21 सितंबर – अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस
युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। इतिहास इस बात का साक्षी है कि हिंसा और संघर्ष ने मानव सभ्यता को जितनी पीड़ा दी है, उतनी किसी प्राकृतिक आपदा ने भी नहीं दी। इसके विपरीत शांति ने समाजों को विकास, समृद्धि और मानवीय मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ाया है। इसी संदेश को विश्वव्यापी स्वर देने के लिए प्रतिवर्ष 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है।
शांति केवल युद्ध का अभाव नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण है जिसमें न्याय, समानता, सहिष्णुता, संवाद, करुणा और मानवाधिकारों का सम्मान हो। जब समाज में परस्पर विश्वास, सहयोग और सद्भाव का वातावरण होता है, तभी वास्तविक शांति स्थापित होती है। इसलिए शांति का संबंध केवल देशों के बीच नहीं, बल्कि परिवार, समाज और व्यक्ति के जीवन से भी जुड़ा हुआ है।
आज विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। युद्ध, आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, जातीय संघर्ष, आर्थिक असमानता, जलवायु परिवर्तन, साइबर अपराध और सामाजिक तनाव जैसी समस्याएँ वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। इन परिस्थितियों में संवाद, सहयोग और कूटनीति की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत की सांस्कृतिक परंपरा सदैव शांति और सह-अस्तित्व की रही है। “वसुधैव कुटुम्बकम्”, “अहिंसा परमो
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