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देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का मई 2026 के लिए ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू हुआ

देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के लिए दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम (ओएसटीआई) आज से शुरू कर दिया है। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने महासचिव श्री भरत लाल, संयुक्त सचिव श्रीमती सैदिंगपुई छकछुक, निदेशक श्री इरशाद आलम और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का उद्घाटन किया। देश भर के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,417 आवेदकों में से विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के 100 विद्यार्थियों का इस पाठ्यक्रम के लिए चयन किया गया है और इन चयनित विद्यार्थियों ने इंटर्नशिप शुरू कर दी है। दो सप्ताह का यह कार्यक्रम 29 मई 2026 को समाप्त होगा।

न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व लगभग 130 सशस्त्र संघर्षों का सामना कर रहा है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे अधिक है और यह मानवाधिकार जागरूकता और संवाद के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। वैश्विक शांति सूचकांक 2025 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में 98 देश बाहरी संघर्षों का सामना कर रहे हैं और वैश्विक आर्थिक क्षति लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि इन संघर्षों में 120 से अधिक गैर-सरकारी सशस्त्र समूह शामिल हैं। इन संघर्षों में से कई एक दशक से अधिक समय से जारी हैं, जिसके कारण कई पीढ़ियां हिंसा और असुरक्षा के बीच पली-बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर 122 मिलियन से अधिक लोग जबरन विस्थापित हुए हैं, जबकि 17 देशों में पांच प्रतिशत से अधिक आबादी शरणार्थी या आंतरिक रूप से विस्थापित है।

न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने समाज में संचार और भागीदारी के नए अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, प्रौद्योगिकी ने कई मामलों में अशांति और अस्थिरता को भी बढ़ावा दिया है, जहां सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले विरोध प्रदर्शन कई बार हिंसक हो जाते हैं और विभिन्न देशों में राजनीतिक घटनाक्रमों को प्रभावित करते हैं। न्याय और निष्पक्षता से जुड़े नैतिक और दार्शनिक प्रश्नों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने प्रशिक्षुओं को संवाद और विभिन्न दृष्टिकोणों के प्रति खुले रहने के लिए प्रोत्साहित किया। भारतीय धर्मग्रंथों में सबसे बड़ा धर्म माने जाने वाले ‘दया’ या सहानुभूति के महत्व पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज और मानवाधिकारों के मुद्दों के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण, निष्पक्ष और संवेदनशील बनाना है।

इससे पहले, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के भारत महासचिव श्री भरत लाल ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई ओएसटीआई (ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम) देश भर के विद्यार्थियों को वित्तीय और लॉजिस्टिक संबंधी बाधाओं का सामना किए बिना भाग लेने में सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इंटर्नशिप कार्यक्रमों की संख्या तीन या चार से बढ़कर छह हो गई है, जबकि प्रति बैच विद्यार्थियों की संख्या 80 से बढ़कर 100 हो गई है। इससे एनएचआरसी इस प्रारूप के माध्यम से एक वर्ष में 600 विद्यार्थियों तक पहुँचने में सक्षम है। प्रशिक्षुओं से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आग्रह करते हुए, उन्होंने उन्हें समानता, न्याय और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने और अवलोकन क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं से संवेदनशीलता विकसित करने और स्थितियों पर प्रतिक्रिया करने से पहले चिंतन करने की क्षमता विकसित करने का भी आग्रह किया।

दैनिक जीवन में संवेदनशीलता और करुणा की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने प्रशिक्षुओं से जरूरतमंदों की सहायता करने का आग्रह किया। उन्होंने दो सप्ताह के इस कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य को रेखांकित किया, जिसका लक्ष्य प्रशिक्षुओं के चरित्र निर्माण और उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना है।

एनएचआरसी की संयुक्त सचिव श्रीमती सैदिंगपुई छकछुक ने इंटर्नशिप कार्यक्रम का विस्तृत विवरण दिया। प्रशिक्षुओं के लिए 45 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, मानवाधिकार रक्षकों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज संगठनों और कानून प्रवर्तन, मानसिक स्वास्थ्य, बाल अधिकार और मानवाधिकार संरक्षण के विशेषज्ञों में से चुने गए 40 प्रतिष्ठित वक्ता शामिल होंगे। प्रशिक्षुओं को पुलिस थाना, तिहाड़ जेल और आशा किरण आश्रय गृह के कामकाज की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए वर्चुअल अनलोकन भी कराया जाएगा। कार्यक्रम में पुस्तक समीक्षा प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता और समूह अनुसंधान परियोजना प्रस्तुतियों जैसी अंतःक्रियात्मक शिक्षण गतिविधियाँ भी शामिल होंगी।

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