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फार्मास्युटिकल गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम

भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर विकसित करने के उद्देश्य से Indian Pharmacopoeia Commission (आईपीसी) ने दो महत्वपूर्ण संस्थागत समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते Pharmaceuticals and Medical Devices Bureau of India (पीएमबीआई) और National Institute of Pharmaceutical Education and Research Hajipur (एनआईपीईआर, हाजीपुर) के साथ किए गए हैं, जो देश में दवा गुणवत्ता, अनुसंधान और रोगी सुरक्षा को एक नए स्तर तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

यह पहल Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार की उस व्यापक नीति दृष्टि के अनुरूप है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ फार्मास्युटिकल उत्कृष्टता को संस्थागत सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

जनऔषधि दवाओं की गुणवत्ता पर केंद्रित सहयोग

आईपीसी और पीएमबीआई के बीच हुआ समझौता मुख्यतः प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली सस्ती दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इस व्यवस्था के तहत पीएमबीआई द्वारा चयनित दवा बैचों को गुणवत्ता परीक्षण हेतु आईपीसी को भेजा जाएगा, जिससे जनऔषधि दवाओं की विश्वसनीयता और मानकीकरण को मजबूत किया जा सके।

यह सहयोग Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana के अंतर्गत संचालित जनऔषधि केंद्रों में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा। इसके लिए भारत की राष्ट्रीय फार्मुलरी (एनएफआई) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे चिकित्सीय निर्णय अधिक साक्ष्य-आधारित बन सकें।

फार्माकोविजिलेंस को मिलेगा नया आयाम

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों को सुदृढ़ करना है। Pharmacovigilance Programme of India (पीवीपीआई) के क्यूआर कोड और टोल-फ्री हेल्पलाइन को जनऔषधि केंद्रों पर प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (एडीआर) की रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा।

यह कदम न केवल रोगी सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि दवाओं के प्रभाव और दुष्प्रभावों के संबंध में वास्तविक समय पर डेटा संग्रह और विश्लेषण को भी सक्षम बनाएगा, जो नियामक निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण और जागरूकता: फार्मासिस्ट की भूमिका पर जोर

आईपीसी और पीएमबीआई संयुक्त रूप से फार्मासिस्टों और अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इन कार्यक्रमों में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग, एडीआर रिपोर्टिंग टूल्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में फार्मासिस्टों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

यह पहल जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा वितरण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के साथ-साथ फार्मास्युटिकल प्रथाओं में पेशेवर दक्षता को भी बढ़ाएगी।

अनुसंधान और नवाचार की दिशा में आईपीसी-एनआईपीईआर साझेदारी

आईपीसी और एनआईपीईआर, हाजीपुर के बीच हुआ दूसरा समझौता फार्मास्युटिकल विज्ञान में अनुसंधान, अकादमिक सहयोग और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। एनआईपीईआर, जो राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, फार्मास्युटिकल विश्लेषण, बायोलॉजिक्स और नैदानिक अनुसंधान में उन्नत विशेषज्ञता रखता है।

इस साझेदारी के तहत अशुद्धियों की प्रोफाइलिंग, विशेष रूप से नाइट्रोसेमाइन जैसी जीनविषाक्त अशुद्धियों पर संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा। इसके साथ ही इन अशुद्धियों और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं के बीच संबंधों का अध्ययन कर साक्ष्य-आधारित फार्माकोपियल मानकों को विकसित किया जाएगा।

उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए मानक निर्माण

समझौते के अंतर्गत बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और उभरते सेल एवं जीन थेरेपी उत्पादों के लिए विश्लेषणात्मक विधियों, गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल और संदर्भ मानकों के विकास पर भी कार्य किया जाएगा। इन मानकों को भारतीय फार्माकोपिया में शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे, जिससे देश में अत्याधुनिक चिकित्सा उत्पादों के लिए नियामक ढांचा और मजबूत हो सके।

संस्थागत क्षमता निर्माण और अकादमिक आदान-प्रदान

दोनों संस्थान प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सेमिनारों, सम्मेलनों और कार्यशालाओं के आयोजन में सहयोग करेंगे। साथ ही संकाय आदान-प्रदान, इंटर्नशिप और फैलोशिप कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों और शोधार्थियों को उन्नत अनुसंधान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

संयुक्त रूप से शोध पत्रों, प्रशिक्षण मैनुअल और शैक्षिक सामग्रियों का प्रकाशन भी इस सहयोग का हिस्सा होगा, जो फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता को नई दिशा देगा।

व्यापक प्रभाव और रणनीतिक महत्व

इन दोनों समझौता ज्ञापनों के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह केवल सस्ती दवाओं की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा और वैज्ञानिक मानकों को भी वैश्विक स्तर पर स्थापित करना चाहता है।

यह पहल देश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को अधिक सुदृढ़, जवाबदेह और नवाचार-उन्मुख बनाएगी। साथ ही, यह भारत को फार्मास्युटिकल गुणवत्ता और नियामक उत्कृष्टता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य करेगी।

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