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धरा करे सत्कार

धरती धीरज है धरे, धरती कानन भार। पर्वत घाटी सिंधु का, धरती है आधार।।

वक्त

यूं बदलना वक्त का जिंदगी के दरमियां बचपने के नन्हे पांव का झुर्रियों तक पहुंचना है…

बच्चे श्वेत कपास

कपट नहीं है हृदय में, नहीं किसी से बैर। बच्चे समता साधते, क्या अपने क्या गैर।।

बच्चे निर्मल मन सदा

बच्चे निर्मल मन सदा, बच्चे भगवत रूप। बच्चे सुख की छाँव हैं, मधुर मुलायम धूप।। माखन…

ऐ कवि सबकी कहते रहना।

ऐ कवि सबकी कहते रहना। नदियों की कलकल के संग बहते रहना। ऐ कवि सबकी कहते…

बच्चे कल हैं विश्व का

परिजन से नित सीखते, भाषा का व्यवहार। बच्चे रचने हैं लगे, शब्दों का संसार।।

मलय पवन सुख बाँटता

हृदय विमल रसधार में, घुलते रंग अनेक। जिनके उर कालिख जमी, चढ़े रंग नहि एक।

नारी है अपराजिता

नारी जीवन झूले की तरह इस पार कभी उस पार कभी दिए की तरह से जलती…

पता ही नहीं चला

*कैसे कटा 21 से 60*  *तक का यह सफ़र,*  *पता ही नहीं चला ।*

’’मनभावन शब्द’’

शब्द से नहीं बड़ा हथियार तीखे शब्द न बोल होती बहुत चुभन। मीठे शब्द रस घोल…

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