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श्री भूपेन्द्र यादव ने मध्य प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाले संपूर्ण परिदृश्य के समावेशी विकास पर बल दिया, जिससे यह एक विश्व स्तरीय इको-पर्यटन केंद्र बन सके

प्रोजेक्ट चीता ने स्थानीय समुदाय को एकजुट किया है और उन्हें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के माध्यम से आजीविका के विकल्प प्रदान किए हैं। इसके परिणामस्वरूप चीता संरक्षण में स्‍थानीय समुदाय का भारी समर्थन मिला है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्‍द्र यादव और मध्य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री श्री मोहन यादव ने सोमवार को एक कार्यक्रम में सामुदायिक जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए, कुनो के सीमांत गांवों से समाज के विभिन्न वर्गों से आए 350 से अधिक लोगों के कार्यबल चीता मित्र को साइकिलें प्रदान कीं। इस अवसर पर मध्‍य प्रदेश के वन मंत्री, सांसद, स्थानीय विधायक, जन प्रतिनिधि, डीजीएफ एंड एसएस श्री जितेंद्र कुमार, एमएस एनटीसीए श्री एसपी यादव और राज्य तथा केंद्र के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इन चीता मित्रों में सीमांत क्षेत्रों के स्वयंसेवक होते हैं। पिछले डेढ़ वर्ष से चीता मित्र लोगों को मानव-पशु टकराव, चीतों के चलने के तरीकों और चीतों के व्यवहार के साथ-साथ मिथकों को दूर करने के अतिरिक्‍त किसी पशु का सामना होने पर अपेक्षित प्रतिक्रिया के बारे में शिक्षित कर रहे हैं। इन प्रयासों का लाभ यह हुआ है कि कोई बड़े टकराव की घटना नहीं हुई है और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बना हुआ है।

केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने प्रोजेक्ट चीता की समीक्षा बैठक में मध्य प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाले पूरे परिदृश्य के समावेशी विकास को विश्व स्तरीय इको-पर्यटन केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकास केवल चीता केंद्रित नहीं बल्कि क्षेत्र केंद्रित होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि मुख्‍य फोकस आधारभूत अवसंरचना, वन्यजीव संरक्षण, कर्मचारी क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन तथा प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय समुदाय की आजीविका को बढ़ाने पर होगा।

पिछले वर्ष 17 सितंबर को भारत में चीता के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर चीता मित्रों को साइकिलें देने का निर्णय लिया गया था। चीता मित्रों को साइकिलों से लैस करना एक रणनीतिक पहल है, जिसे चीता संरक्षण प्रयासों में उनके योगदान को बढ़ाने और सुव्यवस्थित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। साइकिल का प्रावधान इन स्वयंसेवकों की दक्षता और पहुंच को बढ़ाने के लिए एक व्यावहारिक साधन के रूप में कार्य करता है क्योंकि वे कुनो राष्ट्रीय उद्यान और उसके आसपास अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। ये साइकिलें एनटीसीए द्वारा एनईईसीओ इंडस्ट्रीज की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के अंतर्गत प्राप्त सहायता से प्रदान की गईं। केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे ईंधन स्टेशन की आधारशिला भी रखी। ये स्‍टेशन कूनो वर्कर्स सोसायटी द्वारा चलाया जाएगा।

17 सितम्‍बर, 2022 भारत में वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में ऐतिहासिक दिन था, जब विश्‍व का सबसे तेज़ ज़मीनी जानवर देश से लगभग 75 वर्षों के स्थानीय विलुप्तता के बाद अंततः भारत में वापस लाया गया। पहले अंतरमहाद्वीपीय वन्यजीव स्थानांतरण में और भारत में अपने एशियाई समकक्षों के विलुप्त होने के दशकों बाद नामीबिया से आठ अफ्रीकी चीते मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित हुए थे। इसके बाद, फरवरी, 2023 में दक्षिण अफ्रीका से बारह चीतों को भी स्थानांतरित किया गया और कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ दिया गया।

संपूर्ण परियोजना नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और भारत के सरकारी अधिकारियों, वैज्ञानिकों, वन्यजीव जीवविज्ञानी और पशुचिकित्सकों की विशेषज्ञ टीम की देखरेख में लागू की गई थी। चीतों को फिर से परिचित कराने से सूखे घास के मैदानों के संरक्षण पर फोकस किया जा रहा है और इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस परियोजना की सफलता से विश्‍व भर में नई पहल की संभावनाएं खुलेंगी।

अधिकांश चीते भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल हैं और शिकार, परिदृश्य की खोज, अपनी हत्या की रक्षा करने, तेंदुए और लकड़बग्घे जैसे अन्य मांसाहारियों से बचने/पीछा करने, क्षेत्र निर्धारित करने, आंतरिक झगड़े, प्रेमालाप और संभोग तथा मनुष्यों के साथ कोई नकारात्मक बातचीत नहीं होने के माध्यम से अपेक्षित व्‍यवहार दिखा रहे हैं। सात चीते मर चुके हैं, लेकिन अवैध शिकार, शिकार, फंसाने, दुर्घटना, जहर और प्रतिशोधी हत्या जैसे अप्राकृतिक कारणों से मृत्‍यु नहीं हुई है। ऐसा काफी हद तक स्थानीय गांवों के भारी सामुदायिक समर्थन से संभव हुआ है।

यह एक चुनौतीपूर्ण परियोजना है और प्रारंभिक संकेत उत्साहजनक हैं। अल्पकालिक सफलता का आकलन करने के लिए बनी कार्य योजना में दिए गए 6 मानकों में से परियोजना पहले ही चार मानकों-लाए गए चीतों में 50 प्रतिशत को जीवित रखना, होम रेंज की स्थापना, कुनो में शावकों का जन्म-को पूरा कर चुकी है। परियोजना ने प्रत्‍यक्ष रूप से चीता ट्रैकर्स को शामिल करके और परोक्ष रूप कुनो के आसपास के इलाकों में भूमि के मूल्य बढ़ाकर राजस्व में योगदान दिया है।

अब तक की सर्वाधिक सुखद खबर यह है कि भारत की धरती पर 8 शावकों का जन्म हुआ है और वे जीवित हैं। इससे कूनो में चीता की कुल संख्या 21 हो गई है।

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