आइजोल: केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास एवं शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने पूर्वोत्तर राज्यों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने, ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बैंकों तथा राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की आर्थिक क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए जरूरी है कि स्थानीय बचत को निवेश में बदला जाए और किसानों, छोटे कारोबारियों, महिला उद्यमियों तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े व्यवसायों तक संस्थागत ऋण की पहुंच बढ़ाई जाए।

डॉ. मजूमदार ने 13 अक्टूबर को मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल में आयोजित तृतीय उत्तर पूर्व बैंकर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने बैंकिंग ढांचे को मजबूत बनाने और वित्तीय समावेशन के अधूरे लक्ष्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए बैंकों, राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार में प्रगति, हजारों गांव अब भी वंचित
डॉ. मजूमदार ने वित्तीय समावेशन के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि क्षेत्र में 131 नई बैंक शाखाएं खोली गई हैं और 126 एटीएम स्थापित किए गए हैं। चिह्नित 9,479 गांवों में से 6,905 गांवों को बैंक शाखाओं या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा जा चुका है। यह कुल चिह्नित गांवों का लगभग 73 प्रतिशत है।
हालांकि, उन्होंने शेष गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की आवश्यकता पर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, 2,574 गांवों को अभी बैंकिंग नेटवर्क से जोड़ना बाकी है। इनमें से 2,515 गांवों को इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और 59 गांवों को भौतिक बैंक शाखाओं के माध्यम से कवर किया जाना है।
उन्होंने राज्य सरकारों और बैंकों से इन गांवों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने, जिम्मेदारियां निर्धारित करने और तय समय-सीमा के भीतर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा।
ऋण-जमा अनुपात में असमानता दूर करने की जरूरत
सम्मेलन में पूर्वोत्तर राज्यों के ऋण-जमा अनुपात का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। डॉ. मजूमदार ने कहा कि असम और मणिपुर का ऋण-जमा अनुपात 79.5 प्रतिशत के राष्ट्रीय स्तर के बराबर या उससे अधिक है, जबकि मिजोरम सहित कई अन्य राज्यों में इस दिशा में सुधार की जरूरत है।
ऋण-जमा अनुपात से यह पता चलता है कि बैंकों में जमा धन की तुलना में ऋण के रूप में कितनी राशि वितरित की जा रही है। इस अनुपात में क्षेत्रीय अंतर को दूर करना स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
डॉ. मजूमदार ने बैंकों से पूर्वोत्तर में उपलब्ध बचत का अधिक प्रभावी उपयोग करने और व्यवहार्य व्यावसायिक परियोजनाओं को ऋण उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), महिला उद्यमिता और पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में वित्तीय सहायता बढ़ने से रोजगार और स्थानीय आजीविका के अवसर मजबूत हो सकते हैं।
ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए कई उपाय सुझाए
केंद्रीय राज्य मंत्री ने ऋण वितरण में सुधार के लिए बैंक-विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों के माध्यम से नियमित समीक्षा करने का सुझाव दिया। उन्होंने विश्वसनीय भूमि रिकॉर्ड तैयार करने, पात्र चालू एवं बचत खातों की आधार सीडिंग पूरी करने और पीएम स्वनिधि योजना में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
उन्होंने बैंकों से किसानों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों और पर्यटन व्यवसायों के ऋण प्रस्तावों की सक्रियता से जांच करने को कहा। उनके अनुसार, केवल बैंकिंग ढांचे का विस्तार पर्याप्त नहीं है; इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब जरूरतमंद लोगों और उद्यमों को समय पर सुलभ ऋण उपलब्ध हो।
दूरदराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाओं के सामने बुनियादी चुनौतियां
डॉ. मजूमदार ने बताया कि पूर्वोत्तर के कई इलाकों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार में उपयुक्त भवनों, बारहमासी सड़कों और विश्वसनीय दूरसंचार कनेक्टिविटी की कमी बाधा बन रही है। कुछ स्थानों पर वी-सैट या फाइबर कनेक्टिविटी की व्यवस्था भी आवश्यक है।
उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिवों से लंबित बैंकिंग केंद्रों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां तय करने और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। बैंकों से तैयार स्थानों पर शाखाएं जल्द शुरू करने तथा जहां पूर्ण बैंक शाखा खोलना व्यावहारिक नहीं है, वहां बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट और बीसी-सखियों के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराने को कहा।
बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, बीसी-सखियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर वित्तीय लेनदेन और अन्य बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाई जा सकती है।
छह सूत्री रोडमैप के क्रियान्वयन पर जोर
डॉ. मजूमदार ने दिसंबर 2024 में अगरतला में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आयोजित द्वितीय उत्तर पूर्व बैंकर्स कॉन्क्लेव में अपनाए गए छह सूत्री रोडमैप का भी उल्लेख किया। इस रोडमैप का उद्देश्य बैंक शाखाओं और एटीएम की संख्या बढ़ाना, बैंकिंग सुविधाओं से वंचित गांवों को जोड़ना, कम आबादी वाले जिलों में बैंकिंग सेवाओं में सुधार करना, क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप बैंकिंग मानदंडों को अनुकूल बनाना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में बैंक शाखाएं स्थापित करने के लिए जनसंख्या संबंधी मानदंड को समूह आधार पर घटाकर 2,000 किया गया है, जबकि राष्ट्रीय मानदंड 3,000 का है। इससे कम आबादी वाले और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
क्षेत्र में बैंकिंग संबंधी कमियों को दूर करने के उद्देश्य से पहला उत्तर पूर्व बैंकर्स कॉन्क्लेव अप्रैल 2023 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
कृषि, पर्यटन और एमएसएमई को वित्तीय सहायता पर चर्चा
सम्मेलन के दौरान आयोजित चार उप-सत्रों में बैंकिंग बुनियादी ढांचे, एमएसएमई एवं महिला उद्यमियों, कृषि वित्त और बुनियादी ढांचा वित्तपोषण पर चर्चा की गई। इन विषयों का सीधा संबंध पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश, रोजगार सृजन और स्थानीय उद्यमों की विकास क्षमता से है।
डॉ. मजूमदार ने कहा कि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ सुलभ और किफायती ऋण की व्यवस्था भी जरूरी है। इससे किसानों और छोटे व्यवसायों को अपनी गतिविधियों का विस्तार करने तथा नए आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार नीतिगत बाधाओं को दूर करने और बैंकिंग रोडमैप की प्रगति की निगरानी करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य सरकारों, बैंकों और केंद्रीय एजेंसियों से स्पष्ट जवाबदेही और निर्धारित समय-सीमा के साथ काम करने की अपील की। साथ ही, पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।