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जून 2025 का आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस): रोजगार के क्षेत्र में मौसमी उतार-चढ़ाव का प्रमाण

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जून 2025 माह के लिए जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey – PLFS) के मासिक बुलेटिन में देश के ग्रामीण और शहरी श्रम बाजार की स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह बुलेटिन श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR), श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), तथा बेरोजगारी दर (UR) जैसे प्रमुख संकेतकों पर आधारित है, जिन्हें वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) पद्धति के अंतर्गत एकत्रित किया गया।

मुख्य निष्कर्ष: रोजगार संकेतकों में हल्की गिरावट

मासिक सर्वेक्षण के अनुसार जून 2025 में देशभर में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 54.2% रही, जो मई 2025 में 54.8% थी। वहीं, श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) 51.2% रहा, जो मई में 51.7% था। बेरोजगारी दर (UR) इस माह भी 5.6% पर स्थिर रही।

ग्रामीण बनाम शहरी श्रम भागीदारी दर (LFPR) – जून 2025:

क्षेत्रपुरुष (%)महिला (%)कुल (%)
ग्रामीण78.135.256.1
शहरी75.025.250.4
कुल (देश)77.132.054.2

महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय गिरावट

जून 2025 में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी 35.2% रही, जो मई 2025 में 36.9% थी। यह गिरावट विशेष रूप से उन अवैतनिक सहायकों की संख्या में कमी के कारण है जो सामान्यतः कृषि क्षेत्र से जुड़े होते हैं। कई ग्रामीण महिलाएं इस माह घरेलू कार्यों में लगी पाई गईं। इसके साथ ही, ग्रामीण महिला श्रमिकों की कृषि में हिस्सेदारी मई में 70.2% से घटकर जून में 69.8% हो गई।

श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR):

क्षेत्रपुरुष (%)महिला (%)कुल (%)
ग्रामीण74.133.653.3
शहरी70.222.946.8
कुल (देश)72.830.251.2

यह आंकड़े बताते हैं कि कार्यरत व्यक्तियों का प्रतिशत भी थोड़ा गिरा है। महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 30.2% रहा, जबकि पुरुषों के लिए 72.8%

बेरोजगारी दर (Unemployment Rate – UR):

बेरोजगारी दर देश में 5.6% पर बनी रही, जो कि मई 2025 के आंकड़ों के समान है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 4.9% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में 7.1%

क्षेत्रपुरुष (%)महिला (%)कुल (%)
ग्रामीण5.14.44.9
शहरी6.49.17.1
कुल (देश)5.65.65.6

मौसमी बदलावों का असर

जून 2025 के परिणामों में दर्ज मामूली गिरावट के पीछे मौसम आधारित कृषि पैटर्न और भीषण गर्मी की भूमिका मानी जा रही है, जिसने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बाहरी श्रम कार्यों को प्रभावित किया। इसके अतिरिक्त, अवैतनिक महिला सहायकों ने घरेलू गतिविधियों को प्राथमिकता दी, जिससे उनकी कार्यबल भागीदारी में गिरावट आई।

हालांकि, खाता धारक श्रमिकों (जैसे छोटे व्यापारी, सेवा प्रदाता, मरम्मत कार्यकर्ता) की संख्या में वृद्धि देखी गई, जिससे कुछ हद तक बेरोजगारी को संतुलन मिला है।

तकनीकी दृष्टिकोण से नया दृष्टिकोण

जनवरी 2025 से पीएलएफएस की डिजाइन में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब यह रोटेशनल पैनल सैंपलिंग प्रणाली के अंतर्गत संचालित होता है, जिसमें प्रत्येक चयनित परिवार का चार बार सर्वेक्षण किया जाता है—पहली बार चयन के महीने में और फिर अगले तीन महीनों में।

जून 2025 में कुल 7,520 प्रथम चरण इकाइयों (FSUs) का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें 89,493 परिवारों और 3,80,538 व्यक्तियों को शामिल किया गया।

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