चलो उठाएं आज कलम हम
उन वीरों के वंदन में,
जो सो जाते हैं अमर नींद
भारत मां के अभिनंदन में।
सैनिक की संगीन जहां
रिपु दल का मर्दन करती है,
इस कलम की पैनी धार वहां
जन जन में पौरुष भरती है।
यदि सैनिक रक्षक सीमा के,
ये कलम चेतना की है मशाल,
दोनों मिलकर ही गढ़ते हैं
इस गौरवमयी धरा का भाल।
सैनिक सीमा पर हिम शिखरों
पर रचते गाथा बलिदान की,
ये कलम बोलती है जय जय
उनके ही शौर्य महान की।
सैनिक की वीरता और कलम
का पावन संगम अमर रहे,
दोनों ही हैं राष्ट्र के रक्षक
क्रांति, सृजन की धार बहे !!!
