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‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ बना ‘जन आंदोलन’

approved 75% ODF plus villages

देश वर्तमान में स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) 2023 अभियान के साथ स्वच्छता का पखवाड़ा मना रहा है, जिसकी थीम ‘कचरा मुक्त भारत’ है। सामूहिक रूप से एकता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करते हुए और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता के आह्वान से प्रेरित होकर, पिछले 14 दिनों में 32 करोड़ से अधिक लोगों ने राष्ट्रव्यापी अभियान में भाग लिया। इस अभियान में देश में प्रति दिन औसतन लगभग 2.3 करोड़ लोगों ने भागीदारी की। यह ‘जन आंदोलन’ राष्ट्र के लिए व्यापक परिणाम प्राप्त कर रहा है, जिसमें भारत के 75 प्रतिशत गांवों को ओडीएफ प्लस के रूप में घोषित करना यानी ठोस या तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करने के साथ-साथ गांवों को खुले में शौच से मुक्त की स्थिति बनाए रखना शामिल है। यह स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति समुदायों एवं सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता पर भी जोर देता है।

इस वर्ष के अभियान में देश भर से 32 करोड़ से अधिक लोगों की काफी भागीदारी देखने को मिली  है, जिसमें अब तक केवल 14 दिनों में, प्रति दिन लगभग 2.3 करोड़ लोगों की भागीदारी रही है। इनमें लगभग 15 करोड़ नागरिकों ने श्रमदान में सक्रिय रूप से भाग लिया, 3.68 लाख स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) गतिविधियों में स्वेच्छा से श्रम का योगदान दिया। इन प्रयासों में लगभग 5300 समुद्र तटों की सफाई, 4300 नदी तटों और जलमार्गों को पुनर्जीवित करना, 10,700 से अधिक विरासत अपशिष्ट स्थलों का पुनरुद्धार करना, 2400 पर्यटन और प्रतिष्ठित स्थलों को बेहतर बनाना और 93,000 से अधिक सार्वजनिक स्थानों को बहाल करना शामिल है। इसके अतिरिक्त 12,000 से अधिक जल निकायों की सफाई की गई है, 60,000 से अधिक संस्थागत भवनों का कायाकल्प किया गया है, और लगभग 47,000 कचरा-संवेदनशील स्थलों को साफ किया गया है। ये आंकड़े तेजी से बदलाव लाने के लिए ‘जन आंदोलन’ के दृढ़ समर्पण एवं शक्ति को दर्शाते हैं।

इस वर्ष के समारोहों का समापन 1 अक्टूबर को होगा, जब सरकार के संपूर्ण दृष्टिकोण के साथ-साथ देश के नागरिक ‘एक तारीख एक घंटा एक साथ’ के हिस्से के रूप में विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाने के लिए सुबह 10 बजे नागरिकों के नेतृत्व में ‘स्वच्छता के लिए श्रमदान’ के एक घंटे के लिए सहयोग करेंगे। प्रधानमंत्री का यह आह्वान समाज के सभी पहलुओं में स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करता है। मन की बात के 105वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे स्वच्छता के लिए एक घंटे का श्रमदान करने की अपील करते हुए कहा कि बापू की जयंती की पूर्व संध्या पर उन्हें ‘स्वच्छांजलि’ दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि  1 अक्टूबर यानी रविवार को सुबह 10 बजे स्वच्छता पर एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आप भी समय निकालकर स्वच्छता से जुड़े इस अभियान में मदद करें। आप अपनी गली, या पड़ोस या किसी पार्क, नदी, झील या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर भी इस स्वच्छता अभियान में शामिल हो सकते हैं।

इस वर्ष के स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका तीन केंद्रीय मंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से शुभारंभ किया है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘स्वच्छ भारत’ की उपलब्धि की दिशा में सरकार के विभिन्न विभागों के प्रयासों में एकता का प्रतीक है। इसके परिणाम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शुभारंभ के केवल एक सप्ताह के भीतर ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश भर में 75 प्रतिशत ओडीएफ प्लस गांवों की उपलब्धि की घोषणा की है।

