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प्रेम दीप्ति

मधुर मुक्त आभा है सुरभित पवन, प्रेम ही प्रेम का हो रहा है सृजन। हैं नहला…

मौसम ने बदला रंग

वर्षा ऋतु की मनोहारी छटा, प्रकृति का नव श्रृंगार, हरियाली, उमंग और कर्म का संदेश समेटती…

रूठे मेघ तरसती आंखे

रूठ गए हैं सावन के बादल, सूना-सूना सारा आकाश। पलकों पर आशाएँ ठहरीं, टूट न जाए…

तारों के बीच बैठा मैं

रात चांदनी की चादर ओढ़े है, तारे अपनी शाश्वत भाषा में टिमटिमा रहे हैं, और मैं…

रूठती मैं पहले भी थी, अब भी रूठती हूँ पर…

पहले रूठती थी तो पापा जी झट से मुझे गुदगुदी करते, गोदी में झूला झुलाते, या…

मैं जल हूं

मैं जल हूं, सृष्टि का प्रथम स्पंदन,

योग : जीवन का महामंत्र

सुबह सबेरे तन और मन को  जो दे नवजीवन का वरदान। श्वासों की गति को समझाए…

नौतपा की तपिश

आया ज्येष्ठ मास ये भीषण, तपने लगा धरा का प्रांगण। रोहिणी नक्षत्र में तेज सूर्य का,…

आइसक्रीम कविता : गर्मी, स्वाद और बचपन की मिठास का सुंदर एहसास

गर्मी में ठंडक और मिठास का अहसास देती आइसक्रीम पर आधारित खूबसूरत कविता। बच्चों से बड़ों…

वट सावित्री व्रत

ज्येष्ठ मास की कृष्ण अमावस वट सावित्री का त्योहार  अमर सुहाग की मंगल कामना  का भू…

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