भारतीय राजनीति इस समय लाभार्थी योजनाओं और गारंटी आधारित राजनीति के दौर से गुजर रही है। चुनावी विमर्श अब केवल विचारधारा, संगठन या भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे इस सवाल पर टिक गया है कि आम नागरिक के जीवन में कौन-सी योजना कितना ठोस, निरंतर और भरोसेमंद लाभ पहुंचा रही है। मध्य प्रदेश इसका सबसे जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान सरकार की ‘लाड़ली बहना योजना’ और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं ने राजनीति की दिशा ही बदल दी। अब, जब 2028 का विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है, तो यह सवाल और ज्यादा प्रासंगिक हो गया है कि क्या यही योजनाएं दोबारा निर्णायक साबित होंगी, या कांग्रेस की गारंटी आधारित राजनीति कोई नया करिश्मा करने में सफल हो पाएगी।

मध्य प्रदेश की राजनीति में लाभार्थी योजनाओं का इतिहास पुराना है, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने इसे एक नए स्तर पर पहुँचाने का कार्य किया है। लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक चेतना भी प्रदान की है। हर महीने सीधे खाते में आने वाली राशि ने लाखों महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव किया है। यह योजना घर-परिवार के फैसलों से लेकर चुनावी व्यवहार तक में महिलाओं की भूमिका को मजबूत कर रही है। यही कारण है कि 2023 में महिला मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा नजर आया।
इसी तरह किसान कल्याण योजनाओं जैसे किसान सम्मान निधि, सिंचाई परियोजनाएं, फसल बीमा, बिजली राहत और कर्ज से जुड़ी सहायताओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने का काम किया है। इन योजनाओं का असर केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेत, खलिहान और गांव की रोजमर्रा की जिंदगी में साफ दिखाई भी दिया। किसानों को लगा कि सरकार सीधे उनकी समस्या समझ रही है और समय पर राहत दे रही है। यही तत्काल और मापने योग्य लाभ इन योजनाओं की सबसे बड़ी ताकत कही जा सकती है।

