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सीखने की कोई उम्र नहीं होती, सीखने का क्रम हर व्यक्ति के पूरे जीवन भर चलता हैः चित्रा गर्ग

हिन्दी स्वयं शिक्षक से हिन्दी सीखें व सुधारें

उमेश कुमार सिंह

हिन्दी भाषा स्वयं में सपूंर्ण भाषा है। लोगों का यह कहना कि हिन्दी अत्यन्त कठिन भाषा है, सर्वथा अनुपयुक्त है। हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है तथा भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यूँ तो भारत में उत्तर प्रदेश में सबसे शुद्ध हिन्दी भाषा बोली जाती हैं। काशी, इलाहाबाद, अवध शुरू से ही हिन्दी भाषा का केन्द्र बिन्दु रहे हैं। जिस प्रकार तैरना सीखना है तो पानी में रहना पड़ेगा, वैसे ही किसी भी भाषा में प्रवीणता पाने के लिए उस भाषा में अधिकतम व्यवहार और जुड़ाव स्थापित करना होगा, फिर वह आपका अभिन्न अंग हो जाएगी और आपका उस पर अधिकार हो जाएगा। इसमें वक्त लगेगा, और यह आपकी तल्लीनता, जुड़ाव और अभ्यास पर निर्भर करेगा, कि आप कब और कितना अधिकार उस भाषा पर बना पाएंगे।

डायमण्ड बुक्स द्वारा प्रकाशित बुक ‘हिन्दी स्वयं शिक्षक’ जिसके लेखिका है चित्रा गर्ग। ‘हिन्दी स्वयं शिक्षक’ उन सभी पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई है जो हिन्दी में थोड़ी बहुत बात कर सकते हैं, थोड़ी हिन्दी समझते भी हैं, हिन्दी भाषा की फिल्मों का वे भरपूर आनन्द भी लेते हैं, लेकिन हिन्दी लिखने-पढ़ने में उन्हें कठिनाई होती है। वे अपनी हिन्दी में सुधार करना चाहते है। वे सही तरह हिन्दी सीखना व समझना चाहते है। ऐसे हिन्दी भाषियों को सही हिन्दी को सिखाने वाला कोई भी शिक्षक उपलब्ध नहीं होता।

चित्रा गर्ग के अनुसार हिंदी सुनकर हमारे मन में यह प्रश्न खड़ा होता है कि हिंदी बोलना कैसे सीखें। क्या आपने एक बात पर गौर किया है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मातृभाषा को सीखने नहीं जाता? मातृभाषा सीखने के लिए कोई किसी प्रकार का कोर्स नहीं करता। हमने हमारी हिन्दी भाषा को इंटरनेट पर नहीं सीखा है। हम हमारी मातृभाषा सीखने के लिए ना ही स्कूल गए, ना ही इंटरनेट पर सीखी, ना ही हमने कोई कोर्स किया। सामान्य रूप से हम बिना सीखे ही उसे समझने लगते है, बोलने लगते हैं। इस पुस्तक द्वारा सभी उम्र के पाठकों को हिन्दी सीखना आसान होगा। यूँ तो सीखने की कोई उम्र नहीं होती, सीखने का क्रम हर व्यक्ति के पूरे जीवन भर चलता है। अतः हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी उम्र का हो, महिला हो या पुरुष, इस पुस्तक द्वारा अच्छी हिन्दी सीख सकते हैं और अपने हिन्दी ज्ञान में सुधार कर सकते हैं।

भारत में अनेक भाषाएं प्रचलित है। अलग-अलग क्षेत्रें में स्थानीय भाषाएं बोली जाती हैं। हिन्दी सर्वाधिक बोली जाने वाली और स्वीकार्य भाषा है। अनेक व्यक्ति बड़े-बड़े पदों पर आसीन होते हैं लेकिन हिन्दी लिखने व पढ़ने में अक्सर गलतियां करते है। वे अपनी इस समस्या का जिक्र किसी से करना नहीं चाहते और सही हिन्दी आसानी से सीखना चाहते हैं।

अनेक लोग इस बात से अनभिज्ञ होते है कि वे गलत लिख या बोल रहे हैं, जबकि अनेक लोग अपनी गलती जानते हुए भी हिन्दी भाषा पर अपनी पकड़ मजबूत नहीं बना पाते। जो भारतीय विदेशों में बसे हुए हैं वे व उनके बच्चे वहाँ के माहौल के अनुरूप सामान्य रूप से अंग्रेजी में बात करते है, इस कारण वे चाहते हुए भी अपने बच्चों को हिन्दी भाषा का सही ज्ञान नहीं दे पाते। ऐसे सभी लोगों के लिए हिन्दी स्वयं शिक्षक महत्वपूर्ण पुस्तक है। ‘हिन्दी स्वयं शिक्षक’ जैसा कि नाम से स्पष्ट हैं, आपको स्वयं हिन्दी सीखने में मदद करती है। इस पुस्तक द्वारा आप हिन्दी ज्ञान में सुधार ला सकते हैं। इसमें आसान भाषा में हर बात को भली भांति समझाया गया हैं।

लेखिका परिचय 

चित्रा गर्ग
चित्रा गर्ग

देश के भूतपूर्व  राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के हाथों ‘राजभाषा गौरव पुरस्कार’ प्राप्त करने वाली चित्रा गर्ग अब तक सौ से अधिक पुस्तकें लिख चुकी हैं। 1974 से लेखन से जुड़ी चित्रा गर्ग ने बरेली कॉलेज, बरेली से एम- ए-, बी- एड- किया। उन्होंने अनेक विधाओं में लेखन किया है, जैसे उपन्यास, बाल कहानियाँ, जीवनी, मार्शल आर्ट, भ्रमण, हस्तकला आदि। उत्कृष्ट लेखन के लिए वे हिंदी अकादमी के ‘बाल साहित्य सम्मान’ व प्रकाशन विभाग के ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार’ से सम्मानित हैं। उन्होंने बाल पत्रिका ‘बालमंच’ का संचालन व संपादन किया है। उनकी लिखी कहानियाँ व कविताएँ कई पाठ्य-पुस्तकों में संकलित हुई हैं। भ्रमण की शौकीन चित्रा गर्ग पूरे भारत का तथा विश्व के 50 से अधिक देशों का भ्रमण कर चुकी हैं। दूरदर्शन के लिए लेखन के अतिरिक्त उन्होंने कई कार्यक्रमों का निर्माण व निर्देशन भी किया है।  

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