नई दिल्ली: वर्ष 1966 से देश में रोकी जा सकने वाली ब्लाइंडनेस को खत्म करने और दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने के लिए काम कर रही संस्था साइटसेवर्स इंडिया ने ‘लूम्स एंड लेंस’ नाम से एक नई राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों के लिए आंखों की देखभाल संबंधी सुविधाओं को आसान बनाना है।
‘लूम्स एंड लेंस’ पहल के माध्यम से साइटसेवर्स इंडिया का उद्देश्य बुनकरों और कारीगरों के रहने और काम करने की जगहों के समीप ही आंखों की जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराना है। साथ ही, यह पहल इन समुदायों के हुनर, उनकी कहानियों और उनके सपनों को भी सम्मान देती है। इस पहल के तहत वर्ष 2030 तक 10 लाख बुनकरों, बुनाई से जुड़े श्रमिकों और कारीगरों तक पहुंचने तथा जरूरतमंद लोगों को 4 लाख चश्मे उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इस पहल की शुरुआत नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान साइटसेवर्स इंडिया के आनरेरी ब्रांड एंबेसडर कबीर बेदी ने की।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और साइटसेवर्स इंडिया के आनरेरी ब्रांड एंबेसडर कबीर बेदी शामिल हुए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय में हथकरघा विभाग की अतिरिक्त विकास आयुक्त स्वयंप्रवा पाणि, ओडिशा सरकार के हथकरघा, कपड़ा एवं हस्तशिल्प विभाग की आयुक्त-सह-सचिव पूनम गुहा, मिसेज यूनिवर्स 2025 शेरी सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एनपीसीबी एंड वीआई की उप महानिदेशक डॉ. जी. कौसल्या, वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के साउथ-ईस्ट एशिया रीजनल ऑफिस के रीजनल एडवाइजर डॉ. ताशी तोबगे, आरसीएसबी यूके की सीईओ डॉ. कैरोलिन हार्पर, सीबीई, सीईओ, आरसीएसबी यूके और साइटसेवर्स इंडिया की अध्यक्ष रति फोर्ब्स भी उपस्थित रहीं।
विश्व दृष्टि दिवस (वर्ल्ड साइट डे) से पहले इस पहल की शुरुआत की गई है। यह दिवस हर साल दुनियाभर में आंखों की सेहत के महत्व और सभी लोगों तक बेहतर नेत्र देखभाल की सुविधाएं पहुंचाने की जरूरत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष भी आंखों की सेहत को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, खासकर उन समुदायों के लिए जिनकी आजीविका आँखों की अच्छी सेहत पर निर्भर करती है। ‘लूम्स एंड लेंस’ पहल के जरिए साइटसेवर्स इंडिया बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों तक यह संदेश पहुंचाना चाहता है कि जब उनकी आंखें स्पष्ट रूप से देख पाती हैं तो यह उनके काम की गुणवत्ता, रोजगार, आत्मनिर्भरता और पारंपरिक हस्तकलाओं को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस अवसर पर साइटसेवर्स इंडिया के आनरेरी ब्रांड एंबेसडर कबीर बेदी ने कहा, “साइटसेवर्स इंडिया का आनरेरी ब्रांड एंबेसडर बनाया जाना मेरे लिए बेहद खास सम्मान है। क्योंकि आंखों की रोशनी लौटाना केवल किसी बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि लोगों का जीवन, सम्मान और आजीविका बहाल करने का काम है। ‘लूम्स एंड लेंस’ पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत के उन बुनकरों की मदद करती है, जिनका हुनर बारीकी, अच्छी नजर और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं पर निर्भर करता है। उनकी आंखों की रोशनी सुरक्षित रखने में मदद करके हम न केवल उनके जीवन को बेहतर बना रहे हैं, बल्कि भारत की अमूल्य कलात्मक विरासत को संरक्षित करने में भी योगदान दे रहे हैं।”
