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मोटापे का बढ़ता बोझ ..चिंताजनक

दमा, उच्च रक्तचाप और डायबिटीज़ जैसे विकार हैं मरीजों को बेरियाट्रिक सर्जरी की ओर ले जाने वाले प्रमुख कारक

मोटापा पूरी दुनिया में सेहत के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है, खासतौर से विकसित देशों में। मोटापे के साथ ही वजन में होने वाली बढ़ोतरी के चलते हार्ट की बीमारियां, डायबिटीज, हाइपर टेंशन, स्ट्रोक और ओस्टियोआर्थराइटिस के अलावा कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर जैसी कुछ घातक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। नतीजन, यह खराब सेहत और असामान्य मृत्यु का एक बड़ा कारण बनता है। दुर्भाग्य से मोटापा शारीरिक रूप से बाधक भी बनता है और इसके चलते यह आपकी नजदीकी को कम करके सेक्स लाइफ  पर भी असर डालता है।

आमतौर पर अगर किसी व्यक्ति का वजन उसके शरीर के लिए आदर्श वजन के मुकाबले 20 प्रतिशत से ज्यादा होता है, तो उसे मोटापे से ग्रसित माना जाता है। साथ ही मोटापे से ग्रसित करीब 30 प्रतिशत लोग सेक्स के प्रति रुझान, सेक्स की इच्छा और परफॉर्मेंस में कमी से जुड़ी समस्याओं के चलते अपने मोटापे को कंट्रोल करने में मदद मांगते हैं। इसलिए अगर आप एक बेहतर सेक्स लाइफ  चाहते हैं, तो मोटापे से बचने की कोशिश कीजिए, अपना वजन कम कीजिए और उसे मेंटेन कीजिए। यह सुनने में अजीब लग सकता है, मगर यह सच है कि मोटापा पूरी तरह आनंददायक सहवास की राह में एक बड़ी अड़चन है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण द्वारा पेश की गई चौंकाने वाली रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार, मध्य प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में 10 फीसदी से अधिक लोग मोटापे से पीडि़त पाए गए हैं। जब मैं पटना टियर 2 एवं 3 शहरों के मरीज़ों में 40 से अधिक बीएमआई देखता हूं तो मुझे तकलीफ  होती है। करीब एक दशक के पहले बहुत कम मरीज़ वजन कम करने की प्रक्रियाओं का विकल्प चुनते थे लेकिन पटना में हमने जिन मरीजों का बेरियाट्रिक सर्जरी के माध्यम से उपचार किया उनका औसत बीएमआई 44 के करीब था जो चिंता की बात है। टाइप 2 डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, नींद में बाधा, माइग्रेन और अवसाद अब घरों में प्रचलित नाम बन गए हैं जो बड़े पैमाने पर पटना के लोगों को प्रभावित कर रहे हैं।

मोटापे के बारे में चिंताजनक तथ्य

1.सरकारी स्वास्थ्य सर्वेक्षण राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4ए) में पाया गया कि पिछले एक दशक के दौरान देश में अधिक वजन वाले पुरु षों की संख्या दोगुनी हो गई है। महिलाओं के मामले में प्रत्येक पांच में एक महिला का वजन अधिक है (20 फीसदी)।

2.हालांकि ज्यादातर मामलों में मोटापा शहरी उच्च एवं मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रभावित करता है लेकिन ग्रामीण आबादी में भी ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती दिख रही है-14.3 फीसदी पुरुष मोटापे से पीडि़त पाए गए हैं।

3.चूंकि भारत एक विकासशील देश है, कोई भी मान सकता है कि कुपोषण मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हो सकता है। लेकिन वास्तविकता में मोटापा लाखों लोगों में खतरनाक बीमारियों का कारण बन रहा है और प्रभावित कर रहा है।

4.बचपन का मोटापा भी दुनिया भर में बढ़ रहा है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी मोटापे से पीडि़त पाए जा रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट बताती है कि पांच वर्ष से कम उम्र के मोटे और अधिक वजन वाले बच्चों की संख्या 1990 के बाद से दोगुनी होकर 1.03 करोड़ हो गई है। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं-शारीरिक गतिविधि की कमी, जंक फूड, शुगरी ड्रिंक्स इत्यादि।

पिछले कुछ वर्षो में ऐसे कई मामले देखे गये हैं जहां पटना के मरीज़ों का बीएमआई 40 से अधिक रहा है। ऐसे मरीज़ों को व्हीलचेयर के अलावा भी स्पोर्ट की जरूरत होती है और वे मोटापा जनित कई रोगों से ग्रस्त होते हैं। मुताबिक, मैं जब भी पटना आता हूं तो मुझे कम से कम 25 ऐसे मरीज देखने को मिलते हैं जिन्हें मोटापे के लिए तत्काल सर्जरी की जरूरत होती है। एफएचवीके में एमएएस, बेरियाट्रिक एवं जीआई सर्जरी टीम के पास अत्यंत दुर्लभ मामलों को निपटाने के लिए अत्याधुनिक एवं व्यापक देखभाल कार्यक्रम है। उनकी टीम कई मरीज़ों को नया जीवन देकर कई अन्य उपलब्धियां हासिल करने में सक्षम है। वह इस विषेशज्ञता में अग्रणी लोगों में से हैं।’’

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