वैश्विक अर्थव्यवस्था में रचनात्मक उद्योगों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। फिल्म, डिजिटल मीडिया, एनीमेशन, गेमिंग, संगीत, ओटीटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सांस्कृतिक उद्यम अब केवल मनोरंजन के क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कूटनीति के प्रभावशाली माध्यम बन चुके हैं। ऐसे समय में भारत ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था को वैश्विक सहयोग का नया आधार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘ब्रिक्स वेव्स बाज़ार 2026’ का शुभारंभ मुंबई में किया है।
दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में ब्रिक्स सदस्य देशों और भागीदार देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि रचनात्मक उद्योगों के माध्यम से देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग, ज्ञान साझाकरण, संयुक्त परियोजनाओं और सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करना भी है।

रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मिला वैश्विक मंच
ब्रिक्स वेव्स बाज़ार को दृश्य-श्रव्य और रचनात्मक उद्योगों के लिए एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मार्केटप्लेस के रूप में विकसित किया गया है, जहां विचार, निवेश, नवाचार और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति एक साथ आगे बढ़ सकें। इस मंच पर सरकारी प्रतिनिधियों के साथ-साथ फिल्म निर्माता, कंटेंट क्रिएटर, निवेशक, प्रसारण संस्थान, ओटीटी प्लेटफॉर्म, तकनीकी कंपनियां, स्टार्टअप, सांस्कृतिक संगठन और रचनात्मक उद्यम एक ही छत के नीचे संवाद स्थापित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में रचनात्मक उद्योग केवल सांस्कृतिक पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक प्रतिस्पर्धा का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच इस प्रकार का संस्थागत सहयोग भविष्य में वैश्विक मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग के नए समीकरण स्थापित कर सकता है।
मुंबई : भारत की रचनात्मक राजधानी से वैश्विक संदेश
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं संस्कृति मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मुंबई को भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का स्वाभाविक केंद्र बताया।
उन्होंने कहा कि तकनीक और कला के बीच की पारंपरिक सीमाएं अब तेजी से समाप्त हो रही हैं। नई डिजिटल तकनीकों ने रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए माध्यम विकसित किए हैं, जहां कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ और उद्यमी मिलकर नई संभावनाएं निर्मित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स वेव्स बाज़ार केवल एक प्रदर्शनी या व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह ऐसा सुविचारित वैश्विक मंच है जिसे आने वाले वर्षों की रचनात्मक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती सांस्कृतिक एवं बौद्धिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पुनः विश्व के सांस्कृतिक मार्गदर्शक के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वह क्षेत्र है जहां भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक रचनात्मकता और वैश्विक व्यापार एक साथ मिलकर नए आर्थिक अवसरों का निर्माण कर रहे हैं।
संस्कृति केवल विरासत नहीं, वैश्विक साझेदारी का माध्यम
सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री चंचल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार इस बात पर बल देते रहे हैं कि संस्कृति विभिन्न देशों और समाजों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। भारत की ब्रिक्स सहयोग प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी भी इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि मुंबई में आयोजित ब्रिक्स वेव्स बाज़ार और नवंबर 2026 में आयोजित होने वाला ब्रिक्स फिल्म महोत्सव (IFFI के साथ) एक-दूसरे के पूरक मंच होंगे। जहां वेव्स बाज़ार व्यापार, निवेश और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देगा, वहीं ब्रिक्स फिल्म महोत्सव फिल्मों, फिल्मकारों और दर्शकों के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास उत्कृष्ट कहानियां, विशाल दर्शक वर्ग, तकनीकी क्षमता, रचनात्मक प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजार मौजूद हैं। आवश्यकता केवल इन संसाधनों को संगठित रूप से जोड़ने की है।
सह-निर्माण और नए बाज़ारों पर रहेगा विशेष फोकस
श्री चंचल कुमार ने स्पष्ट किया कि वेव्स बाज़ार को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यहां केवल विचार-विमर्श न हो, बल्कि वास्तविक परियोजनाओं का विकास, सह-निर्माण (Co-production), निवेश और नए बाज़ारों तक पहुंच की संभावनाएं भी साकार हो सकें।
उन्होंने कहा कि यह मंच ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ 21 भागीदार देशों को साझा उद्देश्य के साथ जोड़ रहा है। इसका प्रमुख लक्ष्य फिल्म, टेलीविजन, एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, संगीत, डिजिटल मीडिया और उभरते कंटेंट प्रारूपों में संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में वेव्स बाज़ार को ऐसा स्थायी वैश्विक मंच बनाया जाएगा जहां ब्रिक्स देशों के रचनात्मक उद्यम नियमित रूप से मिल सकें, संयुक्त निवेश कर सकें और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी परियोजनाएं विकसित कर सकें।
ब्रिक्स देशों की सामग्री को मिलेगा व्यापक दर्शक वर्ग