स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण और शहरी के बीच प्रयासों के तालमेल के अलावा, इस बार सरकार का संपूर्ण दृष्टिकोण काफी स्पष्ट है, क्योंकि ‘स्वच्छ भारत’ सुनिश्चित करने के लिए अन्य विभागों द्वारा भी कई पहल की गई हैं। पर्यटन मंत्रालय ने 108 चयनित स्थलों पर स्वच्छता अभियान के लिए ट्रेवल फॉर लाइफ शुरू किया है।  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश भर के सभी सिनेमा स्क्रीन पर स्वच्छता ही सेवा से जुड़े वीडियो चलाना सुनिश्चित किया है, जबकि दूरसंचार विभाग सभी मोबाइल नेटवर्क पर स्वच्छता ही सेवा वाली रिंगटोन बजा रहा है। नागर विमानन विभाग और रेलवे बोर्ड सभी हवाई अड्डों और रेलवे क्षेत्रों में स्वच्छता ही सेवा अभियान से संबंधित गतिविधियों में सहायता कर रहे हैं, वहीं एएसआई ने स्वच्छता ही सेवा ब्रांडिंग के साथ सभी प्रमुख स्मारकों को रोशन किया है। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग देश के सभी सार्वजनिक और निजी स्कूलों में स्वच्छता गतिविधियों को सुनिश्चित कर रहा है, उच्च शिक्षा विभाग भी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को स्वच्छता के संदेश को फैलाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। प्रत्येक विभाग अपने अनूठे तरीके से स्वच्छता ही सेवा अभियान का समर्थन कर रहा है और योगदान दे रहा है।

एक और अनूठी विशेषता यह है कि यह अभियान स्वच्छता नायकों– सफाई मित्रों के कल्याण के लिए भी काम कर रहा है। उनके कल्याण के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर और योग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। समुदाय के सभी वर्ग स्वच्छता ही सेवा को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए सहयोग दे रहे हैं। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को बड़ी संख्या में एकजुट किया गया जिनमें से कई ने श्रमदान के लिए गांवों को गोद लिया है। स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं ने अपने शहरों, कस्बों और गांवों को साफ करने में बहुत उत्साह दिखाया है, साथ ही कॉलेजों ने गांवों को भी गोद लिया है। वरिष्ठ नागरिक समुद्र तटों, पार्कों, सार्वजनिक स्थानों पर श्रमदान कर रहे हैं और एक स्वच्छ समाज के लिए अपनी भूमिका निभा रहे हैं। धार्मिक स्थलों में धर्मगुरु श्रमदान करवा रहे हैं। चैंबर ऑफ कॉमर्स, रेड क्रॉस, विभिन्न व्यापार और कृषि निकायों जैसे विभिन्न निकाय स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

सामूहिक रूप से एकजुट होकर की जाने वाली गतिविधियों में स्वच्छता शपथ, स्वच्छता दौड़ और मानव श्रृंखला, कार्यालय परिसरों और आस-पास के क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान (डीएपीआरजी के विशेष अभियान 3.0 के साथ समन्वय), रेलवे ट्रैक और स्टेशन, हवाई अड्डों के आस-पास के क्षेत्र, विश्व पर्यटन दिवस के साथ समन्वय में पर्यटन स्थल/तीर्थ स्थल, एएसआई स्मारक/विरासत स्थल, शैक्षिक संस्थान, राजमार्ग और आस-पास के क्षेत्र, चिड़ियाघर, अभयारण्य, पार्क, अन्य अधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र, सिंगल यूज प्लास्टिक बैन और जीरो वेस्ट इवेंट्स का संकल्प लेना शामिल हैं। इन सामूहिक प्रयासों ने हमारे पर्यावरण को फिर से जीवंत किया है, एक स्वच्छ, स्वस्थ वातावरण बनाया है। यह ‘टीम इंडिया’ की भावना को समर्पित है।

यह स्पष्ट है कि स्वच्छता ही सेवा, 2023 अभियान ने जनता के बीच स्वैच्छिकता और सामुदायिक भागीदारी की भावना को पुनर्जीवित किया है। इसने स्वच्छता को प्रत्येक व्यक्ति का कार्य बनाने के वार्षिक अभियान के उद्देश्य को हासिल किया है।

 यह अभियान दर्शाता है कि उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं जब व्यक्ति, समुदाय और सरकारी एजेंसियां एक साझे दृष्टिकोण के साथ एकजुट होती हैं और ‘स्वच्छ भारत’ मिशन जैसे मिशन की दिशा में काम करती हैं।

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