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रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाएं भी मानसिक तनाव उत्पन्न करती

आज के तेजी से बदलते वैज्ञानिक युग में शायद हम अपनी जड़ों को कहीं भूलते जा रहे हैं। नई और आधुनिक जीवनशैली में डिप्र्रैशन, अवसाद, तनाव ने लोगों को परेशान कर दिया हैं। ग्रामीण संस्कृतियों के शहरीकरण और सामाजिक दबावों के कारण लोगों में विकार आने लगे हैं। नशीली दवाओं के सेवन व आत्महत्या की प्रवृतियां बढ़ रही हंै। हमारे देश में मानसिक रोगों के विस्तार व मनोदशा की स्थिति जानने के लिए हुए सर्वेक्षणों के अनुसार प्रति एक हजार व्यक्तियों में 25 से 40 व्यक्ति किसी न किसी गंभीर मानसिक रोग से पीडि़त हैं।

स्ट्रेस यानि मानसिक तनाव आज की दुनिया में कोई नई चीज नहीं मानी जाती। हर व्यक्ति प्रतिदिन किसी न किसी प्रकार के मानसिक तनावों का सामना करता है। आज के इस युग में भाग दौड़ की जिंदगी में मानसिक रोगियों की संख्या में लगातार वृद्घि होती जा रही हैं। मानसिक तनाव प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का एक अविभाज्य अंग बन चुका है। यह वृद्घि केवल हमारे देश में ही नहीं, अपितु विश्व के सभी देशों में हो रही हंै। आज की इस भागदौड़ की जीवनशैली में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से तनावग्रस्त रहता है। वैसे एक निश्चित सीमा तक मानसिक तनाव व्यक्ति के लिए लाभप्रद भी होता है, लेकिन एक सीमा के बाद तनाव का बढऩा व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है।

आखिर यह तनाव क्या है?

आज के इस दौर में भौतिक सुख सुविधाएं एकत्र करना ही हर किसी का उद्ïदेश्य बन गया है, जिस के लिए हम सदा प्रत्यनशील रहते हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि कुछ हासिल करने के बाद भी हम सुखी और संतुष्टï नहीं हो पाते और एक इच्छा के पूर्ण होते ही हमारे मन में दूसरी इच्छा उपजने लगती है, जिससे हमारे अंदर तनाव पैदा हो जाता है। हर बार जो बदलाव के कारण तनाव उत्पन्न होता है, वही तनाव कहलाता है। चिकित्सा विज्ञान में किये गए नये प्रयोगों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मानसिक तनाव बहुत सी गंभीर बीमारियां उत्पन्न करने में सक्षम होता है।

न केवल हृदय की बीमारियों और पेट के अल्सर से इसका गहरा संबंध है, बल्कि अधिकांश मानसिक बीमारियों, याददाशत की कमी, भूख की कमी या अत्याधिक भूख लगना और मोटापा और सबसे अधिक शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करने में मानसिक तनाव एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कारक है। मानसिक बीमारियों को लेकर हमारे देश में आज भी काफी भ्रम हैं। एक तरफ तो देश साइबर युग के निर्माण और नये उपग्रहों को छोडऩे में नित नई बुलंदियां छू रही है, वहीं दूसरी ओर मानसिक बीमारियों को लेकर नीम हकीमों और झाड-फूंक करने वालों के पास जाने वालों की भी देश में कोई कमी नहीं हैं, लेकिन आज मानसिक बीमारियों का इलाज संभव हो चुका है।

मानसिक रेाग जैसे अवसाद, वहम, उदासी और फोबिया आदि आज की भागदौड़ भरी तनावमुक्त जिंदगी और कैरियर के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा की देखा है। आज आदमी जितना अधिक व्यस्त होता जा रहा है, उतना अधिक मानसिक तनाव का शिकार हो रहा है। यदि यह कहा जाएं तो मनुष्य के जीवन से जुड़ी कुछ विशेष परिस्थितियां इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। ये हैं-बचपन में मां-बाप के प्यार, तिरस्कार और सामथ्र्य से अधिक अपेक्षाएं, कठोर प्रताडऩा, विभिन्न प्रकार की यातनाएं, तीव्र ईष्र्या की भावनाएं, बुरे व्यक्ति को आदर्श मानना इत्यादि। इन परिस्थितियों के परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार की कुठंाए, हीन भावना, नैराश्य इत्यादि पैदा हो सकते हैं। इस के अलावा मनुष्य के व्यवहार, आचार-विचार, खान-पान, रहन-सहन इत्यादि से भी मानसिक रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

अक्सर देखा गया है कि व्यक्ति बहुत अधिक तनाव झेलने के कारण शराब, चरस और दूसरी बुरी आदतों से अपना जीवन नष्टï कर लेता हैं। हर व्यक्ति में मानसिक तनाव उत्पन्न करने वाली परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती है, किसी के लिए किसी प्रियजन से विछोह या मृत्यु मानसिक तनाव उत्पन्न कर सकता है, तो किसी के लिए किसी का अत्यधिक प्रेम व लगाव, आने वाली परीक्षा, विवाह या घर में किसी का विवाह, बच्चे के भविष्य की चिंता या अपने कैरियर का चुनाव, कार्य-स्थल पर सामंजस्य न होने से तनाव या घर के अन्य सदस्यों से तालमेल न बैठ पाने का तनाव, किसी को लंबी यात्रा पर जाने का तनाव हो सकता है, तो किसी को घर पर खाली बैठने का, किसी को बदलती हुई सामाजिक मान्यताओं की वजह से तनाव हो सकता है, तो किसी को अपने अड़ोस-पड़ोस से, कभी बच्चे को स्कूल जाना शुरू करने पर मानसिक तनाव हो सकता है, किसी के लिए कोई बड़ी उपलब्धि भी तनाव उत्पन्न कर सकती है, तो दूसरी ओर असफलता भी। इस प्रकार रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाएं भी मानसिक तनाव उत्पन्न करती हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है, वर्तमान समय में कोई भी मनुष्य मानसिक तनाव से मुक्त नहीं हैं। सभी के जीवन में किसी न किसी प्रकार का मानसिक तनाव बना हुआ हैं।

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