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“रिश्तों के गणित” परस्पर विश्वास व सम्मान, समझ से हल होते हैं: सुरेश सिंह बैस

बिलासपुर। विचारक्रांति साहित्य सेवा संस्थान सिंगरौली, मध्यप्रदेश व अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब के संयुक्त तत्वावधान में  24 दिसम्बर को गणित दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ विचारक्रांति साहित्य सेवा संस्थान सिंगरौली मप्र के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजकुमार जायसवाल द्वारा मां सरस्वती के चरणों में नमन वंदन करते हुए “हम ज्ञान की शिक्षा लेने को, मां द्वार तुम्हारे आए हैं, गीत से हुआ।पश्चचा पद्मश्री स्व.विनोद कुमार शुक्ल जी को विनम्र श्रद्धांजलि के बाद पश्चात अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब के संस्थापिका डॉ अर्चना श्रेया गोष्ठी का संचालन किया।कार्यक्रम के प्रारंभ में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश सिंह बैस ने कहा जिस प्रकार गणित में संतुलन का होना आवश्यक होता है,ठीक उसी प्रकार रिश्तों में भी संतुलन सबसे बड़ा सूत्र है। और रिश्ते जोड़-घटाव से नहीं, बल्कि समझ और संवेदनशीलता से चलते हैं। जब अपेक्षाएँ बढ़ती हैं, तब संवाद और धैर्य उनका संतुलन बनाए रखते हैं।रिश्तों में अहंकार यदि बीच में आ जाए, तो पूरा समीकरण बिगड़ जाता है।सम्मान, समय और माफ़ी-ये तीन ऐसे गुणक हैं, जो किसी भी रिश्ते को मजबूत बना देते हैं। अंततः, रिश्तों का गणित किताबों से नहीं, दिल और विवेक से हल होता है।

मुख्य आतिथ्य विश्वगुरु थिंकिंग टेक्नोलॉजिस पावर मोटीवेटर कमलकांत बिठले रहे

गोष्ठी के मुख्य अतिथि द पावर मोटिवेटर कमलकांत बिटुले, बालाघाट, मध्यप्रदेश, विशेष अतिथि संतोष श्रीवास्तव “विद्यार्थी” सागर, मध्यप्रदेश (सेवा निवृत डिप्टी कलेक्टर), विशिष्ट अतिथि शंनवताराम बामनिया, जालौर राजस्थान, कार्यक्रम अध्यक्ष दिव्यांजलि वर्मा, अयोध्या उत्तरप्रदेश (श्रीराम साहित्य सेवा संस्थान की

संस्थापिका) को ने भी अपने विचार रखे।  गोष्ठी में आमंत्रित सभी विद्वान विचारकों ने बढ़ चढ़कर प्रेरक, अनुकरणीय व जीवन में रिश्तों को ठीक करने के विचारों को साझा किया, जिसमें अपने जीवन के रिश्तों में प्रेम, विश्वास, समर्पण, निस् वार्थता, दायित्व बोध, सम्मान, आपसी संवाद, अपनापन, शांति, मित्रता, सहनशीलता, विनम्रता, कृतज्ञता, संतोष, ईमानदारी आदि जैसे टूल्स को अपने रिश्तों में जोड़ने के लिए बात कही, वहीं क्रोध, घमंड, स्वार्थ, उम्मीद, संवाद हीनता, लालच, अविश्वास, अपेक्षाएं, गलतफहमी, द्वेष, ईर्ष्या आदि टूल्स को अपने रिश्ते से घटाने के बात कही। वहीं, प्रेम, विश्वास सम्मान, अपनापन आदि टूल्स को गुणित करते हुए जीवन में बढाने, अपनाने की बात कही। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार व विचार क्रांति साहित्य प्रोत्साहन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” (बिलासपुर, छत्तीसगढ़), पूनम मिश्रा (सिवनी, मध्यप्रदेश), सुनीता मिश्रा (लखनऊ, उत्तरप्रदेश), डॉक्टर संतोष कुमार मिरी (रायपुर, छत्तीसगढ़)  डॉ० रोहित कुमार (पटना, बिहार), जगदीश प्रसाद गबेल (सक्ती, छत्तीसगढ़), विरेंद्र जैन माहिर (वड़ोदरा, गुजरात), डॉ० विश्वंभर दयाल अवस्थी (खुर्जा, बुलंदशहर उ. प्र.), डॉ० (कु०) शशि जायसवाल (प्रयागराज, उत्तर प्रदेश), प्रो० (डॉ०) शरद नारायण खरे (मंडला, मध्यप्रदेश), डॉ० यशपाल सिंह (दिल्ली, भारत), डॉ० संजीदा खानम शाहीन (जोधपुर, राजस्थान), प्रदीप कुमार (मुंगेर, बिहार), पिंकी दास लिकचन (असम, भारत), अविनाश खरे जी (पुणे, महाराष्ट्र) किरन अग्रवाल (प्रतापगढ़, उत्तरप्रदेश) श्रीमती संध्या श्रीवास्तव ‘साँझ’ जी (छतरपुर मध्यप्रदेश), डॉ० गनेश कुमार सोनी (नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश), सुनील कुमार “खुराना” (नकुड़, सहारनपुर उ.प्र.), डॉ० गनेश कुमार सोनी (नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश), डॉ० सपना गुप्ता “सौभाग्यशक्ति” (इंदौर, मध्यप्रदेश), दिव्यांजलि सोनी “दिव्या” (सागर, मध्यप्रदेश) व डॉ अभय कुमार (सागर, मध्यप्रदेश) आदि रचनाकार विचारगोष्ठी में आमंत्रित थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पावर मोटीवेटर कमलकांत बिटुले, बालाघाट, मध्यप्रदेश (विश्वगुरु थिंकिंग टेक्नोलॉजीस) ने कहा कि विचारों की पवित्र भूमि पर आयोजित यह “ऑनलाइन कार्यक्रम” मेरे लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संवेदना, संवेदना की समझ और संबंधों की गहराई को छूने वाला एक आत्मिक अनुभव रहा। “रिश्तों का गणित जैसे अत्यंत सूक्ष्म, संवेदनशील और जीवनोपयोगी विषय पर देश के विभित्र कोनों से पधारे विद्वान आचार्यों, चिंतकों एवं विदुषियों के विचार सुनकर मन गहराई से आलोकित और हृदय भाव-विभोर हो उठा। यह स्पष्ट अनुभव हुआ कि जब विचार करुणा से निकलते हैं, तब वे केवल बुद्धि नहीं आत्मा को भी स्पर्श करते हैं। कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही दिव्यांजलि वमों के मुखारबिंद से “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ किया गया। अंत में सभी साहित्यकारों को “अंतरराष्ट्रीय श्रेया साहित्य सम्मान” से सम्मानित किया गया।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
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