सूचना एवं प्रसारण सचिव ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों की फिल्मों, धारावाहिकों, संगीत, एनीमेशन और डिजिटल सामग्री का एक-दूसरे के बाज़ारों में प्रसार अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
उन्होंने कहा कि यदि सदस्य देश आपसी वितरण नेटवर्क, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करें तो करोड़ों नए दर्शकों तक स्थानीय कंटेंट पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा बल्कि रचनात्मक उद्योगों के लिए नए आर्थिक अवसर भी उत्पन्न होंगे।
उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभव और संस्थागत क्षमताओं को साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक सहयोग के लिए ब्रिक्स साझेदार देशों के साथ मिलकर कार्य करेगा।
भारत के नए रचनात्मक संस्थान निभाएंगे अहम भूमिका
श्री चंचल कुमार ने कहा कि भारत वेव्स, वेव्स बाज़ार, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज तथा इंडिया सिने हब जैसे संस्थागत प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जिनका उद्देश्य भारतीय प्रतिभाओं को वैश्विक उद्योग से जोड़ना है।
इन पहलों के माध्यम से संयुक्त परियोजनाओं, नई तकनीकों, स्टार्टअप इकोसिस्टम, कौशल विकास, डिजिटल नवाचार तथा वैश्विक बाजारों तक पहुंच को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने सभी सदस्य एवं भागीदार देशों को 2027 में मुंबई में आयोजित होने वाले वेव्स के अगले संस्करण में भी सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।
सिनेमा दुनिया को जोड़ने वाली सार्वभौमिक भाषा
प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के निदेशक आशुतोष गोवारिकर ने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं बल्कि संस्कृतियों को समझने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है।
उन्होंने कहा कि अनेक बार लोग किसी देश में जाने से पहले उसकी फिल्मों, कहानियों और संस्कृति के माध्यम से उस देश को जानने लगते हैं। यही कारण है कि भावनाएं, संघर्ष और मानवीय अनुभव विश्वभर में समान रूप से लोगों को जोड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स वेव्स बाज़ार जैसे मंच पटकथा लेखकों, फिल्म निर्माताओं, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक-दूसरे से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण को नई गति मिल सकती है।
रचनात्मक उद्योग : वैश्विक अर्थव्यवस्था का उभरता इंजन
विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव राजीव बोडवाडे ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” है और ब्रिक्स वेव्स बाज़ार इसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रचनात्मक अर्थव्यवस्था वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 3.1 प्रतिशत योगदान देती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सेवा निर्यात में इसका योगदान 1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
उनके अनुसार ब्रिक्स देशों की विशाल जनसंख्या, तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजार और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत उन्हें इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता रखते हैं।
उद्योग, निवेश और नीति पर केंद्रित रहेगा संवाद
नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदुम ने बताया कि दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में उच्चस्तरीय सम्मेलन, मुख्य भाषण, विषयगत पैनल चर्चा, व्यावसायिक नेटवर्किंग सत्र और चुनिंदा बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें आयोजित की जाएंगी।
इन चर्चाओं में अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण, कंटेंट वित्तपोषण, डिजिटल परिवर्तन, बौद्धिक संपदा अधिकार, महिला उद्यमिता, उभरती प्रौद्योगिकियां, सार्वजनिक नीति और विकासशील देशों के बीच सहयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा
समापन धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने कहा कि ब्रिक्स वेव्स बाज़ार भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है जिसके अंतर्गत रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नवाचार, उद्यमिता, रोजगार और आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, निवेशकों और रचनात्मक प्रतिभाओं को एक साझा मंच पर लाकर भारत न केवल व्यापारिक अवसरों का विस्तार करना चाहता है, बल्कि सांस्कृतिक सहयोग को भी नई संस्थागत मजबूती देना चाहता है।
विश्लेषण : क्यों महत्वपूर्ण है ब्रिक्स वेव्स बाज़ार?
रचनात्मक उद्योगों का वैश्विक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एआई आधारित कंटेंट निर्माण, डिजिटल स्ट्रीमिंग, वर्चुअल प्रोडक्शन, गेमिंग और इंटरैक्टिव मीडिया ने मनोरंजन उद्योग को नई दिशा दी है। ऐसे समय में यदि ब्रिक्स देश अपनी तकनीकी क्षमता, सांस्कृतिक विविधता और विशाल उपभोक्ता बाजार को साझा रणनीति के साथ जोड़ने में सफल होते हैं, तो वे पश्चिमी मीडिया बाजारों पर निर्भरता कम करते हुए एक वैकल्पिक वैश्विक रचनात्मक इकोसिस्टम विकसित कर सकते हैं।
भारत के लिए यह पहल विशेष महत्व रखती है क्योंकि देश पहले से ही विश्व के सबसे बड़े फिल्म उद्योगों में शामिल है, डिजिटल कंटेंट निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और स्टार्टअप आधारित रचनात्मक अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। ऐसे में ब्रिक्स वेव्स बाज़ार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक रचनात्मक नेतृत्व को सुदृढ़ करने की दिशा में एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।