केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 13 से 15 जनवरी 2026 तक इज़राइल की सफल आधिकारिक यात्रा संपन्न की। यह प्रतिनिधिमंडल इज़राइल के ईलात शहर में आयोजित दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन “ब्लू फूड सिक्योरिटी: सी द फ्यूचर 2026” में भाग लेने के लिए गया था। यह यात्रा मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में भारत और इज़राइल के बीच द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम मानी जा रही है।

वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त उपस्थिति
मंत्री राजीव रंजन सिंह ने शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाग लिया, जहां उन्होंने इज़राइल के कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्री अवि डिक्टर, क्षेत्रीय सहयोग मंत्री डेविड एमसलेम, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श किया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर घाना, जॉर्जिया और अज़रबैजान के मंत्रियों सहित अनेक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जबकि जॉर्डन, मोरक्को, रोमानिया और फिलीपींस जैसे देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की।
नीली अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर भारत का दृष्टिकोण
मंत्री ने खाद्य सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था पर आयोजित वैश्विक मंत्रिस्तरीय पैनल चर्चा में भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति, उत्पादन में वृद्धि, आजीविका सृजन और निर्यात संभावनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए सतत नीली अर्थव्यवस्था प्रथाओं, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
प्रौद्योगिकी और नवाचार पर केंद्रित सहभागिता
यात्रा के दौरान मंत्री ने इज़राइली कृषि मंत्री द्वारा उद्घाटन की गई एग-टेक इनोवेशन प्रदर्शनी का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य पालन, जलीय कृषि, ब्लू फूड और समुद्री नवाचार के क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप्स के साथ संवाद किया। इस सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक प्रौद्योगिकी और नवाचार किस प्रकार सतत क्षेत्रीय विकास को गति दे सकते हैं।
द्विपक्षीय बैठकों से सहयोग के ठोस रास्ते
मंत्री राजीव रंजन सिंह ने अपने इज़राइली समकक्ष अवि डिक्टर और अन्य सहभागी देशों के मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन चर्चाओं का केंद्र व्यापार विस्तार, क्षमता निर्माण, स्टार्टअप आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान तथा समुद्री कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना रहा।
संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर
इस यात्रा का एक प्रमुख और ऐतिहासिक परिणाम भारत और इज़राइल के बीच मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में सहयोग पर संयुक्त मंत्रिस्तरीय आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर रहा। यह घोषणापत्र प्रौद्योगिकी और नवाचार, टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियों, क्षमता निर्माण और व्यापार सहयोग के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। साथ ही यह संयुक्त उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
अन्य देशों के साथ सहयोग की संभावनाएं
मंत्री ने घाना की मत्स्य पालन और जलीय कृषि विकास मंत्री एमेलिया आर्थर से भी मुलाकात की। इस बैठक में सतत विकास, ज्ञान के आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के अवसरों पर चर्चा हुई।
उद्योग जगत और अनुसंधान केंद्रों से संवाद
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इज़राइली उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। इनमें एक्वाकल्चर प्रोडक्शन टेक लिमिटेड के सीईओ एली गोल्डबर्ग द्वारा जल-कुशल और उन्नत मत्स्य पालन प्रौद्योगिकियों पर प्रस्तुति, वायाक्वा थेरेप्यूटिक्स लिमिटेड के सीईओ शाई उफाज़ द्वारा झींगा स्वास्थ्य और जैव सुरक्षा के लिए आरएनए आधारित समाधानों पर चर्चा, तथा बार एल्गी के सीईओ डोरोन आइज़ेनस्टैड द्वारा हैचरी उत्पादकता और बीज गुणवत्ता बढ़ाने के लिए माइक्रोएल्गी प्रौद्योगिकियों पर जानकारी साझा की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने ईलात स्थित राष्ट्रीय मत्स्य पालन केंद्र का भी दौरा किया, जहां ब्रूडस्टॉक विकास, हैचरी प्रौद्योगिकियों, आईएमटीए मॉडल और रोग प्रबंधन जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, सीनोवेशन इनोवेशन सेंटर का भ्रमण कर भारत और इज़राइल के बीच सहयोग के व्यावहारिक मॉडल तलाशे गए।