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सड़कों और हाईवे पर मवेशियों का जमावड़ा

समस्या

 – सुरेश सिंह बैस

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी की सड़कों पर इन दिनों आवारा मवेशियों का जमावड़ा आम दृश्य बन गया है, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कमोबेश ऐसी समस्या का सामना प्रदेश सहित लगभग सभी जगह आम हो गई है, ऐसी स्थिति अक्सर आकस्मिक दुर्घटना के कारण बन जाते हैं जिससे  राहगीरों की जान पर भी मुसीबत आन पड़ती है साथ ही साथ निरीह निर्दोष और बेजुबान मवेशी भी असमय काल के ग्रास बन जाते हैं। खासकर बरसात के बाद ये मवेशी सड़कों को अपना स्थायी ठिकाना बना लेते हैं, जिसके चलते आम लोग दुर्घटनाओं के शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. विशेष रूप से कोनी रोड से लेकर रायपुर रोड, सीपत रोड, सकरी रोड, मस्तुरी रोड तक आए दिन मवेशियों की वजह से सड़क हादसे हो रहे हैं। इसके लिए प्रशासन एवं मवेशी मालिकों की लापरवाही  पूर्ण रूप से दोषी है।

 हाईवे पर मवेशियों के झुंड से बढीं दुर्घटनाएं 
 सड़कों पर मवेशियों का झुंड बनने की वजह से दुर्घटनाएं होती है।
मवेशियों के झुंड से टकराकर वाहन चालक घायल हो चुके हैं! 
मवेशियों के झुंड से वाहन चालकों को जोखिम में सफ़र करना पड़ता है! 
मवेशियों के झुंड से किसानों की फ़सलों को नुकसान पहुंचता है! 

 मवेशियों के झुंड से वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है। बीते दिनों बिलासपुर में नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रक ने मवेशियों के झुंड को रौंद दिया था। शहर में मवेशी सड़कों पर स्वच्छंद घूमते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं घटती रहती हैं। न्याय ढाणी के रायपुर रोड सीपत रोड कोनी रोड कोटा रोड सकरी रोड औरत और शहर के अंदर के सड़कों और गलियों में भी जहां-था मवेशियों का जमाना बना हुआ रहता है खास करके जहां पर मार्केट है जैसे शनिचरी बाजार, बृहस्पति बाजार ,बुधवारी बाजार, ऐसी जगहों में मवेशियों की तादाद अच्छी खासी रहने से व्यापारियों और राहगीरों को अनेक परेशानियां हो रही है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि मवेशी मालिक अपने पशुओं का दोहन करने के बाद उन्हें खुला छोड़ देते हैं, जिससे सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन द्वारा बार-बार किए जा रहे दावों के बावजूद, सड़कों पर मवेशियों की वजह से हादसों का सिलसिला जारी है, जो उनके दावों की पोल खोल रहे हैं। 

राहगीरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं

न्यायधानी की सड़कों पर मवेशियों का झुंड बनाकर बैठना वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए हमेशा चिंता का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोग डरते हैं कि सड़क पर बैठे मवेशी अचानक उठकर चलने या आपस में लड़ने लगेंगे, जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं।ऐसी अप्रिय घटनाओं में कई बार लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। वहीं शहर के बाहर की हाईवे रोड पर जहां- तहाँ मवेशियों का झुंड रोड पर ही बैठ जाता है, और अक्सर रातों में तेज रफ्तार के वाहनों द्वारा कुचल दिए जाते हैं। ऐसी घटनाएं आए दिन हो रही है। 

स्थानीय निवासियों की नाराजगी

स्थानीय निवासी अमृत पापुला ने बताया कि बिलासपुर की मुख्य सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा इतना बढ़ गया है कि सड़क से गुजरना मुश्किल हो गया है। मवेशियों को हटाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासन के दावे केवल तब सच साबित होते हैं, जब किसी नेता या मंत्री का दौरा होता है।अन्य दिनों में सड़कों पर मवेशियों का कब्जा बना रहता है, खासकर रात से सुबह तक। प्रायः स्टेट और नेशनल हाईवे में  अधिकतर लरहता है मवेशियों का जमावड़ा दरअसल, बारिश के मौसम में कीचड़ से बचने के लिए मवेशी स्टेट और नेशनल हाईवे को अपना ठिकाना बना लेते हैं। शाम होते ही मवेशियां सड़क पर आ जाती है, जिसके कारण वाहन चालकों को भी दिक्कतें होती है। इसे लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिसमें से दो याचिकाओं पर लगातार सुनवाई चल रही है। इससे पहले भी हाईकोर्ट ने सड़कों से मवेशियों को नहीं हटाने पर सख्त नाराजगी जताई थी।

हाईवे से मवेशियों को हटाने हाईकोर्ट  का आदेश

हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले ही राज्य शासन को नेशनल और स्टेट हाईवे से मवेशियों को हटाने के लिए आदेश दिया है। इसके लिए पंचायत से लेकर कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अफसरों के अलावा कलेक्टर व निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नाराज कोर्ट ने कहा कि चौबीस घंटे सड़कों पर मवेशी नजर आते हैं। सड़क दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिलासपुर की सड़कों पर घूमकर देखा तो स्थिति खराब मिली। राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के समय बड़ी संख्या में मवेशियों के जमावड़ा रहता है। तेज रफ्तार भारी वाहनों की चपेट में आकर मवेशियों की भी मौत हो रही है।.प्रस्ताव के अनुसार, सड़क से आवारा पशुओं को हटाने की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई थी. लेकिन इन तमाम कोशिश के बावजूद मवेशियों की सड़क में मौत और उनकी वजह से हो रहे हादसे परेशानी का सबब बने हुए है। इसके निवारण के लिए आठ सदस्यीय कमेटी बनाने के लिए कहा गया है। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन नहीं होने पर कमेटी के सदस्यों की ही जवाबदेही होंगी।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
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