था बदलने की क्षमता होती है।
इसी कोशिकीय प्लास्टिसिटी के कारण ये कोशिकाएं उपचार से बच निकलने, ट्यूमर के दोबारा विकसित होने और बीमारी के आगे बढ़ने में योगदान कर सकती हैं। अध्ययन में इन्हें ट्यूमर की विविधता और उपचार प्रतिरोध से जुड़ी महत्वपूर्ण कोशिकीय आबादी के रूप में देखा गया है।
तीन अलग-अलग अवस्थाओं की पहचान
ACSCeND की प्रमुख विशेषता यह है कि यह कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं को केवल एक सामान्य ‘स्टेमनेस स्कोर’ तक सीमित नहीं करता। यह उन्हें तीन विकासात्मक अवस्थाओं में वर्गीकृत करता है—
- प्लुरिपोटेंट-लाइक
- मल्टीपोटेंट-लाइक
- यूनिपोटेंट-लाइक
शोध के अनुसार प्लुरिपोटेंट-लाइक अवस्था में कोशिकाओं की विकासात्मक क्षमता और प्लास्टिसिटी अधिक होती है। इसके बाद मल्टीपोटेंट-लाइक और फिर यूनिपोटेंट-लाइक अवस्थाएं अपेक्षाकृत अधिक सीमित विकासात्मक क्षमता से जुड़ी हैं। अध्ययन में प्सूडोटाइम विश्लेषण ने भी इन अवस्थाओं के बीच क्रमिक विकासात्मक संबंध का संकेत दिया।
इस वर्गीकरण का महत्व इसलिए है क्योंकि सभी कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं को समान जैविक व्यवहार वाली आबादी मानने के बजाय उनके बीच मौजूद कार्यात्मक अंतर को समझने का अवसर मिलता है।
सिंगल-सेल डेटा से बल्क ट्यूमर डेटा तक
कैंसर की कोशिकीय विविधता को समझने के लिए सिंगल-सेल RNA सीक्वेंसिंग अत्यंत उपयोगी है, लेकिन यह तकनीक महंगी और तकनीकी रूप से जटिल हो सकती है। दूसरी ओर, बल्क RNA सीक्वेंसिंग अपेक्षाकृत बड़े मरीज समूहों में उपलब्ध हो सकती है, लेकिन इसमें अलग-अलग कोशिकीय आबादियों की पहचान करने की क्षमता सीमित होती है।
ACSCeND इसी अंतर को पाटने का प्रयास करता है। इसका पहला मॉड्यूल सिंगल-सेल RNA सीक्वेंसिंग डेटा का इस्तेमाल कर कोशिकाओं को अलग-अलग potency states में वर्गीकृत करता है। दूसरा, डीप लर्निंग आधारित deconvolution मॉड्यूल बल्क RNA सीक्वेंसिंग डेटा से इन कोशिकीय अवस्थाओं के अनुपात का अनुमान लगाता है।
अध्ययन के अनुसार, मॉडल को लगभग 40,000 क्यूरेटेड स्टेम कोशिकाओं और आठ स्वतंत्र संदर्भ डेटासेट से प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद इसे स्वतंत्र डेटासेट पर परखा गया।
परीक्षणों में मजबूत प्रदर्शन
शोधकर्ताओं ने ACSCeND की तुलना मौजूदा stemness inference प्रणालियों, जिनमें CytoTrace और CytoTrace2 शामिल हैं, से की। स्वतंत्र validation datasets में ACSCeND ने तीनों potency states के बीच मजबूत भेद करने की क्षमता दिखाई। Precision-Recall AUC प्लुरिपोटेंट-लाइक और यूनिपोटेंट-लाइक अवस्थाओं के लिए 1.000 तथा मल्टीपोटेंट-लाइक अवस्था के लिए 0.992 रहा।
अध्ययन में 49 शोध अध्ययनों से लगभग 24 लाख कोशिकाओं का सिंगल-सेल RNA सीक्वेंसिंग डेटा लिया गया, जो 12 ठोस कैंसर प्रकारों से संबंधित था। विश्लेषण में विभिन्न कैंसरों के बीच कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं की potency-state संरचना में स्पष्ट अंतर पाया गया।
25 हजार से अधिक ट्यूमर प्रोफाइल का विश्लेषण
ACSCeND को बड़े कैंसर डेटासेट पर लागू करने के लिए शोधकर्ताओं ने The Cancer Genome Atlas (TCGA) और PRECOG सहित विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया। अध्ययन के सार के अनुसार, 25,000 से अधिक ट्यूमर प्रोफाइलों के विश्लेषण में कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं की अधिकता का संबंध खराब disease-free survival और कम immunotherapy efficacy से पाया गया।
TCGA में 7,020 और PRECOG में 6,402 नमूनों के विश्लेषण से कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं की अवस्थाओं और बीमारी के विभिन्न नैदानिक पहलुओं के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया। उच्च potency वाली, विशेषकर प्लुरिपोटेंट-लाइक कोशिकाएं, survival analysis में अधिक प्रतिकूल prognostic संकेतों से जुड़ी मिलीं।
दोबारा लौटने वाले ट्यूमर में प्लुरिपोटेंट-लाइक कोशिकाओं की बढ़ोतरी
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष ट्यूमर relapse से संबंधित है। शोधकर्ताओं ने उपचार से पहले और relapse के बाद के paired bulk RNA-seq नमूनों का विश्लेषण किया। छह नमूनों के इस विश्लेषण में relapse के बाद के ट्यूमर में प्लुरिपोटेंट-लाइक कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं की मात्रा उपचार-पूर्व नमूनों की तुलना में अधिक पाई गई। साथ ही, उपचार-पूर्व CSC burden और relapse के बाद CSC enrichment के बीच संबंध का संकेत मिला।
