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माता पिता ही बच्चे के जीवन के पहले और सबसे प्रभावशाली थेरेपिस्ट होते हैं: डॉ. वीरेंद्र कुमार

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 40 स्थित राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी) के क्षेत्रीय केंद्र में क्रॉस डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (सीडीईआईसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि माता पिता बच्चे के जीवन के पहले और सबसे प्रभावशाली थेरेपिस्ट होते हैं। जब माता पिता को सही जानकारी, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग मिलता है, तो विकासात्मक विलंब से जूझ रहा कोई भी बच्चा पीछे नहीं रहता।

माता पिता ही बच्चे के जीवन के पहले और सबसे प्रभावशाली थेरेपिस्ट होते हैं: डॉ. वीरेंद्र कुमार

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था हस्तक्षेप केवल एक सेवा नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। सरकार समावेशी और समयबद्ध सहायता प्रणालियों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को जीवन की शुरुआत से ही समान अवसर मिल सकें।

प्रारंभिक हस्तक्षेप की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि जीवन के पहले छह वर्ष मस्तिष्क विकास, शारीरिक स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और सामाजिक सहभागिता के लिए निर्णायक होते हैं। यदि इस अवधि में सही हस्तक्षेप किया जाए, तो विकासात्मक देरी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सीडीईआईसी जैसे केंद्र सरकार के उस संकल्प का प्रतीक हैं, जिसके तहत बच्चों तक सबसे प्रारंभिक चरण में पहुंचकर वैज्ञानिक, समयबद्ध और करुणामय सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

नोएडा स्थित इस केंद्र को उत्कृष्टता का मॉडल बनाने का निर्देश देते हुए डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि गुणवत्ता केवल भवन या सौंदर्य तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्नत तकनीक, दक्ष पेशेवरों और प्रमाण आधारित पद्धतियों में भी स्पष्ट रूप से दिखनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि परिवार, विशेषकर माता पिता और देखभालकर्ता, सफल प्रारंभिक हस्तक्षेप की धुरी होते हैं। उन्होंने केंद्र को निर्देश दिया कि नियमित और संरचित देखभालकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रमाणन के साथ आयोजित किए जाएं, ताकि परिवार बच्चे की विकासात्मक यात्रा में सक्रिय भागीदार बन सकें।

अपने संबोधन में मंत्री महोदय ने कहा कि पेशेवरों, संस्थानों और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त प्रयासों से सीडीईआईसी को आशा, विश्वास और नवाचार का केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंत्रालय प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाओं को निरंतर मजबूत करता रहेगा, ताकि विकासात्मक विलंब और दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें और समाज में सम्मानजनक तथा सार्थक सहभागिता सुनिश्चित कर सकें।

इस अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की अपर सचिव श्रीमती मनमीत कौर नंदा ने देश भर में क्रॉस डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर्स के विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नोएडा में उद्घाटित यह केंद्र विभाग के अंतर्गत स्थापित 28वां सीडीईआईसी है, जो प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप को लेकर मंत्रालय के निरंतर और केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने एनआईईपीआईडी की टीम को उच्च गुणवत्ता वाली, बाल केंद्रित और परिवार उन्मुख सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया और ऐसे केंद्रों को देश भर में सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

नोएडा स्थित सीडीईआईसी को विकासात्मक विलंब और अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए समग्र और बहु विषयक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। यह केंद्र व्यावसायिक चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, वाक् एवं भाषा चिकित्सा, चिकित्सा परामर्श, विशेष शिक्षा, पारिवारिक परामर्श और विद्यालय तैयारी से जुड़े हस्तक्षेप जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त यह केंद्र नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों ने सीडीईआईसी की सुविधाओं, मॉडल विशेष शिक्षा केंद्र, मॉडल समावेशी प्राथमिक विद्यालय और एनआईईपीआईडी क्षेत्रीय केंद्र का भ्रमण किया। उन्होंने मोबाइल थेरेपी बस और पीएमडीके सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। इस अवसर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

कार्यक्रम में एनआईईपीआईडी दिशा पाठ्यक्रम सामग्री का वितरण किया गया और लाभार्थियों को सहायक उपकरण, यंत्र तथा शिक्षण अधिगम सामग्री भी प्रदान की गई। इससे बच्चों और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा और केंद्र की व्यवहारिक उपयोगिता भी सामने आई।

कार्यक्रम का समापन केंद्रीय मंत्री और अपर सचिव के नेतृत्व में वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ। यह अभियान विकास, स्थिरता और समय पर देखभाल के माध्यम से प्रत्येक बच्चे की क्षमता के पोषण तथा सामूहिक उत्तरदायित्व के साझा संकल्प का प्रतीक बना।

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