रंगन के त्योहार में मचा रहे सब भंग । करनी अपनी देख के, काहे तुम हो दंग ।। काले मन को धो ज़रा, श्याम को ले बसाय । कान्हा जी की सीख में, असली रंग समाय।। रंग बना ले प्रेम का, भर वाणी से डार । डूब प्रेम के रंग में, सँवरे सब संसार ।। कर होलिका दहन सबै, रीत-रिवाज निभाय । भीतर को विष जार कें, जग खौं लियो बचाय ।। जौं लौं अपनी सोच सें, काड़त नाहीं वार । झूठे रंग बिखेर के, पाओ आर न पार ।। छल-छल कें सब छल गयो,रीते दोई हात । प्रेम रंग खौं छांड़ि के, सब पीछे पछतात ।। अबकी होली यूँ मना, बनें सभी जन नेक । मिलन कहे सब भूल जा, रंग रक्त कौ एक ।।
भावना अरोड़ा ‘मिलन’ अध्यापिका, लेखिका, मोटिवेशनल स्पीकर
Book Showcase
Best Selling Books
Ikigai: The Japanese secret to a long and happy life