यह परिणाम इस संभावना की ओर संकेत करता है कि उपचार के दौरान अत्यधिक प्लास्टिक यानी अधिक अनुकूलन क्षमता वाली कोशिकीय अवस्थाओं का चयन हो सकता है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी व्यक्ति में कैंसर दोबारा होने की भविष्यवाणी करने वाला क्लिनिकल परीक्षण नहीं माना जा सकता; इसके लिए आगे बड़े और दीर्घकालिक अध्ययनों की आवश्यकता होगी।
इम्यूनोथेरेपी के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण संकेत
शोधकर्ताओं ने कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं और ट्यूमर के immune microenvironment के बीच संबंध का भी अध्ययन किया। अध्ययन में प्लुरिपोटेंट-लाइक CSCs से जुड़े ऐसे transcriptional programs पाए गए, जो immunosuppression से संबंधित हैं।
विशेष रूप से, immune checkpoint blockade के non-responders में प्लुरिपोटेंट-लाइक CSCs की अधिकता देखी गई, जबकि responders में इनकी मात्रा अपेक्षाकृत कम थी। शोधकर्ताओं ने इसे immunotherapy response के संभावित biomarker के रूप में आगे जांचे जाने योग्य संकेत माना है।
कौन-से जैविक मार्ग सक्रिय मिले
ACSCeND के विश्लेषण ने अलग-अलग CSC अवस्थाओं से जुड़े विशिष्ट molecular programs की भी पहचान की। प्लुरिपोटेंट-लाइक CSCs में WNT/β-catenin signaling, hypoxia adaptation, glycolysis और DNA repair जैसे pathways की सक्रियता से जुड़े संकेत मिले। ये प्रक्रियाएं कैंसर कोशिकाओं के उपचार प्रतिरोध, metastatic क्षमता और immune evasion से पहले से जुड़ी हुई हैं।
शोधकर्ताओं ने WNT, Notch और FOXO4 signaling से जुड़े कुछ genes को CSC अवस्थाओं के बीच बदलाव को नियंत्रित करने वाले संभावित molecular regulators के रूप में भी चिन्हित किया है। ये अभी संभावित जैविक संकेत और शोध के लक्ष्य हैं, स्थापित दवा-लक्ष्य नहीं।
सटीक चिकित्सा के लिए क्या मायने
ACSCeND का सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह है कि यह सिंगल-सेल स्तर की जैविक जानकारी को बड़े पैमाने पर उपलब्ध बल्क RNA-seq datasets के साथ जोड़ने का तरीका प्रस्तुत करता है। इससे शोधकर्ता बड़ी संख्या में मरीजों के नमूनों में कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं की अलग-अलग अवस्थाओं का अनुमान लगा सकते हैं, भले ही हर नमूने के लिए सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग उपलब्ध न हो।
भविष्य में ऐसी प्रणालियां मरीजों के ट्यूमर में मौजूद विशिष्ट कोशिकीय अवस्थाओं, उपचार प्रतिरोध और संभावित relapse risk के बीच संबंधों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकती हैं। इससे stemness-informed cancer therapies और अधिक व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों के विकास के लिए आधार तैयार हो सकता है।
हालांकि, वर्तमान अध्ययन मुख्यतः कम्प्यूटेशनल और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटासेट के विश्लेषण पर आधारित है। इसलिए ACSCeND को अभी सामान्य मरीजों के लिए स्थापित क्लिनिकल डायग्नोस्टिक या उपचार-निर्णय प्रणाली के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। अध्ययन स्वयं भी बड़े longitudinal cohorts में आगे के शोध की आवश्यकता बताता है, विशेषकर उपचार के दौरान CSC persistence, relapse और therapy response के पूर्वानुमान को लेकर।
कैंसर अनुसंधान में एआई की बढ़ती भूमिका
यह अध्ययन दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग केवल कैंसर की पहचान तक सीमित नहीं है। विशाल जीनोमिक और transcriptomic datasets में छिपे कोशिकीय पैटर्न, molecular pathways और clinical associations को समझने में भी मशीन लर्निंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ACSCeND के माध्यम से शोधकर्ताओं ने कैंसर स्टेम-लाइक कोशिकाओं को एक समान समूह के रूप में देखने के बजाय उनकी विकासात्मक अवस्थाओं और जैविक व्यवहार में अंतर को समझने की कोशिश की है। सिंगल-सेल स्तर की सूक्ष्मता और बड़े पैमाने के बल्क डेटा की पहुंच को जोड़ने वाला यह दृष्टिकोण भविष्य के कैंसर अनुसंधान में उपयोगी साबित हो सकता है।
स्रोत: NAR Cancer, Oxford University Press, 2026 — “Cross-modal mapping of cancer stem-like cell plasticity using deep learning”, DOI: 10.1093/narcan/zcag015. अध्ययन 27 जुलाई 2026 को प्रकाशित हुआ।