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गणतंत्र दिवस 

विधान-संविधान के हृदय में  सजा लो,
कर्तव्य को अधिकार सा थोड़ा तो निभा लो​,
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जो हो रहे परे सभी दिलों से आजकल रिश्ते,
निभा दायित्व कुछ क़र्ज़ वीरों का चुका लो ।
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बेआबरू कर लाज को लांघते हो सब हदें,
माँ के दूध की सड़कों पे यूँ अर्थी न निकालो ।
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करते कांड खुले आम औ फिर जेल हो जाते,
अरे! थोड़ा खुद के भीतर बैठे ईमा को जगा लो ।
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 ये देश तुम्हारा है औ गणतंत्र तुम्हीं से है,
छोड़ो लड़ना एक होके सब इसको संभालो ।।

भावना 'मिलन'
भावना अरोड़ा ‘मिलन’
कवयित्री,एडुकेशनिस्ट,
मोटिवेशनल स्पीकर
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