शैक्षिक संवाद मंच के भव्य समारोह में ‘विद्यालय बनें आनंदघर’ सहित सात पुस्तकों का हुआ विमोचन

चित्रकूट। चित्रकूट में आयोजित शैक्षिक संवाद मंच के विशिष्ट समारोह में साहित्य और शिक्षा के संगम की एक अनूठी झलक देखने को मिली। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षक प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ द्वारा लिखित पुस्तकों ‘विद्यालय बनें आनंदघर’ और ‘धरा गगन के बीच’ सहित कुल सात महत्वपूर्ण कृतियों का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय, ‘पाठा के गांधी’ गोपाल भाई, डायट मंदसौर के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. प्रमोद कुमार सेठिया और उत्तराखंड के डॉ. सुरेन्द्र कुमार आर्यन उपस्थित रहे। इस गरिमामय समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए अर्धशताधिक शिक्षकों और साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

विमोचन के दौरान पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ की कृति ‘विद्यालय बनें आनंदघर’ की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक अनुभव आधारित और गहन शैक्षिक लेखों का खजाना है। उन्होंने इसे वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। वहीं समाजसेवी गोपाल भाई ने प्रकृति संरक्षण पर केंद्रित पुस्तक ‘धरा गगन के बीच’ पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल शब्द नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण क्षरण की पीड़ा और उसके संरक्षण का आह्वान है जिसे लेखक ने बहुत ही संजीदगी से उकेरा है।

शिक्षा और साहित्य के प्रयोगात्मक पहलुओं पर चर्चा करते हुए डॉ. प्रमोद सेठिया ने ‘दिवास्वप्न संवाद’ पुस्तक को एक अद्भुत ग्रंथ की संज्ञा दी। प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ द्वारा संपादित इस कृति में देश के विभिन्न राज्यों के 28 शिक्षकों के उन पत्रों और अनुभवों का संकलन है, जो ‘दिवास्वप्न’ के सिद्धांतों को धरातल पर उतारने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में दुर्गेश्वर राय द्वारा संपादित काव्य संकलन ‘कवितायन’ का भी लोकार्पण हुआ, जिसमें पूरे वर्ष आयोजित अखिल भारतीय काव्य सम्मेलन के बारह संकरणों में शामिल 65 शिक्षक-कवियों की 281 रचनाओं को संजोया गया है। इस संकलन के रचनाकारों को मंच की ओर से ‘काव्य कुसुम सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

समारोह में उत्तराखंड की यात्रा पर आधारित और दुर्गेश्वर राय द्वारा संपादित यात्रा वृत्तांत ‘शैल सफर संवाद’, सीमा मिश्रा द्वारा संपादित काव्य संग्रह ‘भाव-मंजूषा’ और ऋतु श्रीवास्तव द्वारा संपादित बाल पत्रिका ‘बाल उमंग’ के पांचवें अंक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। वक्ताओं ने सामूहिक रूप से कहा कि प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ के लेखन और दुर्गेश्वर राय के संपादन में प्रकाशित ये पुस्तकें साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं, जो भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक साहित्य से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगी।

कार्यक्रम के समापन सत्र में उपस्थित साहित्यकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने सभी पुरस्कृत रचनाकारों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अतिथियों ने एक स्वर में साहित्य के इस विशाल समागम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे बौद्धिक चेतना के प्रसार के लिए एक आवश्यक कदम बताया। अंत में वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ ने सभी अतिथियों, लेखकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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