धरती धीरज है धरे, धरती कानन भार। पर्वत घाटी सिंधु का, धरती है आधार।।
Category: कविता
बच्चे निर्मल मन सदा
बच्चे निर्मल मन सदा, बच्चे भगवत रूप। बच्चे सुख की छाँव हैं, मधुर मुलायम धूप।। माखन…
बच्चे निर्मल मन सदा, बच्चे भगवत रूप। बच्चे सुख की छाँव हैं, मधुर मुलायम धूप।। माखन…