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अचर्चित क्रांतिकारियों का इतिहास बचाने का भगीरथ प्रयास

शैक्षिक संवाद मंच के पुस्तक संवाद कार्यक्रम में उभरते रहे  ‘राष्ट्र साधना के पथिक’

बांदा। शैक्षिक संवाद मंच उत्तर प्रदेश द्वारा मासिक पुस्तक संवाद कार्यक्रम के दसवें संस्करण के अंतर्गत गत दिवस शिक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा संपादित 49 शिक्षक और शिक्षिकाओं द्वारा लिखित आजादी के अचर्चित नायकों के जीवनवृत्त आधारित संग्रह ‘राष्ट्र साधना के पथिक’ पर ऑनलाइन संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद्  डॉ. अरविन्द कुमार द्विवेदी ने पुस्तक के 49 लेखकों के कार्य को अनुकरणीय और समाजोपयोगी बताया। आपने कहा कि पुस्तक में संपादक और लेखकों के पूर्व अनुभवों को सटीक तरीके से समायोजित किया गाय है। बताते चलें कि इस पुस्तक में लेखकों द्वारा अपने आस-पास के उन क्रांतिकारियों और घटनाओं को विधिवत अनुसन्धान करके लिखा गया है जिन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली या कम महत्त्व दिया गया। 

इस पुस्तक पर चर्चा में 40 लेखक और पाठकों ने प्रतिभाग कर आपने विचारों का आदान-प्रदान किया। स्मृति दीक्षित ने बंधू सिंह, तलाश कुंवरि, अशफाक उल्ला खां सहित कई लेखों पर चर्चा किया तो डॉ. श्रवण गुप्त ने इस पुस्तक को लेखन के दौरान संपादक  द्वारा दिए गए प्रेरणा का प्रतिफल बताया। मीना भाटिया ने लेखों को दुर्लभ बताया तो सीमा मिश्रा ने बावन इमली की घटना के स्रोतों पर चर्चा किया। आशीष त्रिपाठी ने इन लेखों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए क्यू आर कोड के माध्यम से डिजिटल करने की बात कही। डॉ. रचना सिंह ने इन लेखों को बच्चों में संस्कार और देशभक्ति की भावना भरने वाला बताया तो श्रुति त्रिपाठी ने बताया कि कैसे इस पुस्तक की छायाप्रतियों को बस्ती के हर विद्यालय में संरक्षित किया गया है। विन्ध्येश्वरी प्रसाद ने काव्यात्मक अंदाज में पुस्तक की चर्चा की। कार्यक्रम में पुस्तक के लेखन के दौरान आयी चुनौतियों और तथ्यों की प्रामाणिकता के लिए किये गए प्रयासों सहित पुस्तक के विविध पक्षों यथा लेखों के गुणवत्ता, पुस्तक कवर, छपाई और उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा हुई। पुस्तक के प्रथम खंड में 1857 के संग्राम से जुड़े क्रांतिकारियों और स्थलों बंधू सिंह, जोधा सिंह, तलाश कुँवरि, हरिप्रसाद मल्ल, नाहर सिंह, हजरत महल, अजीमुल्ला खां, बहादुर शाह, लक्ष्मीबाई, झलकारीबाई, तात्या टोपे, अमरगढ़, कुँवर सिंह का वृत्तान्त शामिल है तो दुसरे खंड में सन् 1857 के पश्चात के अचर्चित नायकों जतिन दा, खुदीराम बोस, दुर्गा भाभी, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह, भगत सिंह, सुखदेव, रासबिहारी बोस, वीर सावरकर, उधम सिंह, बिरसा मुंडा, लाला हरदयाल, अल्लूरी सीताराम, राममूर्ति त्रिपाठी, महेंद्र सिंह, सरदार पटेल, विश्वनाथ शर्मा, अरविन्द घोष, महामना मालवीय जी, गणेश शंकर विद्यार्थी, चन्द्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, हेमू कालाणी, राजेंद्र लाहिड़ी, सुभाषचंद्र बोस, लक्ष्मी सहगल, लाल-बाल-पाल, भीकाजी, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी, सरोजिनी नायडू, राजगुरु की वीरगाथाओं की चर्चा की गयी है।

पुस्तक के संपादक और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षक प्रमोद दीक्षित मलय ने इस पुस्तक के लेखन से जुड़े विवध पक्षों यथा प्रशिक्षण, लेखन हेतु संवाद, लेख संपादन, कवर डिजाइन आदि पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए संवाद के दौरान उठे सवालों का जवाब भी दिया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक दुर्गेश्वर राय ने किया। कार्यक्रम में माधुरी त्रिपाठी, आभा त्रिपाठी, अभिलाषा गुप्ता, अमिता सचान, अनुपमा शर्मा, दाऊदयाल वर्मा, डॉ सुमन गुप्ता, वैशाली मिश्रा, हरियाली श्रीवास्तवा, ज्योति जैन, कनकलता, मीरा कुमारी, संजय वस्त्रकार, नीलम रानी, प्रज्ञा, प्रतीक, रिम्पू सिंह, शानू खन्ना, विजय शंकर, डॉ० खुर्शीद हसन, आरती, ममता, दीप्ति, दीपा, गुंजन आदि ने प्रतिभाग किया। शैक्षिक संवाद मंच द्वारा शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पुस्तकों पर प्रतिमाह पुस्तक संवाद का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष मंच द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर संवाद किया जा रहा है। जून माह में संवाद के लिए विद्यालय में एक दिन पुस्तक का चयन किया गया है।

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