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श्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई किस्में राष्ट्र को किया समर्पित

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स स्थित ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित 25 फील्ड फसलों की 184 उन्नत किस्मों का अनावरण किया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तत्वावधान में आयोजित किया गया जिसमें वैज्ञानिकों, वरिष्ठ अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत ने उच्च उत्पादक बीजों के विकास में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। वर्ष 1969 में शुरू हुई गजट अधिसूचना प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 7205 फसल प्रजातियों को अधिसूचित किया जा चुका है जिनमें धान, गेहूं, ज्वार, मक्का, दलहन, तिलहन, रेशेदार और अन्य फसलें शामिल हैं, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में पिछले 11–12 वर्षों में नई किस्मों के विकास की गति और तेज हुई है, अकेले इस अवधि में 3236 उच्च उत्पादक प्रजातियों को मंजूरी मिली है, जबकि 1969 से 2014 तक 3969 प्रजातियों को अधिसूचित किया गया था। अब अधिसूचित 184 उन्नत किस्मों का लोकार्पण किया गया है, जो देश के किसानों को अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और जलवायु सहनशीलता जैसे लाभ देंगी।

उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसल संबंधी समन्वित परियोजनाओं के तहत परिषद की संस्थाओं, राज्य व केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों ने मिलकर इन किस्मों के विकास में अहम योगदान दिया है। विशेष गुणों वाली कई प्रजातियां, जैसे सूखा सहनशील, लवणीय‑क्षारीय मिट्टी में उपज देने वाली और रोग‑कीट प्रतिरोधी किस्में, किसानों को बदलते मौसम और जलवायु संकट से सुरक्षा कवच देंगी।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत उच्च उत्पादक और जलवायु सहनशील बीजों के विकास के दम पर कृषि में नई क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसलों की अखिल भारतीय समन्वित परियोजनाओं, राज्य व केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। कुल 184 हाल की प्रजातियों के विकास में परिषद की संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों ने क्रमशः 60, 62 और 62 प्रजातियों के साथ योगदान दिया है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कई नई लोकार्पित किस्मों में सूखा, बाढ़, लवणीयता और रोग‑कीट प्रतिरोध जैसे विशेष गुण निहित हैं, जो मौसम की अनिश्चितता के बीच स्थिर उत्पादन सुनिश्चित करेंगे। उच्च पैदावार के साथ‑साथ इन किस्मों में बेहतर गुणवत्ता, पोषण‑समृद्धि और प्रसंस्करण‑उपयुक्तता जैसे गुण भी हैं, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न मिलेगा। यह ‘लैब से लैंड’ की यात्रा का सफल मॉडल है।

उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि हर किसान के खेत तक उच्च गुणवत्ता वाले बीज पहुंचें, ताकि भारत न सिर्फ अपने लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए अन्न उत्पादन करने वाला देश बने। केंद्रीय कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि को ‘विकसित भारत’ के निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि देश ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर 150.18 मिलियन टन उत्पादन के साथ नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि भारत अब खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर चुका है और दुनिया को अन्न प्रदान करने वाला राष्ट्र बन गया है। केंद्रीय मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए किसानों, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र को बधाई दी।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भारत के निर्माण का महायज्ञ चल रहा है, जिसमें कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका है। उन्होंने बताया कि बीज किसी भी उत्पादन प्रणाली की आत्मा है और अब भारत केवल अन्न ही नहीं बल्कि पोषणयुक्त अन्न के उत्पादन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। देश भर के किसानों के लिए 25 फसलों की 184 नवीन प्रजातियां जारी की गई हैं, जिन्हें तीन वर्षों के भीतर किसानों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि योजनाओं के साथ ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ जैसी नई योजनाओं का कन्वर्जेन्स बढ़ाकर जल संरक्षण, कृषि वानिकी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में कार्य करेगी। केंद्रीय मंत्री ने दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया और कहा कि इस क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाना, मूल्य स्थिर रखना और प्रोसेसिंग व्यवस्था विकसित करना केंद्र की प्राथमिकता है।

कार्यक्रम में कुल 122 अनाज फसलों की किस्में जारी की गईं, जिनमें धान की 60 और मक्का की 50 नई किस्में प्रमुख हैं। इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, लघु मिलेट्स और प्रोसो मिलेट की भी उन्नत किस्में शामिल हैं, जो पोषण सुरक्षा और जलवायु सहनशीलता को मजबूत करेंगी। दलहनों की 6 नई किस्में (अरहर, मूंग और उड़द) जारी की गई हैं जो प्रोटीन सुरक्षा और फसल विविधीकरण को गति देंगी। तिलहनों के लिए सरसों, कुसुम, तिल, मूंगफली, गोभी सरसों और अरंडी सहित 13 नई किस्में तथा 11 चारा फसलों की किस्में पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन साबित होंगी। कार्यक्रम में गन्ने की 6 और कपास की 24 किस्में, जिनमें 22 बीटी कपास भी शामिल हैं, किसानों के लिए जारी की गईं। जूट और तंबाकू की एक-एक नई किस्म भी रिलीज की गई जो संबंधित क्षेत्रों के किसानों के लिए अधिक उत्पादन और बेहतर रिटर्न का अवसर प्रदान करेगी।

इन 184 किस्मों को आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी के प्रकार और खेती की पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए वर्षों के शोध, परीक्षण और मूल्यांकन के बाद विकसित किया है।

कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी उपस्थित थे जिन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। वहीं, राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और केंद्रीय कृषि मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डॉ. श्रीमती मनिंदर कौर द्विवेदी ने NSC की ओर से 33.26 करोड़ रुपए के लाभांश का चेक केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को भेंट किया।

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