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हर पाठक बोल उठेगा– यात्री हुए हम

ऊर्जा व्यक्ति को स्थिर नहीं रहने देती है, बिल्कुल मुक्त इलेक्ट्रॉन की तरह। मुक्त इलेक्ट्रॉन यदि कहीं से ऊर्जा ग्रहण कर लेता है तो भ्रमण के लिए उतावला हो उठता है और निकल पड़ता है अपने अगले पड़ाव की ओर। ठीक ऐसे ही यदि किसी व्यक्ति को कहीं से सही और सटीक मात्रा में ऊर्जा मिल जाए तो वह निश्चित रूप से कहीं न कहीं यात्रा पर निकल ही पड़ता है। परंतु यह ऊर्जा कैसे मिले, कौन यह ऊर्जा प्रदान करे, किससे हम ऊर्जा ग्रहण कर पाएंगे, क्या यह ऊर्जा हमारी यात्रा के लिए परिस्थितियों को अनुकूल कर पाएगी, इन सभी सवालों का सटीक जवाब मिल सकता है वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा संपादित यात्रा वृत्तान्त पर चर्चित पुस्तक “यात्री हुए हम” को पढ़कर। 

उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा में कार्यरत 40 शिक्षक-शिक्षिकाओं के यात्रा वृत्तांत के मोतियों को एक सूत्र में पिरोकर निर्मित यह पुस्तक आपको नई–नई तरह के ऊर्जा स्रोतों से परिचित कराएगी। इस पुस्तक में कभी आपको हिमालय की ठंडक अपनी और आकर्षित करेगी तो कभी पूर्वोत्तर की खूबसूरती; कभी देश भर के ऐतिहासिक स्थल आपको गौरवान्वित होने के लिए बुलाते नजर आएंगे तो कभी दक्षिण भारत के तमाम प्राकृतिक सौंदर्य आपके अंतर्मन को सहलाकर अपना सान्निध्य प्रदान करने के लिए प्रेरित करेंगे; शैक्षिक यात्राएं आपको कुछ नया करने के लिए प्रेरित करेंगी तो धार्मिक यात्राएं और आस्था के केंद्र मंदिर आपको भक्ति भाव में सराबोर करने के लिए अपने पास आने का आह्वान करेंगे।

गैर समुद्रतटीय क्षेत्र के लोगों का गर्मी के मौसम में पसंदीदा डेस्टिनेशन होता है हिमालय। सिडनी बुरार्ड नामक भूगर्भशास्त्री ने नदियों के आधार पर हिमालय को चार भागों में विभाजित किया है। सिंधु नदी से लेकर सतलज नदी के मध्य फैले कश्मीर हिमालय के विभिन्न प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों यथा जम्मू, श्रीनगर, अमरनाथ का सूक्ष्म अवलोकन आप रश्मि मिश्रा, अभिलाषा गुप्ता, प्रीति भारती, साधना मिश्रा और डॉ. कुमुद सिंह के चश्मों से कर पाएंगे। सतलज नदी से लेकर भारत और नेपाल सीमा के मध्य विवाद के केंद्र में रहे काली नदी तक फैले कुमाऊं हिमालय के अंतर्गत केदारनाथ, ऋषिकेश, उत्तरकाशी दून और द्वार घाटी आदि के नैसर्गिकता और धार्मिकता को आप अनीता मिश्रा, कुहू बैनर्जी, सुनीता वर्मा, डॉ. वंदना मिश्रा, प्रज्ञा राय,  डॉ. रचना सिंह आदि के शब्दों से महसूस कर सकेंगे। श्रुति त्रिपाठी, दीप्ति राय दीपांजलि, अर्चना सागर, मीरा रविकुल के वृत्तांत काली नदी से लेकर तीस्ता नदी तक विस्तृत नेपाल हिमालय के प्रमुख स्थल नेपाल, सिक्किम, दार्जिलिंग के दर्जनों धार्मिक और दुर्गम स्थलों के रोमांच से भरकर आपको आकर्षित करेंगे। 

