NEW English Version

गुरु वंदन

ज्ञानामृत का पान हमें, प्रति दिवस कराते हैं गुरुवर। शिष्य बने कंगूरा, नींव शिला बन जाते…

तमसो मां ज्योतिर्गमय

अंतहीन रजनी के तिमिर में नन्हीं दीपशिखा है प्रज्ज्वलित। अभिलाषाओं की चिंगारी गहन अंधेरे  में भी…

प्रेम दीप्ति

मधुर मुक्त आभा है सुरभित पवन, प्रेम ही प्रेम का हो रहा है सृजन। हैं नहला…

मौसम ने बदला रंग

वर्षा ऋतु की मनोहारी छटा, प्रकृति का नव श्रृंगार, हरियाली, उमंग और कर्म का संदेश समेटती…

रूठे मेघ तरसती आंखे

रूठ गए हैं सावन के बादल, सूना-सूना सारा आकाश। पलकों पर आशाएँ ठहरीं, टूट न जाए…

तारों के बीच बैठा मैं

रात चांदनी की चादर ओढ़े है, तारे अपनी शाश्वत भाषा में टिमटिमा रहे हैं, और मैं…

रूठती मैं पहले भी थी, अब भी रूठती हूँ पर…

पहले रूठती थी तो पापा जी झट से मुझे गुदगुदी करते, गोदी में झूला झुलाते, या…

मैं जल हूं

मैं जल हूं, सृष्टि का प्रथम स्पंदन,

योग : जीवन का महामंत्र

सुबह सबेरे तन और मन को  जो दे नवजीवन का वरदान। श्वासों की गति को समझाए…

नौतपा की तपिश

आया ज्येष्ठ मास ये भीषण, तपने लगा धरा का प्रांगण। रोहिणी नक्षत्र में तेज सूर्य का,…

Translate »