ट्रिन… ट्रिन… ट्रिन… ट्रिन… मेरी जेब में रखे मोबाइल फोन की घंटी लगातार बज रही थी। मैं तब ह्यूमन राइट एसोसिएशन की प्रदेशसभा में बैठा हुआ था। कार्यक्रम चल रहा था। मेरे साथ सैकड़ो लोग हाल में मौजूद थे। मैंने जेब से निकाल कर मोबाइल देखा तो कोई अननोन नंबर से काल किया जा रहा था। मैंने फोन जैसे ही ऑन किया, उधर से महिला की कड़कदार आवाज आई उसने सीधे ही कहा-” आप सुरेश सिंह जी बोल रहे हैं?” मैंने कहा जी हां, मैं ही बात कर रहा हूं! फिर मैंने कहा आप कौन बात कर रहे हैं? तब उसने मुझे धमकाते हुए लहजे में कहा कि मैं दिल्ली साइबर क्राइम ब्रांच के कंट्रोल रूम से बोल रही हूं! आपको अरेस्ट वारंट जल्द ही मिलने वाला है, आपको अरेस्ट किया जा रहा है। ये सुनकर एक पल को तो मुझे कुछ समझ नही आया, फिर भी मैंने पूछा अरेस्ट किए जाने का कारण क्या है? तो उसने जवाब दिया आप अश्लील कंटेंट लोगों से शेयर करते हैं,और अभी भी आपकी टीवी पर अश्लील कंटेंट चल रहा है!

अब साहब मैं तो ह्यूमनराइट के सम्मिट में बैठा हुआ था। जल्द ही मैं समझ गया कि यह क्या हो रहा है। वैसे भी उसने एक वाक्य कहकर बहुत बड़ी गलती कर दी थी कि आपकी टीवी में अभी भी अश्लील कंटेंट चल रहा है। यह भी अच्छा इत्तेफाक था कि मेरी बगल की सीट में ऐसीबी क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर जो मेरे छोटे भाई भी लगते हैं, वह बैठे हुए थे। मैंने तत्काल ही मोबाइल में उनसे कहा महोदया.. आपको शायद नहीं मालूम..आपने कहां फोन लगाया है! मैं खुद ही ऐसीबी क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बोल रहा हूं। बताइए आगे क्या कहना है। इतना सुनते ही तत्काल उसने फोन कट कर दिया। यह मेरी सजगता थी या संयोग था कि उसने गलत समय में गलत व्यक्ति को फोन लगाया वरना वह तो बुरी तरह से डरा कर हाउस अरेस्ट करने पर ही तुली हुई थी। ऐसे ही न जाने कितने लोगों को ऐसा ही फोन कर लोगों को डराया धमकाया जाता है फिर उनसे एक मोटी रकम वसूली जाती है । लोग मानसिक, आर्थिक परेशानियों में उलझ जाते हैं इन सभी वाक्यातों में यह भी बड़ी विडंबना वाली बात है कि इन साइबर ठगों और अपराधियों के जाल में अच्छे-अच्छे पढ़े लिखे लोग भी झांसे में आ जाते हैं। जबकि ये साइबर ठग कम पढ़े लिखे और जीवन में असफल लोग होते हैं।

