
जीवन गढ़ना चाहती हूं।
अम्मा! पढ़ना चाहती हूं।।
पग-बंधन बेड़ी तोड़कर,
हरपल बढ़ना चाहती हूं।।
संकट बाधाओं से जूझ,
भूधर चढ़ना चाहती हूं।।
मधुर सुखद सुर संगीत से,
जीवन मढ़ना चाहती हूं।।
अनीति, कुभाव, रूढ़ियों से,
हंसकर लड़ना चाहती हूं।।


जीवन गढ़ना चाहती हूं।
अम्मा! पढ़ना चाहती हूं।।
पग-बंधन बेड़ी तोड़कर,
हरपल बढ़ना चाहती हूं।।
संकट बाधाओं से जूझ,
भूधर चढ़ना चाहती हूं।।
मधुर सुखद सुर संगीत से,
जीवन मढ़ना चाहती हूं।।
अनीति, कुभाव, रूढ़ियों से,
हंसकर लड़ना चाहती हूं।।