दक्षिण भारत त्रिभुजाकार आकृति में लगभग 6100 किमी की समुद्री तटरेखा से घिरा हुआ विशाल क्षेत्र है जो वर्ष भर सदाबहार तापमान, विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और समृद्ध विरासत के कारण लाखों लोगों को यात्री बनने पर विवश करता है। मुंबई, बंगलुरू, कुर्ग, कोच्चि, तिरूअनंतपुरम, कोयंबटूर, विशाखापत्तनम आदि शहरों के शानदार मानसिक भ्रमण आप इस पुस्तक में प्रेमनाथ नागर, हरियाली श्रीवास्तव, स्मृति दीक्षित, डॉ. सुमन गुप्ता, रश्मि तिवारी, मोनिका सिंह के लेखों के सान्निध्य में कर सकते हैं। वहीं मध्य प्रदेश के चार प्रमुख स्थलों भीमबेटका, पचमढ़ी, भेड़ाघाट और दतिया के दिव्य दर्शन आपको संतोष कुशवाहा, कुमुद, अशोक प्रियदर्शी और प्रमोद दीक्षित मलय के यात्रा वृत्तान्त के माध्यम से होंगे।

सीमा मिश्रा की बिठूर, प्रतिमा यादव की चित्रकूट संगोष्ठी और कमलेश कुमार पाण्डेय की चुनारगढ़ यात्रा आपको अपने पढ़ाई के दौरान की गई शैक्षिक यात्राओं की याद दिलाएगी तो रिम्पू सिंह की अमृतसर, मंजू वर्मा की पुष्कर और विवेक पाठक की जयपुर यात्राएं आपको इतिहास के पन्ने पलटने के लिए विवश कर देंगी। यात्राओं के लिए प्रेरित करने वाले ऊर्जा स्रोतों में धार्मिक आस्था एक प्रमुख स्रोत है। यह पुस्तक भी धार्मिक यात्राओं से अछूती नहीं है। दीपक कुमार गुप्ता की कामाख्या, सुधा रानी की माउंट आबू, वंदना श्रीवास्तव की उज्जैन महाकाल, कविता शर्मा की सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा पाठक को धार्मिक यात्राओं के लिए प्रेरित करती हैं। माधुरी त्रिपाठी की अयोध्या तक नाव की यात्रा, डॉ. प्रज्ञा त्रिवेदी की मोहास स्थित हनुमान मंदिर यात्रा, राजेंद्र प्रसाद राव की बिहार पदयात्रा अलग प्रकार का विशिष्ट अनुभव प्रदान करती है।

इनरलाइन पास और दूर दुर्गम दुरुस्त जैसे प्रसिद्ध यात्रा संस्मरणों के लेखक उमेश पन्त की यात्रा वृत्तान्त के ऐतिहासिक महत्त्व को रेखांकित करती हुई भूमिका ने पुस्तक में चार चांद लगाये हैं तो रुद्रादित्य प्रकाशन प्रयागराज द्वारा उच्च गुणवत्ता के पृष्ठों पर सुंदर व स्वच्छ छपाई और नीतीश कुमार के शानदार कवर डिजाइन ने पुस्तक को आकर्षक बना दिया है। प्रमोद दीक्षित मलय के संपादकीय लेख ने पुस्तक की कल्पना से लेकर तैयारी, प्रशिक्षण, नवोदित लेखकों द्वारा शानदार लेखन, संपादन और रचना तक के दुरूह सफर को रेखांकित किया है। इस पुस्तक को पढ़कर पाठक विभिन्न प्रकार की मानसिक यात्राएँ तो करेंगे ही, साथ ही  साथ भौतिक यात्राओं के लिए भी अवश्य प्रेरित होंगे। यह पुस्तक नवीन यात्रा वृत्तान्त लेखकों और शोधार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है, ऐसा मेरा विश्वास है।

दुर्गेश्वर राय शिक्षक एवं साहित्यकार , गोरखपुर
दुर्गेश्वर राय
शिक्षक एवं साहित्यकार, गोरखपुर
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