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बदलता ही नहीं

दो साल से, खरीदकर रखा हूं, पांच रुपए वाला नमकीन का एक पैकेट।...

पश्चाताप – दुर्गेश्वर राय

पेड़ की वो मोटी जड़, निर्निमेष निहारती रहती है फलों को,...

साहित्यिक संस्था हिन्दी की गूँज ने “सावन की फुहार” कार्यक्रम का आयोजन आभासी पटल पर किया

दिल्ली, देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिन्दी की गूँज ने बीते रविवार की शाम को "…

वोट खातिर जोत देले बा खेत खलिहान

वोट खातिर जोत देले बा खेत खलिहान। अपना देश के नेता लोग महान। गांवे-गांवे घुमत बा…

फ़ाग

कान्हा खेलो तुम डटके फाग कि  रंग दो मेरी चुनरिया मैं न रोकूंगी तुमको आज

भारत के वीर जवान

खड़े हैं सीमा पर सीना ताने, झेलकर कितनी तकलीफ़ें दुनिया क्या जाने, चाहे आये आँधी या आये तूफान, डटकर…

शिव नहीं कहते

शिव नहीं कहते कि, मैं ॐ, मैं सर्वस्व, मैं त्रिलोचन, मैं आदिशक्ति, मैं जगत विश्राम, हैं…

गणतंत्र दिवस 

विधान-संविधान के हृदय में  सजा लो, कर्तव्य को अधिकार सा थोड़ा तो निभा लो​,जो हो रहे…

अवध में राम पधारे ….

अवध में राम पधारे ….सजी अयोध्या नगरी सारी, बज रहे ढोल-नगाड़े, हो रही जय-जयकार, अवध में…

पल रही है ज़िंदगी….

सोच हर दिन की नई ले पल रही है जिंदगी, बस कभी हँस कर कभी रो…

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