साइटसेवर्स इंडिया के सीईओ आर.एन. मोहंती ने कहा, “‘लूम्स एंड लेंस’ कार्यक्रम की शुरुआत ओडिशा से की जाएगी। इसके लिए ओडिशा सरकार के हथकरघा, कपड़ा एवं हस्तशिल्प विभाग के साथ साइटसेवर्स इंडिया की साझेदारी का लाभ लिया जाएगा। इसके बाद इस कार्यक्रम का विस्तार अन्य राज्यों में भी किया जाएगा। बुनकर समुदायों के करीब ही आंखों की जांच, चश्मे और जरूरत पड़ने पर आगे के इलाज के लिए रेफरल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आंखों से जुड़ी उन समस्याओं को दूर करना है, जो बुनकरों के काम करने की क्षमता, आय और आत्मनिर्भरता को प्रभावित कर सकती हैं।”
कपड़ा मंत्रालय की एडीसी-हैंडलूम्स और कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि स्वयंप्रवा पाणि ने कहा, “भारत का हथकरघा क्षेत्र 35 लाख बुनकरों को आजीविका प्रदान करता है, जिनमें 72 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस क्षेत्र की प्रगति और निरंतर विकास के लिए बुनकरों के कल्याण को मजबूत करना बेहद जरूरी है। मैं बुनकर समुदायों की कार्यक्षमता बढ़ाने, उनकी आजीविका सुरक्षित करने और उनके स्वास्थ्य व खुशहाली को सुनिश्चित करने में आंखों की सेहत के महत्व को पहचानने के लिए साइटसेवर्स इंडिया की सराहना करती हूं।”
ओडिशा सरकार में आयुक्त-सह-सचिव, हथकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प विभाग सुश्री पूनम गुहा ने कहा, “आंखों की देखभाल भी मानव कल्याण के लिए उतनी ही बुनियादी जरूरत है, जितनी अन्य आवश्यक सुविधाएं। साइटसेवर्स इंडिया के साथ हमारी साझेदारी से कटक और बरगढ़ में नेत्र जांच शिविरों के माध्यम से बुनकरों और कारीगरों तक सीधे यह सुविधा पहुंचाने में मदद मिली है। इन शिविरों के जरिए लगभग 1,000 लोगों तक पहुंच बनाई गई। लोगों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए अब हम पूरे बुनकर समुदाय को इस सुविधा के दायरे में लाने के लिए एक व्यवस्थित योजना तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।”
मिसेज यूनिवर्स 2025 शैरी सिंह ने कहा, “कारीगरों की आंखों की रोशनी और उनकी आजीविका को सुरक्षित करके हम केवल एक कला को बचाने का काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत के एक हिस्से को भी संरक्षित कर रहे हैं। एक महिला होने के नाते मैंने अपनी मां को इस कला को सहेजते हुए देखा है। मेरा मानना है कि इन परंपराओं को लुप्त होने से बचाना हमारी जिम्मेदारी है। यह जानकर मुझे बेहद खुशी होती है कि साइटसेवर्स इंडिया जैसी संस्थाएं इस खूबसूरत कला से जुड़े लोगों और उनकी परंपराओं, दोनों को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रही हैं।”
कार्यक्रम के दौरान कबीर बेदी ने ‘लूम्स एंड लेंस’ पहल की नई विज़ुअल आइडेंटिटी का भी अनावरण किया। इसके बाद उनकी विशेष फिल्म दिखाई गई, जिसमें आंखों की सेहत, आजीविका और भारत की बुनकरी विरासत के बीच के संबंध को दर्शाया गया। इस अवसर पर साइटसेवर्स इंडिया की रिपोर्ट ‘बियॉन्ड द थ्रेड’ का भी विमोचन किया गया।
भारत में लाखों बुनकरों के लिए अच्छी नजर आजीविका कमाने और पीढ़ियों से चली आ रही कला को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है। लूम्स एंड लेंस पहल के माध्यम से साइटसेवर्स इंडिया यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आंखों की रोकी जा सकने वाली समस्याओं के कारण बुनकरों को अपनी आजीविका न गंवानी पड़े और न ही उन्हें अपना पारंपरिक हुनर छोड़ना पड़े। यह पहल एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण संदेश देती है कि बुनकरों की आंखों की रोशनी सुरक्षित रखने का अर्थ उनकी आजीविका के साथ-साथ भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत के भविष्य को भी सुरक्षित रखना है।
Muskan Singh