जगजननी मां तुझे नमन है, भवतारिणी मां तुझे नमन। ब्रह्मस्वरूपिणी तुझे नमन है, भयहारिणी मां तुझे…
Category: कविता
जागें जीवन गढ़ने वाले
कंटक पथ पर बढ़ने वाले। अंधकार से लड़ने वाले। द्वार खड़ा है प्रमुदित सूरज, जागें जीवन…
सतत चलें हम
नदी सिखाती सतत चलें हम, निर्झर-सा हो निर्मल जीवन। सुमन सुगंध सदा बिखराते, करें सुवासित उपवन…
हे ग्रीष्म! तुम्हें प्रणाम
हे तप्त सूर्य की स्वामिनी ! तुम हो ऊर्जा का अनन्य उद्गम। अपनी प्रखर ज्योति से…
मातृभूमि वंदन
हे जन्मदायिनी धरिणी जननि, हे जन्मभूमि, मातृभूमि, हम तुझको शीश नवाएं, हम गीत तेरे ही गाएं।
तमसो मां ज्योतिर्गमय
अंतहीन रजनी के तिमिर में नन्हीं दीपशिखा है प्रज्ज्वलित। अभिलाषाओं की चिंगारी गहन अंधेरे में भी…