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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने आज केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें चत्तरगला सुरंग परियोजना के साथ-साथ उधमपुर-कठुआ-डोडा लोकसभा क्षेत्र में आगामी सड़क और पुल परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने आज केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें चत्तरगला सुरंग परियोजना के साथ-साथ उधमपुर-कठुआ-डोडा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में अन्य आगामी सड़क और पुल परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में जन प्रतिनिधियों के अनुरोध या जनता की मांग पर अपने लोकसभा क्षेत्र में अनेक कठिन सड़क और पुल परियोजनाओं सहित अधिकतम संख्या में परियोजनाएं शुरू और पूरा करने के लिए बीआरओ की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीआरओ ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर जीरो लाइन तक सड़क कनेक्टिविटी पूरी की है।

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पिछले नौ वर्षों में उधमपुर-कठुआ-डोडा लोकसभा क्षेत्र ने सड़क और पुल निर्माण में अभूतपूर्व प्रगति देखी है, उनमें से प्रमुख हैं- बसोहली में अटल सेतु, कठुआ में किड़ियां गडयाल और जुथाना पुल, उधमपुर में देविका पुल, डोडा में खिलानी-मरमत से सुधमहादेव, कलजुगर सुरंग आदि तक नया राष्ट्रीय राजमार्ग। डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि एक वर्ष अधिक समय पहले रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने अकेले कठुआ जिले में सात बीआरओ पुलों का एक साथ ई-उद्घाटन किया था, जिसमें जंत्रिया, कोन्याली-I, कोन्याली-II, चिनाब बड़ी, पक्का कोठा, छल्ला नल्ला और बेनाडी शामिल थे। उन्होंने कहा कि इनमें से बेनादी पुल का निर्माण केवल 90 दिनों में किया गया था जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसी तरह श्री राजनाथ सिंह द्वारा इस महीने की 19 तारीख को जम्मू और कश्मीर में 11 अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जिसमें बसोहली-बनी-भद्रवाह रोड पर जोथा, सरद और सारथी जैसे तीन पुल शामिल थे।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रस्तावित चत्तरगला सुरंग के बारे में कहा कि वह लंबे समय से इस परियोजना पर काम कर रहे थे लेकिन वित्तीय, भौगोलिक और कोविड सहित अन्य बाधाओं के कारण इसमें विलंब हो गया था। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण सुरंग भद्रवाह और डोडा को छूने के लिए बसोहली-बानी से चत्तरगला होते हुए नए राजमार्ग पर जिला कठुआ को जिला डोडा से जोड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक परियोजना है जो दो दूरवर्ती क्षेत्रों के बीच सभी मौसम में वैकल्पिक सड़क कनेक्टिविटी देती है और डोडा से लखनपुर तक यात्रा का समय घटाकर लगभग चार घंटे कर देती है। चत्तरगला परियोजना में 6.8 किलोमीटर लंबी सुरंग की परिकल्पना की गई है, जिसके लिए बीआरओ द्वारा व्यवहार्यता सर्वेक्षण पहले ही किया जा चुका है और बीआरओ के अंतर्गत एक एजेंसी बीकन्स द्वारा कार्रवाई की गई है। निष्पादन कार्य शुरू होने के बाद सुरंग को पूरा होने में लगभग 4 वर्ष लगने की संभावना है और इसकी निर्माण लागत लगभग 3,000 से 3,500 करोड़ रुपये है। मंत्री महोदय को बताया गया कि बीआरओ ने 16 पुलों के निर्माण सहित सिंगल लेन से डबल लेन तक विकास के लिए सरथल-चत्तरगला रोड का काम शुरू किया है।

कुल 165.85 किमी सड़क में से लगभग 137 किमी को एनएचडीएल विनिर्देश के अनुसार ब्लैक टॉप किया गया है। चत्तरगला की शेष 28 किमी सड़क पर बीआरओ द्वारा काम तेजी से प्रगति पर है। इस सड़क के निर्माण से सरथल, चत्तरगला और गुरिदंडा के सुदूर क्षेत्र सहित क्षेत्र की पर्यटन क्षमता का पता चलेगा। वास्तव में सड़कों का उच्चतम मानक बनाए रखने तथा आधुनिक बर्फ हटाने वाले उपकरणों की तैनाती में बीआरओ के लगातार प्रयासों के कारण क्षेत्र में पर्यटन में कई गुना वृद्धि हुई है। बीआरओ को धन की कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था इसलिए डॉ. जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात की थी और भारतमाला या सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से किसी अन्य उपयुक्त चैनल के माध्यम से बीआरओ को वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि श्री गडकरी की प्रतिक्रिया सकारात्मक थी और उन्होंने यह काम करने के निर्देश जारी किए कि इसे किस तरह सर्वोत्तम तरीके से किया जा सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बीआरओ के महानिदेशक से चत्तरगला परियोजना को यथासंभव शीघ्र पूरा करने के लिए कहा।

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उन्होंने कहा कि चत्तरगला विशेष रूप से कठुआ और डोडा जिलों के लिए एक क्रांतिकारी गेम चेंजर साबित होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल राजस्व आएगा बल्कि रोजगार सृजन भी होगा। इसके अतिरिक्त सभी मौसम में सड़क कनेक्टिविटी से व्यापार में आसानी होगी, यात्रा समय कम होगा और बानी और भद्रवाह जैसे स्थानों को राष्ट्रीय ख्याति के पर्यटन स्थलों के रूप में उभरने का एक अनूठा अवसर भी मिलेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चत्तरगला में सुरंग की मांग कई वर्षों से लंबित थी, लेकिन पहले की सरकारों ने अपनी अलग-अलग प्राथमिकताओं के कारण इस पर ध्यान नहीं दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जहां बेनादी पुल का निर्माण बीआरओ ने केवल 90 दिनों में किया था, जो अब तक का बीआरओ का रिकॉर्ड है, वहीं 181 मीटर लंबा मल्टी-स्पैन पक्का कोठा पुल 102 दिनों में बनाया गया था। बीआरओ परियोजनाओं में रामबन पुल और ब्रिहोन पुल का निर्माण भी शामिल है।

इस निर्वाचन क्षेत्र में अन्य बीआरओ की परियोजनाओं में डोडा जिले में भगवा से लाल-दरमन से मसल-दुश्नान तक सड़क, कठुआ जिले में चक्रमोर-महाराजपुर-राजबाग-हरिया चक सड़क और उधमपुर जिले में फटाला से जखानी सड़क का उन्नयन शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल श्रीनिवासन ने डॉ. जितेंद्र सिंह को उनके लोकसभा क्षेत्र में आने वाली नई बीआरओ सड़क और पुल परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।

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