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दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण को मिली गति: ‘जहां है, जैसा है’ मॉडल से 45 लाख लोगों को राहत

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण और व्यापक निर्णय लेते हुए 1511 कॉलोनियों को “जहां है, जैसा है” के आधार पर नियमित करने का रास्ता साफ कर दिया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे दिल्लीवासियों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि यह निर्णय न केवल कानूनी स्वामित्व का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि शहरी विकास की प्रक्रिया को भी नई दिशा देगा।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में लागू की गई पीएम-उदय योजना का उद्देश्य अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को संपत्ति अधिकार प्रदान करना था। अब “जहां है, जैसा है” के सिद्धांत पर नियमितीकरण के निर्णय से यह प्रक्रिया और अधिक व्यावहारिक तथा प्रभावी बन सकेगी। इससे निवासी अपनी संपत्तियों के पंजीकरण के लिए आगे आएंगे और उन्हें एमसीडी मानकों के अनुरूप निर्माण एवं पुनर्निर्माण की अनुमति भी मिल सकेगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को सामाजिक न्याय और अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि लंबे समय से अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी मान्यता से वंचित परिवारों के लिए यह निर्णय राहत और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 को नियमित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे लगभग 45 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने आवेदन प्रक्रिया की समय-सीमा भी स्पष्ट की। 24 अप्रैल 2026 से आवेदन प्रारंभ होंगे, जिसमें 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों में आवेदन की कमियों का समाधान और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पीएम-उदय योजना का आधार और वर्तमान स्थिति

अक्टूबर 2019 में अधिसूचित “दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019” के तहत प्रधानमंत्री-उदय योजना लागू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, बिक्री समझौता और अन्य दस्तावेजों के आधार पर निवासियों को स्वामित्व अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।

अब तक लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख और अधिकार पर्चियां जारी की जा चुकी हैं। हालांकि, योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रुचि का एक प्रमुख कारण यह रहा कि अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण या नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे।

‘जहां है, जैसा है’ मॉडल: बाधाओं का समाधान

नए निर्णय के तहत लेआउट योजना की अनिवार्यता को समाप्त करते हुए नियमितीकरण को सरल बनाया गया है। इसके अंतर्गत:

  • सभी पात्र कॉलोनियों में भूमि उपयोग को आवासीय माना जाएगा।
  • मौजूदा निर्माण को यथास्थिति में मान्यता दी जाएगी।
  • छोटे सुविधा स्टोरों को भी निर्धारित शर्तों के साथ नियमित किया जाएगा।
  • एमसीडी और अन्य स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे।
  • राजस्व विभाग पात्र निवासियों को स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध कराएगा।

यह दृष्टिकोण स्वामित्व अधिकार तक सीमित रहने के बजाय समग्र शहरी एकीकरण की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

डिजिटल प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय

आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरल बनाया गया है। Municipal Corporation of Delhi के स्वगम पोर्टल के जरिए आवेदन, सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया संचालित होगी। Delhi Development Authority और दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

पुनर्निर्माण और विकास के प्रावधान

पुनर्विकास और नए निर्माण के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई, भूमि समर्पण और एफएआर से जुड़े प्रावधान भी निर्धारित किए गए हैं। इससे शहरी ढांचे को व्यवस्थित करने और भविष्य के विकास को संतुलित रखने में सहायता मिलेगी। उपग्रह चित्रों के आधार पर लेआउट योजनाएं तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा, हालांकि उनकी अनुपस्थिति अब नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगी।

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