बिलासपुर: राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा के सामने वाहनों की लंबी कतारों और अनावश्यक इंतजार से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल प्लाजा से बैरियर हटाकर निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने की दिशा में तैयारी तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ में इस आधुनिक व्यवस्था का पहला प्रयोग बिलासपुर–पथरापाली टोल प्लाजा में प्रस्तावित है। यहां मार्च 2027 तक नई प्रणाली शुरू किए जाने की संभावना है।

बैरियर हटेंगे, बिना रुके कटेगा टोल
प्रस्तावित मल्टीलेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग सिस्टम लागू होने के बाद वाहनों को टोल चुकाने के लिए बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जीपीएस आधारित तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली की मदद से वाहनों की पहचान, तय की गई दूरी तथा टोल शुल्क का निर्धारण किया जाएगा। इससे टोल संग्रह की प्रक्रिया अधिक सहज और तेज होने की उम्मीद है। वर्तमान व्यवस्था में टोल प्लाजा पर बैरियर खुलने की प्रतीक्षा, भुगतान में लगने वाला समय और आगे निकलने की होड़ के कारण वाहनों की कतारें लग जाती हैं। कई बार पर्याप्त जगह नहीं मिलने से वाहन चालकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। नई प्रणाली इन समस्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रतिदिन 22 हजार वाहनों को मिल सकती है राहत
बिलासपुर–पथरापाली टोल प्लाजा से प्रतिदिन लगभग 22 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में यहां निर्बाध टोलिंग व्यवस्था लागू होने से बड़ी संख्या में वाहन चालकों को लाभ मिलने की संभावना है। खासकर मालवाहक वाहनों, यात्री बसों और लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों का समय बच सकता है। नई तकनीक से वाहनों की आवाजाही सुचारु होने, ईंधन की खपत में कमी आने और टोल प्लाजा के आसपास यातायात का दबाव घटने की भी उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक लाभ नई व्यवस्था के क्रियान्वयन, तकनीकी दक्षता और शुल्क संग्रह की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
देश के अन्य मार्गों पर भी शुरू हो चुकी है पहल
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल संग्रह को आधुनिक बनाने के लिए देश में बैरियर-मुक्त टोलिंग व्यवस्था की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली–मुंबई और दिल्ली–आगरा जैसे प्रमुख मार्गों पर भी इस तरह की व्यवस्था से जुड़ी पहल की गई है। अब छत्तीसगढ़ में बिलासपुर–पथरापाली टोल प्लाजा पर इसका प्रयोग प्रस्तावित है।
तकनीक से बदलेगा सफर का अनुभव
एमएलएफएफ प्रणाली लागू होने के बाद वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर बार-बार रुकने और अपनी बारी का इंतजार करने से राहत मिल सकती है। इससे सड़क पर यात्रा का समय अधिक अनुमानित होगा और टोल प्लाजा के आसपास जाम की समस्या में कमी आ सकती है।हालांकि, नई व्यवस्था के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि वाहन चालकों को शुल्क कटौती की स्पष्ट जानकारी मिले, गलत कटौती की शिकायतों का त्वरित निराकरण हो तथा तकनीकी समस्या आने पर प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध रहे।
टोल प्लाजा को बैरियर मुक्त करने की चल रही तैयारी
टोल प्लाजा को बेरियर मुक्त करने की तैयारी चल रही है। जिले में इसकी शुरूआत बिलासपुर-पथरापाली टोल से की जाएगी। मार्च 2027 तक इसके प्रारंभ हो जाने की संभावना है।
-मुकेश कुमार परगनिहा, परियोजना निदेशक एनएचएआई पीआईयू, बिलासपुर
मार्च 2027 पर टिकी निगाहें
बिलासपुर–पथरापाली टोल प्लाजा में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी चल रही है। मार्च 2027 तक इसकी शुरुआत किए जाने की संभावना जताई गई है। यदि निर्धारित समयसीमा में योजना जमीन पर उतरती है, तो छत्तीसगढ़ में टोलिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बैरियर-मुक्त टोलिंग व्यवस्था निर्धारित समय पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और वाहन चालकों को जाम तथा इंतजार से वास्तविक राहत कब तक मिलती है।

वरिष्ठ पत्रकार / साहित्यकार / अधिवक्ता, एवीके न्यूज सर्विस