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आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटैट इंडिया ने छत्रपति संभाजीनगर में किया बायोडायवर्सिटी पार्क का उद्घाटन

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में स्थानीय जैव-विविधता को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट (आकाह) इंडिया ने छत्रपति संभाजीनगर में एक बायोडायवर्सिटी पार्क का शुभारंभ किया है। यह पार्क खाम नदी के किनारे विकसित किया गया है। यह पहल शहर की नदी तट के पुनरुद्धार और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम छत्रपति संभाजीनगर के साथ मिलकर की गई है, जिसमें प्रिंस सदरुद्दीन आगा खान फंड फॉर द एन्वायर्नमेंट (पीएसएकेएफई) का भी सहयोग मिला है।

यह पार्क करीब 1,90,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। इससे शहर के आसपास का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है, साथ ही यह भी दिखाया जा रहा है कि पानी और सफाई को सही तरीके से कैसे संभाला जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पार्क लोगों को फिर से खाम नदी और अपने इलाके की प्राकृतिक पहचान से जोड़ने का काम करेगा। यहाँ स्थानीय, औषधीय, सजावटी और बाँस की प्रजातियों का बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है, साथ ही बटरफ्लाई और औषधीय (मेडिसिनल) गार्डन्स भी विकसित किए गए हैं। पार्क में एक कृत्रिम तालाब भी है, जो जैव-विविधता को बढ़ावा देता है और पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ करने में मदद करता है। पर्यावरण के अनुकूल रास्ते, सोलर लाइट्स, बाँस से बने गजेबो, बायो-टॉयलेट और लोगों के लिए सीखने-समझने की जगहें भी बनाई गई हैं। यहाँ 59 केएलडी क्षमता का एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी है, जो पानी के दोबारा इस्तेमाल और सर्कुलर इकोलॉजी के सिद्धांतों पर काम करता है। यह एसटीपी रोज़ खाम नदी से आने वाले गंदे पानी को साफ करता है और उसी पानी का इस्तेमाल बायोडायवर्सिटी पार्क की सिंचाई में किया जाता है।

पौधारोपण के तहत यहाँ 1,067 देसी पौधे, 42 तरह के औषधीय पौधे, 1,072 सजावटी पौधे और 600 बाँस के पौधे लगाए गए हैं। इन सभी पौधों को खास तौर पर ऐसे चुना गया है, जो कम पानी में भी अच्छे से पनप सकें, सूखे इलाके के अनुकूल हों और तितलियों, पक्षियों व कीड़ों को आकर्षित करें। सिर्फ इतना ही नहीं, ये पौधे मिट्टी को मजबूत रखने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी मदद करेंगे।

पार्क की एक और खास पहचान यहाँ बनाया गया कृत्रिम तालाब है। यह तालाब सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बहुत उपयोगी है। यह पानी में रहने वाले पौधों और जीवों को पनाह देता है, जिससे जैव विविधता बढ़ती है। यह तालाब बारिश के पानी को रोकने, जमीन के अंदर पानी पहुँचाने और ऊपर से आने वाले गंदे पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ करने में भी मदद करता है।

छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम के आयुक्त जी श्रीकांत ने कहा, “कई वर्षों तक यह भूमि सिर्फ कचरे और लापरवाही के लिए जानी जाती थी। आज यह जगह एक नई कहानी बयाँ कर रही है। यहाँ जो कुछ भी आप देख रहे हैं, वह नगर निगम की टीम, सफाई कर्मचारियों और आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट इंडिया की लगातार मेहनत का परिणाम है, जिसने एक भूली-बिसरी जगह को शहर और उसके लोगों के लिए स्वच्छ, उपयोगी और सार्थक बना दिया है।”

इस मौके पर आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट इंडिया की सीईओ प्रेरणा लांगा ने कहा, “शहरों में बनने वाले ऐसे बायोडायवर्सिटी पार्क सिर्फ सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं होते, बल्कि जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर होते हैं। खाम नदी के किनारे देसी पर्यावरण को फिर से जीवित करके हम शहर के मौसम को बेहतर बना रहे हैं, पानी की व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं और लोगों के लिए ऐसे खुले स्थान बना रहे हैं, जहाँ वे प्रकृति से जुड़ सकें। यह पार्क हमारी उस सोच को दिखाता है, जिसमें जलवायु सुरक्षा का मार्ग प्रकृति, समुदाय की भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों की दीर्घकालिक देखभाल से होकर जाता है, खासकर मराठवाड़ा जैसे जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में।”

इस विस्तार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बर्ड पार्क भी होगा, जहाँ पक्षियों के लिए खास माहौल बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करना है, ताकि यह जगह शहर के बीच पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन सके और आम लोगों व छात्रों के लिए सीखने की जगह भी बने।

आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट इंडिया ने मराठवाड़ा क्षेत्र को इसलिए चुना, क्योंकि यहाँ प्रदूषण बढ़ रहा है और शहरों में स्थानीय जैव विविधता को फिर से मजबूत करने की जरूरत है। यह प्रोजेक्ट शहर के मौसम को बेहतर बनाने, गर्मी के असर को कम करने, पानी और साफ-सफाई के टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देने और लोगों को नदी व उसके आसपास के प्राकृतिक माहौल से फिर से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।

मराठवाड़ा में एकेएएच इंडिया की यह पहल शहरों में बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और घटती जैव विविधता जैसी समस्याओं को ध्यान में रखकर की गई है। यह परियोजना दिखाती है कि किस तरह शहरों में हरित और पर्यावरण के अनुकूल स्थान तैयार कर जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। आने वाले समय में यह मॉडल देश के तेजी से बढ़ते दूसरे शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

उद्घाटन समारोह में उप आयुक्त (बागवानी) डॉ. विजय पाटिल, उप आयुक्त (अपशिष्ट प्रबंधन) नंदकिशोर भोम्बे, उप आयुक्त (स्मार्ट सिटी) रविंद्र जोगदंड, सहायक आयुक्त संजय सुराडकर और सहायक आयुक्त एवं वार्ड अधिकारी सविता सोनावाने उपस्थित रहे।

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