बच्चे की भाषा और अध्यापक : शिक्षकों के लिए जरूरी किताब

1985 में यूनिसेफ के सहयोग से प्रकाशित कृष्ण कुमार की पुस्तक 'बच्चे की भाषा और अध्यापक…

समाज के प्रति और विश्व संस्कृति के प्रति अक्सर लिखना मै अपने आप को सौभाग्यशाली समझती हूं – प्रो. पुष्पिता अवस्थी

अधिकांश संस्मरण सच्चे जीवन की महा‌गाथाओं के संक्षिप्त अंश भर हैं। ‘शब्द’ अदभुत रूप से संवेदनशील होते हैं…

इन कहानियों में किस्सागोई है तो इक्कीसवीं सदी की एक नई दुनिया भी! प्रकाश मनु

कहानियाँ बच्चों की पहली दोस्त हैं, जो उन्हें खूब आनंदित करती हैं। वे कहानियाँ पढ़ते हैं…

किसी दोस्त जैसी हैं बच्चों की ये प्यारी, सदाबहार कहानियाँ

कहानियाँ सही मायने में बच्चों की दोस्त हैं, जो उन्हें खूब आनंदित करती हैं। वे कहानियाँ…

बच्चों और बचपन को पूरी निश्छलता के साथ प्यार किए बिना आप बच्चों के लिए कुछ भी लिए नहीं सकते: प्रकाश मनु

बाल साहित्य का पर्याय कहे जाने वाले प्रकाश मनु जी की बच्चों के लिए विभिन्न विधाओं…

चटके हुए गिलास हम

पिछले कई वर्षाे से हिंदी कविता के क्षेत्र में अनेक छंद एक काव्य-विधा के रूप में…

जीने के लिये: जीने की सार्थक जमीन आप ढूढ़ लेंगे

र युग में लेखक समाज को आइना दिखाने का कार्य करता है ऐसे ही लेखक थे…

तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे—– भारतरत्न लता मंगेशकर

गीत-संगीत की स्कर लहरियां मानव-मन ही हृतंत्री का झंकृत कर उसके समाजिक जीवन को सार्थक बनाती…

अमरकृति और बतासा: मनुष्य में परम्परागत रूप से पायी जाने वाली विसंगतियों, विडम्बनाओं एवं विकृतियों पर कटाक्ष

प्रायः कहा जाता है, ‘व्यंग्य’ समय-सापेक्ष होता है। आज जो रचना ‘जबर्दस्त कटाक्ष’ मानी जाएगी, कल…

एक सुखद अनुभव लेकर आती  है : देसी मैनेजर

हिंदी में साहित्य तो नियमित लिखा जाता  है किंतु प्रबंधन और विज्ञान विषय पर अधिक प्रयास नहीं हुए हैं  जो प्रयास हुए भी हैं तो वे प्रसिद्ध अंग्रेज़ी पुस्तकों के भावार्थ ही रहे हैं ऐसे समय में लेखक राकेश कुमार की  ‘ देसी मैनेजर ‘  पुस्तक एक सुखद 

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