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दुर्गा स्तुति

जगजननी मां तुझे नमन है, भवतारिणी मां तुझे नमन। ब्रह्मस्वरूपिणी तुझे नमन है, भयहारिणी मां तुझे…

जागें जीवन गढ़ने वाले

कंटक पथ पर बढ़ने वाले। अंधकार से लड़ने वाले। द्वार खड़ा है प्रमुदित सूरज, जागें जीवन…

सतत चलें हम

नदी सिखाती सतत चलें हम, निर्झर-सा हो निर्मल जीवन। सुमन सुगंध सदा बिखराते, करें सुवासित उपवन…

प्रकृति और मानुष..

प्रकृति ने पंछी को पंख दिए, जल को लहर, गगन को विस्तार। सबने मर्यादा ओढ़ी अपनी,…

रक्षाबंधन

प्रीति की धरती, ममता का आकाश है रक्षाबंधन। भाई बहन के प्रेम से मिश्रित हास है…

हे ग्रीष्म! तुम्हें प्रणाम

हे तप्त सूर्य की स्वामिनी ! तुम हो ऊर्जा का अनन्य उद्गम। अपनी प्रखर ज्योति से…

वीरों का वंदन

चलो उठाएं आज कलम हम उन वीरों के वंदन में, जो सो जाते हैं अमर नींद…

मातृभूमि वंदन

हे जन्मदायिनी धरिणी जननि, हे जन्मभूमि, मातृभूमि, हम तुझको शीश नवाएं, हम गीत तेरे ही गाएं।

गुरु वंदन

ज्ञानामृत का पान हमें, प्रति दिवस कराते हैं गुरुवर। शिष्य बने कंगूरा, नींव शिला बन जाते…

तमसो मां ज्योतिर्गमय

अंतहीन रजनी के तिमिर में नन्हीं दीपशिखा है प्रज्ज्वलित। अभिलाषाओं की चिंगारी गहन अंधेरे  में भी…

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