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76वाँ गणतंत्र दिवस समारोह:-स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास

​अपने गौरवशाली अतीत से सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ता भारत जिसकी गौरवशाली लोकतांत्रिक परंपरा का भव्य महोत्सव देश का 76वाँ गणतंत्र दिवस समारोह आज संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल के कोइराजपुर परिसर में अपनी गिलट बाजार शाखा के साथ संयुक्त रुप से पूर्ण उत्साह एवं जोश के साथ मनाया गया। आज के इस विशेष समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि  अनिल कुमार सिंह (जनपद न्यायाधीश, आगरा) के हाथों ध्वज फहराकर किया गया। विद्यालय के विभिन्न सदनों एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के सम्मान में मार्च पास्ट टीम के द्वारा कदम से कदम मिलाते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को प्रदर्शित करते हुए पूर्ण निष्ठा के साथ सलामी दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंखला में समूह गीत, काव्य पाठ एवं भाषण द्वारा विद्यार्थियों ने एक समृद्ध, सशक्त एवं समावेशी राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने का सद्संकल्प दोहराया और यह आश्वस्ति देने का प्रयास किया कि वे सभी राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का पालन निष्ठा से करते रहेंगे। मानसिक एवं शारीरिक सामंजस्य-कौशल को दर्शाते हुए नन्हें विद्यार्थियों ने पी. टी. के माध्यम से अपने सूक्ष्म किंतु सधे हुए अभ्यास का परिचय दिया। आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यालय की दोनों शाखाओं से लगभग एक हजार से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

आज के सास्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कोइराजपुर शाखा एवं गिलट बाजार शाखा के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत समूह नृत्य वंदे भारतम की प्रस्तुती रही, जिसके अंतर्गत विश्व वितान के केंद्र में स्थित भारत भूमि की विविध पहचान एवं लोक कलाओं का इंद्रधनुषी प्रतिबिंब पूरे परिसर में साकार हो उठा जब भारत के विभिन्न लोक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसे- भरतनाट्यम, ओडिसी, कथक, मनीपुरी साथ ही साथ हरियाणवी, संभलपुरी, बिहू, मराठी लावनी इत्यादि को जीवंत कर दिया और विविधता में एकता को चरितार्थ करते हुए संपूर्ण भारत के दर्शन को प्रत्यक्ष कर दिया। इक्कीसवीं सदी के स्वर्णिम स्वप्न को साकार करने की दिशा में सार्थक भूमिका रखने वाले हमारे देश के अन्नदाता हमारे किसान भाई, देश की सीमा पर तैनात हमारे सजग सैनिक बंधु एवं नई तकनीकी तथा नवोन्मेषी वैज्ञानिक विचारधारा के पोषक हमारे शोधकर्ता एवं वैज्ञानिकों की भूमिका को उद्घाटित करते गिलट बाजार शाखा के विद्यार्थियों ने एक सुंदर, आकर्षक समूह नृत्य प्रस्तुत किया जिसे देखकर दर्शक दीर्घा में अपूर्व उत्साह एवं ओज का संचार हुआ। 

मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि अधिकार-बोध की अवधारणा विकृति को जन्म देती है जबकि कर्तव्य-बोध व्यक्ति की क्षमता, विकास व मानवीय संवेदना को जन्म देता है। देश को विश्व गुरू बनाने के लिए विद्यार्थी के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक स्वास्थय के संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। समारोह के अध्यक्ष के रुप में पधारे श्री डी. पी. सिंह ( जनपद न्यायाधीश पटना) ने देश के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए देश के गणतन्त्र का वास्तविक एवं ऐतिहासिक महत्व समझाया एवं देश में कानून की महत्ता पर व्यापक चर्चा की। संस्था सचिव श्री राहुल सिंह जी ने कहा कि गणतन्त्र और स्वतन्त्र में अन्तर अनुशासन के आधार पर ही समझा जा सकता है। देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी प्रत्येक विद्यार्थी को निभानी होगी क्योकि सींचा पौधों को जाता है, वृक्षों को नहीं।

अन्य गणमान्य अतिथियों में श्री राम जी सिंह , श्री डी. के. श्रीवास्तव , श्री सभाजीत सिंह ,श्री पवन सिंह , श्री सुनील सिंह, श्री नंदू भारद्वाज, श्री विपिन गुप्ता, श्री धर्मेंद्र त्रिपाठी, डॉक्टर संतोष सिंह, श्री संजय सिंह तथा श्री प्रदीप सिंह इत्यादि का विशेष स्नेह प्राप्त हुआ। आज के इस समारोह में संस्था निदेशिका डॉ. वन्दना सिंह, सह-निदेशक श्री आयुष्मान सिंह एवं प्रधानाचार्या डॉ. नीलम सिंह ने सभी अभ्यागतों के प्रति विशेष आभार एवं कृतज्ञता ज्ञापित की। कार्यक्रम का संचालन कक्षा 11 की छात्रा कनिष्का सिंह एवं श्रीया कौशिक द्वारा किया गया।

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